अनंत सिंह को बिहार विधानसभा का नोटिस, पार्टी विरोधी गतिविधियों पर 7 दिन में माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधानसभा सचिवालय ने मोकामा विधायक अनंत सिंह को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के संबंध में औपचारिक नोटिस जारी किया है, जिसमें उनसे सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। यह नोटिस विधानसभा स्पीकर प्रेम कुमार के निर्देश पर विधानसभा सचिव संजय कुमार सिंह द्वारा जारी किया गया और सोमवार, 2 नवंबर 2026 को अनंत सिंह को प्राप्त हुआ।
मामले की पृष्ठभूमि
यह कार्यवाही जनता दल (यूनाइटेड) की एक औपचारिक शिकायत के बाद शुरू की गई है। जेडी (यू) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने स्पीकर प्रेम कुमार को एक याचिका सौंपी, जिसमें अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की माँग की गई। पार्टी ने अपने आरोपों को पुष्ट करने के लिए अखबार की कतरनें, सीडी और अन्य दस्तावेज़ी साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। जाँच के बाद स्पीकर ने सचिवालय को औपचारिक कार्यवाही आरंभ करने का निर्देश दिया।
विवाद की जड़: बिहार विधान परिषद चुनाव
यह पूरा विवाद हाल ही में संपन्न बिहार विधान परिषद चुनावों से जुड़ा है। अनंत सिंह ने पटना ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र में जेडी (यू) के आधिकारिक उम्मीदवार और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार का खुलकर विरोध किया और इसके बजाय 'जन सुराज' के उम्मीदवार अनुज कुमार के समर्थन में प्रचार किया। इस सार्वजनिक विरोध को जेडी (यू) ने पार्टी विरोधी आचरण करार दिया।
इसकी प्रतिक्रिया में पार्टी ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी, पूर्व विधायक नीलम सिंह, दोनों को छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।
सुलह के प्रयास और आंतरिक खींचतान
गौरतलब है कि विवाद गहराने से पहले पार्टी ने केंद्रीय मंत्री और मुंगेर सांसद राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) को अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच मध्यस्थता की ज़िम्मेदारी सौंपी थी। जेडी (यू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी संकेत दिया था कि ललन सिंह इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे। हालाँकि, रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव प्रचार के दौरान ललन सिंह की कुछ टिप्पणियों ने तनाव को और बढ़ावा दिया, जिससे सुलह की कोशिशें परवान नहीं चढ़ सकीं।
नीरज कुमार की जीत और बदलते समीकरण
अनंत सिंह के विरोध के बावजूद नीरज कुमार ने पटना ग्रेजुएट्स सीट से जीत दर्ज की। जीत के तुरंत बाद उन्होंने ललन सिंह की ओर से दी गई बधाई और आशीर्वाद को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और एक तीखी टिप्पणी में कहा कि वह 'राजनीतिक कर्ज को ब्याज सहित चुकाएंगे।' हालाँकि दो दिन बाद उनका रुख नरम पड़ता दिखा और उन्होंने सार्वजनिक रूप से ललन सिंह की प्रशंसा शुरू कर दी, जिससे जेडी (यू) के भीतर की सियासी हलचल में एक नया मोड़ आ गया।
आगे की राह
अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। आगे की कार्यवाही उनके सात दिनों के भीतर दिए जाने वाले जवाब और स्पीकर के विचार पर निर्भर करेगी। यह मामला बिहार की सत्तारूढ़ गठबंधन राजनीति में आंतरिक अनुशासन की सीमाओं और दलबदल विरोधी कानून की परिधि को लेकर एक अहम मिसाल बन सकता है।