28 जून 2026
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मन की बात 135: मोदी ने 'ब्रह्मकमल डोमिनिकाना' की सराहना की, बोले — दुनिया भारतीय संस्कृति को अपना रही है

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मन की बात 135: मोदी ने 'ब्रह्मकमल डोमिनिकाना' की सराहना की, बोले — दुनिया भारतीय संस्कृति को अपना रही है

सारांश

हजारों किलोमीटर दूर कैरेबियाई देश में स्पेनिश बोलने वाले लोग वैदिक मंत्रों का जाप कर रहे हैं — बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के। मन की बात के 135वें एपिसोड में PM मोदी ने 'ब्रह्मकमल डोमिनिकाना' की इस प्रेरक यात्रा को दुनिया के सामने रखा और मेघालय के लिविंग रूट ब्रिजों के लिए यूनेस्को दर्जे की बात कही।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 28 जून को मन की बात के 135वें एपिसोड में भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार पर बात की।
डोमिनिकन रिपब्लिक में स्पेनिश भाषी समूह 'ब्रह्मकमल डोमिनिकाना' बिना औपचारिक प्रशिक्षण के वैदिक मंत्र — पुरुष सूक्तम, श्री रुद्रम, देवी महात्मयम आदि — सीख चुका है।
डोमिनिकन रिपब्लिक में भारतीयों की संख्या लगभग 100 या उससे कम है, फिर भी वहाँ भारतीय आध्यात्म की गहरी जड़ें बन रही हैं।
मोदी ने मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज को मानव-प्रकृति सहयोग का प्रतीक बताया; इन्हें बनने में कई दशक लगते हैं।
भारत ने इन रूट ब्रिजों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट नेटवर्क में शामिल कराने के लिए आवेदन किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 28 जून को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 135वें एपिसोड में कहा कि भारतीय संस्कृति, संगीत और आध्यात्म आज दुनिया के कोने-कोने में अपनी जड़ें जमा रहे हैं। उन्होंने डोमिनिकन रिपब्लिक के एक स्थानीय समूह का विशेष उल्लेख किया, जो हजारों किलोमीटर दूर कैरेबियाई सागर में रहकर वैदिक मंत्रों का अध्ययन और जाप कर रहा है।

ब्रह्मकमल डोमिनिकाना: वैदिक परंपरा का कैरेबियाई अध्याय

मोदी ने बताया कि डोमिनिकन रिपब्लिक में भारतीयों की संख्या लगभग 100 या उससे भी कम है, फिर भी वहाँ स्पेनिश भाषी स्थानीय लोगों ने मिलकर एक समूह बनाया है जिसका नाम 'ब्रह्मकमल डोमिनिकाना' है। इस टीम के सदस्य वैदिक साहित्य का अध्ययन करते हैं और बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के, केवल ऑडियो रिकॉर्डिंग्स के माध्यम से वैदिक मंत्रों का सही उच्चारण सीख चुके हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, 'भारत से इतनी दूर रहकर हमारी परंपराओं को सीखने का उनका यह प्रयास बहुत प्रेरक है। मैं ब्रह्मकमल डोमिनिकाना के सभी सदस्यों को उनके प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देता हूँ।' उन्होंने कहा कि समूह के सदस्य अब पुरुष सूक्तम, श्री सूक्तम, श्री रुद्रम, दुर्गा सूक्तम और देवी महात्मयम जैसे मंत्रों का जाप कुशलतापूर्वक कर लेते हैं।

भारतीय संस्कृति का वैश्विक विस्तार

मोदी ने व्यापक संदर्भ में कहा, 'आज भारतीय संस्कृति दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँच रही है। हमारे गीत, संगीत और आध्यात्म को दुनिया-भर के लोग जान रहे हैं और अपना रहे हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत की सॉफ्ट पावर को लेकर वैश्विक स्तर पर रुचि लगातार बढ़ रही है — योग, आयुर्वेद और भारतीय शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिल रही है।

गौरतलब है कि मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नियमित रूप से उन व्यक्तियों और समूहों को उजागर करते हैं जो देश-विदेश में भारतीय मूल्यों और परंपराओं को जीवंत रखते हैं। यह 135वाँ एपिसोड इस दिशा में एक और कड़ी है।

