पटना स्नातक चुनाव 2026: जदयू विधायक अनंत सिंह के प्रचार से जन सुराज प्रत्याशी अनुज सिंह को बढ़त का दावा
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधान परिषद के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनावी मुकाबला 19 अक्टूबर 2026 को उस समय और रोचक हो गया, जब मोकामा के जनता दल (यूनाइटेड) विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन में सक्रिय प्रचार अभियान शुरू किया। अनंत सिंह विभिन्न इलाकों में रोड शो और जनसंपर्क के ज़रिए अनुज सिंह के पक्ष में जनमत बनाने में जुटे हैं, जिसे राजनीतिक विश्लेषक अनुज सिंह के लिए उल्लेखनीय बढ़त के रूप में देख रहे हैं।
अनंत सिंह का राजनीतिक प्रभाव
अनंत सिंह मोकामा की राजनीति में एक मज़बूत और अपराजित नेता के रूप में जाने जाते हैं — अपने विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने अब तक कभी चुनावी हार का सामना नहीं किया है। ऐसे में उनका सक्रिय समर्थन जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के लिए राजनीतिक वज़न जोड़ता है। हालाँकि, चुनाव में इसका वास्तविक असर अंततः 23 अक्टूबर 2026 को मतदान के दिन स्नातक मतदाताओं के रुख से ही स्पष्ट होगा।
गौरतलब है कि एनडीए के भीतर अनंत सिंह का यह कदम गठबंधन के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है, क्योंकि जदयू स्वयं एनडीए का हिस्सा है और उनकी इस स्वतंत्र भूमिका को आंतरिक तनाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
अनुज सिंह का चुनावी एजेंडा
जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह खुद को एक शिक्षाविद और समाजसेवी के रूप में प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने पटना, नवादा और नालंदा में स्नातक छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु कोचिंग सेंटर खोलने का वादा किया है। उनके अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अनुज सिंह हर वर्ष 500 गरीब बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने और गरीबों के बीच 10 हज़ार कंबल वितरित करने का दावा करते हैं। क्षेत्र में बढ़ती बेरोज़गारी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए संसाधनों की कमी को वह प्रमुख चुनावी मुद्दे के रूप में उठा रहे हैं।
मौजूदा सदस्य नीरज कुमार पर सत्ता-विरोधी रुझान
मौजूदा विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार के खिलाफ कथित सत्ता-विरोधी रुझान भी चुनावी चर्चा का अहम हिस्सा बन रहा है। उनके विरोधियों का आरोप है कि लगभग 25 वर्षों के राजनीतिक कार्यकाल में उन्होंने स्नातक छात्रों की समस्याओं को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी। छात्र हितों और बेरोज़गारी के मुद्दे पर उनकी सक्रियता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
महागठबंधन में भी खींचतान
यह चुनाव केवल एनडीए के लिए नहीं, बल्कि महागठबंधन के लिए भी आंतरिक तनाव का कारण बना हुआ है। महागठबंधन में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बीच खींचतान की खबरें राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होना है और सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी-अपनी स्थिति मज़बूत करने में लगे हैं।
आगे क्या
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षा, रोज़गार, सामाजिक सेवा और राजनीतिक प्रभाव के बीच यह मुकाबला 23 अक्टूबर 2026 के मतदान तक और तेज़ होने की संभावना है। अनंत सिंह की सक्रियता ने चुनावी सरगर्मी को जो नई ऊर्जा दी है, वह युवा और स्नातक मतदाताओं के अंतिम फैसले में कितना प्रतिबिंबित होती है, यही इस चुनाव की असली कसौटी होगी।