कुणाल घोष का BJP पर प्रहार: 'गणतंत्र बचाओ' रैली TMC विधायक ने बताई भाजपा की घबराहट और सेल्फ गोल
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने 2 नवंबर 2026 को कोलकाता में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'गणतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैली पर तीखा हमला बोला। घोष ने कहा कि यह रैली भाजपा की राजनीतिक घबराहट का प्रमाण है और पार्टी इस कदम से खुद को ही नुकसान पहुँचा रही है।
'सेल्फ गोल' का आरोप
घोष ने तर्क दिया कि 'लोकतंत्र बचाओ' जैसे नारे परंपरागत रूप से विपक्षी दलों के होते हैं, सत्तारूढ़ पार्टी के नहीं। उनका कहना था कि भाजपा इस नारे को अपनाकर स्वयं यह स्वीकार कर रही है कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र संकट में है। घोष के अनुसार, रामलीला मैदान में विपक्ष की एकजुटता के बाद दबाव में आकर भाजपा सड़क पर उतरी, जो उनके शब्दों में 'राजनीतिक सेल्फ गोल' है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनावों में केंद्रीय बलों का दुरुपयोग किया गया और वास्तविक मतदाताओं को मतदान से बाहर रखा गया। घोष ने कहा कि देशभर में वोट चोरी के प्रति जनजागरण हो चुका है और बंगाल के मतदाता भी इससे अनजान नहीं हैं।
चोरबागान मामले पर पक्षपात का आरोप
चोरबागान विवाद पर बोलते हुए घोष ने कहा कि घटना के दिन तृणमूल कांग्रेस, सीपीएम और कांग्रेस — तीनों दलों ने एक ही समय पर गिरिश पार्क पुलिस स्टेशन के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। उनके अनुसार, फुटपाथ और सड़कें खाली थीं तथा आम जनजीवन बाधित नहीं हुआ था। इसके बावजूद एफआईआर केवल तृणमूल कांग्रेस के विरुद्ध दर्ज की गई, जिसे घोष ने पक्षपातपूर्ण कार्रवाई बताया।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों के बीच टकराव का स्तर पहले से ऊँचा है और प्रत्येक प्रशासनिक कदम को राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है।
बाबरी मस्जिद विवाद पर TMC का रुख
बाबरी मस्जिद ध्वंस के मुद्दे पर घोष ने स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस शुरू से इस कार्रवाई के विरोध में रही है। उन्होंने कहा कि कुछ तत्व इस मुद्दे का योजनाबद्ध तरीके से राजनीतिक उपयोग कर रहे हैं, जिसका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ भाजपा को मिल रहा है। घोष ने यह भी उल्लेख किया कि हुमायूँ 2019 में भाजपा के लोकसभा उम्मीदवार भी रह चुके हैं, और इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की राजनीति को समझने की ज़रूरत है।
नंदन नेमप्लेट विवाद
कोलकाता के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक केंद्र नंदन से नेमप्लेट हटाए जाने के मुद्दे पर घोष ने कहा कि इस संस्थान की स्थापना वाम मोर्चा सरकार के समय ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व में हुई थी, और बाद में ममता बनर्जी ने इसका नवीनीकरण कराया। उनका आरोप था कि नेमप्लेटों को चुनिंदा तरीके से हटाया जा रहा है, जो राजनीतिक बदले की भावना को दर्शाता है।
गौरतलब है कि नंदन का यह विवाद बंगाल की राजनीतिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े व्यापक संघर्ष का हिस्सा बन चुका है।
आगे का राजनीतिक परिदृश्य
कुणाल घोष के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल के बीच राजनीतिक संघर्ष तेज़ हो रहा है। भाजपा की 'गणतंत्र बचाओ' रैली का उद्देश्य राज्य में विपक्षी आवाज़ को मज़बूत करना था, लेकिन TMC ने इसे अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश की है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर दोनों दलों के बीच और तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।