पटना स्नातक चुनाव 2026: जन सुराज के अनुज सिंह का मुद्दा-आधारित अभियान, 23 अक्टूबर को मतदान
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र सीट पर 23 अक्टूबर 2026 को होने वाला मतदान राजनीतिक दृष्टि से तेजी से दिलचस्प होता जा रहा है। जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह ने जाति समीकरणों और परंपरागत राजनीतिक दावों की बजाय शिक्षित प्रतिनिधित्व, बेरोजगार स्नातकों की समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं को अपने अभियान का केंद्र बनाया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ओर से नीरज कुमार और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की ओर से दिलीप कुमार मैदान में हैं, जिससे इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन गई है।
अभियान के प्रमुख मुद्दे
अनुज सिंह ने अपने चुनाव प्रचार में बेरोजगार स्नातकों के लिए बेरोजगारी भत्ते की माँग को प्रमुखता दी है। उन्होंने कहा, 'अगर हमारा कोई साथी रजिस्ट्रेशन कराने के बाद भी बेरोजगार है और उसे काम नहीं मिला है तो उसके लिए बेरोजगारी भत्ते की बात उठनी चाहिए।'
इसके अलावा, उन्होंने प्रत्येक जिला और अनुमंडल मुख्यालय में स्नातक युवाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग सेंटर और उच्चस्तरीय पुस्तकालय स्थापित करने की जरूरत रेखांकित की। अनुज सिंह ने भरोसा दिलाया कि यदि उन्हें अवसर मिला तो वे इन मुद्दों को विधान परिषद में मजबूती से उठाएँगे।
अनंत सिंह का समर्थन और गठबंधन विवाद
मोकामा के विधायक अनंत सिंह द्वारा अनुज सिंह को मिले समर्थन ने चुनावी चर्चाओं को और गर्म कर दिया है। अनुज सिंह ने अनंत सिंह को अपना 'अभिभावक' बताया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर और अनंत सिंह के बीच कोई औपचारिक गठबंधन नहीं है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधान परिषद चुनावों में पार्टी का कोई चुनाव चिह्न नहीं होता, इसलिए विभिन्न दलों के नेता और कार्यकर्ता स्वतंत्र रूप से किसी उम्मीदवार का समर्थन कर सकते हैं।
विवाद और राजनीतिक आरोप
अनुज सिंह के खिलाफ एक पुराने छेड़छाड़ के मुकदमे और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर भी चर्चा है। उनका दावा है कि 2012 में दर्ज मुकदमा झूठा था और यह राजनीतिक रूप से प्रेरित था। उन्होंने यह भी कहा कि 2022 में कथित तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया वीडियो प्रसारित करने वाले व्यक्ति के खिलाफ उन्होंने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जातीय समीकरण बनाम मुद्दा-आधारित राजनीति
जातीय समीकरणों पर चल रही चर्चाओं के बीच अनुज सिंह का कहना है कि वे पिछड़े, अति पिछड़े, महादलित, अल्पसंख्यक और सवर्ण — सभी वर्गों से संवाद कर रहे हैं। उनके अनुसार, मतदाता शिक्षित हैं और वे किसी की बंधुआ नहीं हैं — वे अपनी समझ और पसंद के आधार पर मतदान करेंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति में जातीय गोलबंदी की भूमिका अक्सर निर्णायक मानी जाती है। अनुज सिंह का यह प्रयोग — धनबल की जगह मुद्दों से जोड़ने का — देखने योग्य है।
मतदान का व्यापक परिदृश्य
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर 23 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है। इनमें स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी सीटें तथा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की पटना, दरभंगा, सारण और तिरहुत सीटें शामिल हैं। कुल 933 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। स्नातक कोटे की चार सीटों के लिए 90 प्रत्याशी और शिक्षक कोटे की चार सीटों के लिए 60 प्रत्याशी मैदान में हैं।
सीमित सीटों पर मुकाबले के बावजूद राजनीतिक दलों के लिए यह चुनाव अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके परिणाम बिहार में विभिन्न दलों की जमीनी ताकत की एक झलक देंगे। 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान के बाद स्पष्ट होगा कि शिक्षित मतदाताओं के बीच मुद्दा-आधारित राजनीति का यह प्रयोग कितना सफल रहा।