मेघालय के 'लिविंग रूट ब्रिज' — प्रकृति और धैर्य का अद्भुत संगम

इसी कार्यक्रम में मोदी ने मेघालय की अनूठी सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर — 'लिविंग रूट ब्रिज' — की भी विशेष चर्चा की। उन्होंने बताया कि ये पुल सामान्य निर्माण सामग्री से नहीं, बल्कि रबर के पेड़ों की जड़ों को धीरे-धीरे दिशा देकर तैयार किए जाते हैं। जलधाराओं के पार इन जड़ों को मोड़ने और सँवारने की यह प्रक्रिया कई दशकों तक चलती है।

मोदी ने कहा कि ये 'जीवित पुल' समय के साथ और अधिक मजबूत होते जाते हैं, तथा मेघालय के लोगों की सृजनशीलता, धैर्य और प्रकृति के प्रति सम्मान के प्रतीक हैं। उन्होंने इसे मनुष्य और प्रकृति के सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

यूनेस्को विरासत दर्जे के लिए भारत का आवेदन

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने मेघालय के इन लिविंग रूट ब्रिजों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट नेटवर्क में शामिल कराने के लिए आवेदन किया है। यदि यह दर्जा मिलता है, तो यह न केवल मेघालय बल्कि पूरे भारत की पारंपरिक पारिस्थितिक समझ को वैश्विक मंच पर स्थापित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जमीनी स्तर पर सांस्कृतिक प्रसार को प्राथमिकता देती है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि इस तरह के उदाहरण प्रेरक तो हैं, लेकिन इनसे यह नहीं मापा जा सकता कि भारत की सांस्कृतिक उपस्थिति वैश्विक स्तर पर कितनी व्यवस्थित और टिकाऊ है। मेघालय के रूट ब्रिजों के लिए यूनेस्को आवेदन एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह प्रक्रिया वर्षों तक चल सकती है और परिणाम अनिश्चित रहता है। असली सवाल यह है कि क्या सांस्कृतिक राजनय के ये प्रतीकात्मक क्षण किसी संस्थागत ढाँचे में तब्दील होते हैं, या केवल रेडियो की लहरों तक सीमित रहते हैं।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ब्रह्मकमल डोमिनिकाना' समूह क्या है?
'ब्रह्मकमल डोमिनिकाना' डोमिनिकन रिपब्लिक में स्पेनिश भाषी स्थानीय लोगों का एक समूह है जो वैदिक साहित्य का अध्ययन करता है और ऑडियो रिकॉर्डिंग्स के माध्यम से वैदिक मंत्रों का उच्चारण सीखा है। PM मोदी ने मन की बात के 135वें एपिसोड में इस समूह की विशेष सराहना की।
PM मोदी ने मन की बात के 135वें एपिसोड में क्या-क्या कहा?
मोदी ने भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार, डोमिनिकन रिपब्लिक के 'ब्रह्मकमल डोमिनिकाना' समूह की प्रेरक कहानी, और मेघालय के लिविंग रूट ब्रिजों की चर्चा की। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने इन रूट ब्रिजों को यूनेस्को विरासत दर्जा दिलाने के लिए आवेदन किया है।
मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज क्या होते हैं?
ये पुल रबर के पेड़ों की जड़ों को धीरे-धीरे दिशा देकर जलधाराओं के पार बनाए जाते हैं और इन्हें तैयार होने में कई दशक लग जाते हैं। ये 'जीवित पुल' समय के साथ और मजबूत होते जाते हैं तथा मेघालय की अनूठी पारंपरिक पारिस्थितिक विरासत के प्रतीक हैं।
डोमिनिकन रिपब्लिक में कितने भारतीय रहते हैं?
PM मोदी के अनुसार डोमिनिकन रिपब्लिक में भारतीयों की संख्या लगभग 100 या उससे भी कम है। इसके बावजूद वहाँ के स्थानीय स्पेनिश भाषी लोगों ने भारतीय आध्यात्म और वैदिक परंपराओं को अपनाया है।
मेघालय के रूट ब्रिजों को यूनेस्को दर्जा कब मिलेगा?
भारत ने मेघालय के लिविंग रूट ब्रिजों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट नेटवर्क में शामिल कराने के लिए आवेदन किया है, लेकिन यूनेस्को की मान्यता प्रक्रिया में वर्षों का समय लग सकता है और अंतिम निर्णय यूनेस्को की समिति पर निर्भर है।
राष्ट्र प्रेस
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