14 सितंबर 2026
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राहुल गांधी की मांसाहार टिप्पणी पर मुफ्ती वजाहत कासमी का पलटवार: 'सनातन संस्कृति में मांस का कोई स्थान नहीं'

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राहुल गांधी की मांसाहार टिप्पणी पर मुफ्ती वजाहत कासमी का पलटवार: 'सनातन संस्कृति में मांस का कोई स्थान नहीं'

सारांश

राहुल गांधी की मांसाहार टिप्पणी पर इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती वजाहत कासमी का पलटवार — 'सनातन संस्कृति में मांस का स्थान नहीं।' साथ ही कासमी ने UCC का स्वागत किया, बंगाल में गैर-कानूनी मदरसों पर कार्रवाई को सही ठहराया और वंदे मातरम के सम्मान की अपील की।

मुख्य बातें

इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती वजाहत कासमी ने राहुल गांधी की मांसाहार टिप्पणी को 'ओछी बात' करार देते हुए कहा कि इससे उनका कद छोटा होता है।
कासमी ने कहा कि भारत सनातन की भूमि है और सनातन संस्कृति में मांसाहारी भोजन का कोई स्थान नहीं।
उन्होंने पूरे देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का स्वागत किया और उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी की सराहना की।
पश्चिम बंगाल में 252 मदरसों के बंद होने को कासमी ने उचित ठहराया, कहा — 'इस्लाम गैर-कानूनी मदरसों को मंजूरी नहीं देता।' वंदे मातरम को राष्ट्रगान के बराबर सम्मान दिए जाने का स्वागत करते हुए सभी देशवासियों से सम्मान के साथ गाने की अपील की।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मांसाहारी भोजन संबंधी टिप्पणी पर इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती वजाहत कासमी ने 14 सितंबर 2026 को तीखी प्रतिक्रिया दी है। कासमी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत सनातन की भूमि है और सनातन सभ्यता एवं संस्कृति में मांसाहारी भोजन का कोई स्थान नहीं है। यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब राहुल गांधी की उक्त टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है।

मुफ्ती कासमी का राहुल गांधी पर सीधा प्रहार

मुफ्ती वजाहत कासमी ने कहा, 'भारत सनातन की भूमि है। सनातन सभ्यता और संस्कृति में मांसाहारी भोजन का कोई स्थान नहीं है। मुझे नहीं पता कि राहुल गांधी की सोच कैसी है या उन्हें क्या हो गया है। अगर वह मांसाहारी भोजन करना चाहते हैं, तो कोई समस्या नहीं है — उन्हें कोई रोक नहीं रहा है, लेकिन हर देश ऐसे मौकों का इस्तेमाल अपनी संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं को दिखाने के लिए करता है।'

उन्होंने आगे कहा कि BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों ने यह साबित किया है कि भारत कितना शक्तिशाली है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कितने मज़बूत नेता हैं। कासमी ने राहुल गांधी को सलाह दी कि उन्हें 'ओछी बातें' करने से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसे बयानों से उनका कद ही छोटा होता है।

समान नागरिक संहिता पर कासमी का स्वागत

मुफ्ती वजाहत कासमी ने पूरे देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू किए जाने की घोषणा का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'UCC देश के विकास में बहुत अहम भूमिका निभाएगा। दुनिया भर के सभी विकसित और शिक्षित देशों में UCC लागू है। एक देश, एक कानून और एक संविधान होना चाहिए।'

उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने सबसे पहले उत्तराखंड में UCC लागू किया। कासमी को उम्मीद है कि NDA सरकार के कार्यकाल में पूरे देश में UCC लागू हो जाएगा। गौरतलब है कि UCC का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र रहा है।

पश्चिम बंगाल में मदरसे बंद होने पर कासमी की राय

पश्चिम बंगाल में 252 मदरसों के बंद होने पर कासमी ने कहा कि मदरसा धार्मिक शिक्षा की जगह है, लेकिन इसे लेकर राजनीति ने बहुत दुविधाएँ पैदा की हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने मुसलमानों को इतनी आज़ादी दी कि उन्होंने गैर-कानूनी जगहों पर मस्जिदें और मदरसे बना लिए।

कासमी ने स्पष्ट किया कि NDA सरकार कानून के मुताबिक काम करती है। यदि गैर-कानूनी मदरसे बंद किए जा रहे हैं या कानूनी कार्रवाई की जा रही है, तो यह अच्छी बात है। उन्होंने कहा, 'इस्लाम गैर-कानूनी मदरसों या गैर-कानूनी मस्जिदों को मंजूरी नहीं देता।'

'वंदे मातरम' और राष्ट्रीय एकता पर कासमी का संदेश

भारत-अफगानिस्तान टी-20 मैच से पहले 'वंदे मातरम' गाए जाने पर कासमी ने कहा कि राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान के बराबर कानूनी सम्मान दिया गया है। उन्होंने कहा, 'यह देश के लिए खुशी की बात है। मुझे उम्मीद है कि देशभर के लोग उसी सम्मान के साथ वंदे मातरम गाएंगे और अपनी देशभक्ति जाहिर करेंगे।'

उन्होंने उन लोगों के लिए भी प्रार्थना की जो 'वंदे मातरम' का विरोध करते हैं, कहा कि उन्हें ईश्वर-अल्लाह सद्बुद्धि दे। कासमी के ये बयान एक ऐसे समय में आए हैं जब सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर बहस तेज़ हो रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने मांसाहार के बारे में क्या कहा था?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मांसाहारी भोजन संबंधी एक टिप्पणी की थी, जिस पर इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती वजाहत कासमी सहित कई लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कासमी ने इसे 'ओछी बात' कहते हुए कहा कि ऐसे बयानों से राहुल गांधी का कद छोटा होता है।
मुफ्ती वजाहत कासमी कौन हैं और उनकी प्रतिक्रिया क्यों अहम है?
मुफ्ती वजाहत कासमी एक प्रसिद्ध इस्लामिक स्कॉलर हैं। उनकी प्रतिक्रिया इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि एक मुस्लिम धर्मगुरु ने सनातन संस्कृति की रक्षा में बात की, UCC का समर्थन किया और गैर-कानूनी मदरसों पर कार्रवाई को सही ठहराया — ये सभी सामान्यतः विपक्षी राजनीति से अलग रुख माने जाते हैं।
समान नागरिक संहिता (UCC) पर कासमी का क्या रुख है?
मुफ्ती वजाहत कासमी ने UCC का पूरे देश में लागू होने का स्वागत किया है। उनका कहना है कि 'एक देश, एक कानून और एक संविधान' होना चाहिए और दुनिया के सभी विकसित देशों में UCC पहले से लागू है।
पश्चिम बंगाल में 252 मदरसे क्यों बंद हुए और कासमी की क्या राय है?
पश्चिम बंगाल में 252 मदरसे कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से बनाए जाने के कारण बंद किए गए। कासमी ने इस कार्रवाई को उचित बताया और कहा कि इस्लाम स्वयं गैर-कानूनी मदरसों या मस्जिदों को मंजूरी नहीं देता।
'वंदे मातरम' पर मुफ्ती कासमी ने क्या कहा?
कासमी ने कहा कि 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान के बराबर कानूनी सम्मान दिया गया है और यह देश के लिए खुशी की बात है। उन्होंने सभी देशवासियों से अनुरोध किया कि वे इसे सम्मान के साथ गाएँ और जो इसका विरोध करते हैं, उनके लिए सद्बुद्धि की प्रार्थना की।
राष्ट्र प्रेस
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