टीएमसी विधायक कुणाल घोष की कार पर लगातार दूसरे दिन हमला, भाजपा पर लगाया आरोप
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक कुणाल घोष की कार पर रविवार, 27 सितंबर 2026 को कोलकाता के बेलेघाटा-नारकेलडांगा इलाके में लगातार दूसरे दिन हमला किए जाने का आरोप है। घोष के अनुसार, बाइकसवार हमलावरों ने उनकी कार का पीछा कर हथौड़े से विंडशील्ड और पिछला शीशा तोड़ दिया और हथियार दिखाकर उन्हें धमकाया। इस घटना के बाद वे क्षतिग्रस्त वाहन लेकर नारकेलडांगा थाने पहुँचे और पुलिस को सूचित किया।
घटनाक्रम: दो दिन में दो हमले
पहला हमला शनिवार को हुगली जिले के उत्तरपाड़ा में हुआ था, जब कथित तौर पर उनकी कार पर पत्थर और अंडे फेंके गए थे। उस मामले में पुलिस ने किसी पक्ष की जिम्मेदारी तय नहीं की थी। इसके ठीक अगले दिन कोलकाता शहर के भीतर यह दूसरी घटना हुई, जिसे घोष ने 'जानलेवा हमला' बताया है।
घोष के बयान के अनुसार, वे रविवार को एक कार्यक्रम में जा रहे थे, तभी बाइक पर सवार कुछ लोगों ने उनका पीछा किया। हमलावरों ने कार की खिड़की का शीशा तोड़कर उन्हें बाहर खींचने की कोशिश की। उनके मुताबिक, हमलावरों के हाथों में रिवॉल्वर थीं और उनकी सुरक्षा टीम को भी अपनी रिवॉल्वर निकालनी पड़ी।
कुणाल घोष का बयान
नारकेलडांगा थाने के भीतर से मीडिया से बात करते हुए कुणाल घोष ने कहा, 'देखिए, आज फिर हम पर जानलेवा हमला करने की कोशिश की गई। आज भगवान की कृपा से हम जिंदा हैं। कोलकाता शहर में रविवार को दिनदहाड़े जब मैं एक कार्यक्रम में जा रहा था, तब उन्होंने हम पर हमला किया। वे बाइक पर थे, उनके पास हथियार थे और उन्होंने गाड़ी की खिड़की का शीशा तोड़कर हमें बाहर खींचने की कोशिश की।'
घोष ने यह भी कहा, 'इस हमले में भाजपा 100 प्रतिशत शामिल है। क्या भाजपा को हमारा मृत शरीर चाहिए?' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस सक्रिय भूमिका नहीं निभा रही है। उल्लेखनीय है कि ये आरोप अभी तक पुलिस द्वारा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए गए हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलबदल को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) केंद्रीय एजेंसियों के दबाव और डराने-धमकाने की रणनीति से उनके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। आलोचकों का कहना है कि राज्य में इस तरह की राजनीतिक हिंसा की घटनाएँ बार-बार दोहराई जाती रही हैं।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल के विधायकों और विपक्षी नेताओं के बीच टकराव की घटनाएँ नई नहीं हैं, और प्रत्येक बार दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाते रहे हैं।
पुलिस की स्थिति और आगे की कार्रवाई
घोष द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद नारकेलडांगा पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की है। हालाँकि, अब तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। शनिवार की घटना में भी पुलिस ने किसी पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया था, जिसे घोष ने 'पुलिस की निष्क्रियता' बताया है। अब देखना होगा कि दो दिनों में हुई इन दोनों घटनाओं की जाँच किस दिशा में जाती है और क्या पुलिस किसी आरोपी की पहचान कर पाती है।