कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश: टीएमसी विधायक कुणाल घोष की सुरक्षा सुनिश्चित करे कोलकाता पुलिस
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर 2026 को कोलकाता पुलिस आयुक्त को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक कुणाल घोष की सुरक्षा सुनिश्चित करने का स्पष्ट निर्देश दिया। बेलियाघाटा से विधायक घोष ने सितंबर 2026 में 24 घंटे के भीतर दो बार हमले की शिकायत की थी, जिसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था।
मुख्य न्यायिक निर्देश
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने सोमवार को सुनवाई करते हुए कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय के. नंद के कार्यालय को अगली सुनवाई से पहले मामले पर एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में घोष पर इस तरह के हमले दोबारा नहीं होने चाहिए।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने इस मामले को कलकत्ता हाईकोर्ट की एक खंडपीठ (डिवीजन बेंच) के पास भेज दिया है, जहाँ इसकी सुनवाई पश्चिम बंगाल में लोगों पर अंडे फेंकने की घटनाओं से संबंधित जनहित याचिका के साथ एक साथ की जाएगी।
हमलों का घटनाक्रम
घोष के वकील ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि 26 सितंबर 2026 को दोपहर हुगली जिले के उत्तरपाड़ा के पास उनकी गाड़ी पर पहला हमला हुआ, जब वह पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक रैली में शामिल होने के लिए सेरामपुर जा रहे थे। इस हमले में कथित तौर पर पथराव किया गया था।
अगले ही दिन, 27 सितंबर 2026 को, घोष ने आरोप लगाया कि उनके बेलियाघाटा विधानसभा क्षेत्र में उनका घर से निकलते ही पीछा किया गया। उनके अनुसार, कुछ लोग उनकी कार का अनुसरण कर रहे थे, जिनमें से कुछ के पास कथित तौर पर रिवॉल्वर भी थी। घोष ने कहा कि उनकी कार के अगले और पीछे के शीशों पर पत्थर फेंके गए और हथौड़े से शीशा तोड़ने की कोशिश की गई, जिससे वाहन को नुकसान पहुँचा। उनके अनुसार पीछा नरकेलडांगा तक जारी रहा।
सुरक्षा व्यवस्था पर अदालत के सवाल
घोष के वकील ने तर्क दिया कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि होने के बावजूद उन्हें केवल दो पुलिसकर्मी ही सुरक्षा के लिए दिए गए हैं। वकील ने पायलट कार सहित अतिरिक्त सुरक्षा की माँग की। उन्होंने कहा, '26 और 27 सितंबर की घटनाओं को सिर्फ अंडे फेंकने की घटना नहीं माना जा सकता। यह उनके जीवन पर हमला करने की कोशिश थी।'
इस पर न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने पुलिस से तीखा सवाल किया कि जब दो सुरक्षाकर्मी मौजूद थे, तब भी भीड़ घोष पर हमला करने में सफल कैसे हुई। यह सवाल राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
कुणाल घोष ने दोनों हमलों के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं को ज़िम्मेदार ठहराया है और कहा कि इन घटनाओं के बावजूद पुलिस निष्क्रिय बनी रही। उन्होंने 28 सितंबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हालाँकि, BJP ने इन दोनों हमलों में किसी भी प्रकार की संलिप्तता से साफ इनकार किया है।
गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की घटनाएँ राज्य के राजनीतिक माहौल में तनाव का एक स्थायी विषय बनी हुई हैं। इस पृष्ठभूमि में एक सत्तारूढ़ दल के विधायक का ही सुरक्षा के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाना विशेष महत्व रखता है।
आगे क्या होगा
मामला अब खंडपीठ के समक्ष जाएगा और कोलकाता पुलिस आयुक्त का कार्यालय अगली सुनवाई तक अदालत में रिपोर्ट पेश करेगा। इस रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था की खामियों का ब्यौरा और आगे की कार्ययोजना शामिल होने की उम्मीद है।