पटना स्नातक सीट: अनंत सिंह का ऐलान — 'नीरज कुमार को हराएंगे, पार्टी से कोई झगड़ा नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
जदयू विधायक अनंत सिंह ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के आगामी विधान परिषद चुनाव में उनका एकमात्र निशाना जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार हैं, किसी राजनीतिक दल से उनकी कोई व्यक्तिगत शत्रुता नहीं है। विजयादशमी के अवसर पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने खुलकर कहा कि वे जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार करेंगे और नीरज कुमार की हार सुनिश्चित करेंगे।
मुख्य बयान और घटनाक्रम
अनंत सिंह ने मीडिया से कहा, 'हम बस एक बात जानते हैं कि हमारी लड़ाई नीरज से है, किसी पार्टी से कोई लड़ाई नहीं है। हम नीरज को हराएंगे।' उन्होंने नीरज कुमार पर व्यक्तिगत हमला करते हुए आरोप लगाया कि नीरज पिछले 18 वर्षों से बिना किसी ठोस कारण के उन्हें अपमानित करते रहे हैं। अनंत सिंह ने यह भी दावा किया कि नीरज कुमार ने कथित तौर पर उनसे कहा था कि उनका नाम लेने से ही वे बड़े नेता बन सकते हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
पटना स्नातक सीट पर एनडीए की ओर से जदयू के नीरज कुमार मैदान में हैं, जबकि जन सुराज ने अनुज सिंह को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर अनंत सिंह का जन सुराज के साथ खड़े होना राजनीतिक दृष्टि से उल्लेखनीय है, क्योंकि वे स्वयं जदयू विधायक हैं। यह स्थिति बिहार की गठबंधन राजनीति में आंतरिक तनाव को उजागर करती है।
विजयादशमी और सियासी टिप्पणी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा गांधी मैदान में रावण दहन के आयोजन पर टिप्पणी करते हुए अनंत सिंह ने कहा कि हर पार्टी में इस तरह की राजनीतिक प्रक्रियाएं चलती रहती हैं और इसमें कोई असामान्य बात नहीं है। उन्होंने बिहारवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए युवाओं को माता-पिता की सेवा करने की सलाह दी।
एफआईआर और नीरज कुमार के स्वास्थ्य पर तंज
अनंत सिंह के विरुद्ध दर्ज एफआईआर के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले यह मामला कम लोग जानते थे, अब अधिक लोगों को पता चल जाएगा। नीरज कुमार के अस्पताल में भर्ती होने के सवाल पर अनंत सिंह ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि वे जाँच के लिए अक्सर जाते रहते हैं और दो घंटे बाद उन्हें वोट माँगते भी देखा जा सकता है।
आगे क्या होगा
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का यह चुनाव बिहार की राजनीति में गठबंधन की सीमाओं और व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता को एक बार फिर केंद्र में ला रहा है। अनंत सिंह के खुलकर जन सुराज के पक्ष में उतरने से जदयू के भीतर असहमति के संकेत स्पष्ट हो रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व इस पर क्या रुख अपनाता है।