हनोई में वज्रयान बौद्ध धर्म केंद्र का उद्घाटन, भारत-वियतनाम आध्यात्मिक संबंधों को नई ऊँचाई
सारांश
मुख्य बातें
वियतनाम की राजधानी हनोई में 4 जून 2025 को वज्रयान ड्रिगुंग काग्यु समतेन लिंग धर्म केंद्र का उद्घाटन हुआ, जो भारत और वियतनाम के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हनोई स्थित भारतीय दूतावास ने 5 जून को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में इस उद्घाटन की पुष्टि की।
उद्घाटन समारोह में कौन थे उपस्थित
उद्घाटन समारोह में जियान पगोडा के महंत एवं वियतनाम बौद्ध संघ की केंद्रीय कार्यकारी परिषद के सदस्य परम पूज्य थिच मिन्ह न्घीएम, परम श्रद्धेय खेनत्रुल खुंगा कोंचोक तेनजिन रिनपोछे, अन्य पूज्य खेनपो, संघ के सदस्य तथा श्रद्धालु उपस्थित रहे। वियतनाम में भारत के राजदूत शेरिंग डब्ल्यू. शेरपा ने समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित किया और वियतनाम बौद्ध संघ को उसके निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
दूतावास का बयान और धर्म केंद्र का महत्व
भारतीय दूतावास ने अपने बयान में कहा, 'बौद्ध धर्म भारत और वियतनाम के लोगों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आध्यात्मिक बंधन है। बौद्ध धर्म ने दोनों देशों की मित्रता को मजबूत करने में हमेशा अहम भूमिका निभाई है और आगे भी निभाता रहेगा।' दूतावास के अनुसार, यह धर्म केंद्र आध्यात्मिकता और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी जुड़ाव को और प्रगाढ़ करेगा।
वेसाक दिवस और राजनयिक सक्रियता
गौरतलब है कि पिछले महीने राजदूत शेरपा ने हनोई के येन फू पगोडा में आयोजित वेसाक दिवस समारोह में भी भाग लिया था। उस अवसर पर उन्होंने कहा था कि बौद्ध धर्म से जुड़ा आध्यात्मिक और दार्शनिक रिश्ता आज भी भारत और वियतनाम के संबंधों को प्रभावित और मजबूत कर रहा है। यह नया धर्म केंद्र उसी राजनयिक सक्रियता की अगली कड़ी है।
मोदी-टो लाम शिखर वार्ता और रणनीतिक साझेदारी
यह उद्घाटन ऐसे समय में हुआ है जब 6 मई 2025 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों के संबंधों को 'बेहतर व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर पर पहुँचाने की घोषणा की गई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने वियतनाम को भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और 'विजन महासागर' का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया था।
राष्ट्रपति टो लाम की भारत यात्रा का आगाज़ बोधगया से हुआ था, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक बताया। मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2025 में जब बौद्ध अवशेषों को वियतनाम में प्रदर्शित किया गया, तब 1.5 करोड़ से अधिक लोगों ने उनके दर्शन किए — जो दोनों देशों के बीच बौद्ध धर्म की गहरी जड़ों को रेखांकित करता है।
आगे की राह
हनोई में नया बौद्ध धर्म केंद्र भारत-वियतनाम सांस्कृतिक कूटनीति में एक स्थायी संस्थागत उपस्थिति स्थापित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के सॉफ्ट-पावर प्रयास दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और मज़बूत आधार देंगे।