2 नवंबर 2026
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उत्तराखंड 2027: खड़गे-राहुल की दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं संग रणनीतिक बैठक, हरीश रावत अनुपस्थित

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उत्तराखंड 2027: खड़गे-राहुल की दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं संग रणनीतिक बैठक, हरीश रावत अनुपस्थित

सारांश

2027 के उत्तराखंड चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है — खड़गे और राहुल ने दिल्ली में रणनीति की धुरी कसी, लेकिन हरीश रावत की गैर-मौजूदगी ने आंतरिक समीकरणों पर सवाल खड़े कर दिए। भूमि घोटाले को हथियार बनाकर 4 नवंबर से जमीनी अभियान शुरू होगा।

मुख्य बातें

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में उत्तराखंड के वरिष्ठ नेताओं के साथ 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी पर बैठक की।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत बैठक में अनुपस्थित रहे; प्रभारी कुमारी शैलजा ने इसे संगठनात्मक मानदंडों के तहत बताया।
कांग्रेस ने 4 नवंबर 2026 को उत्तराखंड के कथित भूमि घोटालों के खिलाफ जिला और राज्य मुख्यालयों पर प्रदर्शन का ऐलान किया।
हरक सिंह रावत ने कहा — हरिद्वार, ऋषिकेश और विकास नगर में जमीन घोटालों समेत अगले तीन महीनों की पूरी कार्ययोजना तैयार।
खड़गे ने एक्स पर BJP पर हमला बोलते हुए कहा — राज्य में चरमराई कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में उत्तराखंड के वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ एक अहम रणनीतिक बैठक की। इस बैठक का केंद्र-बिंदु 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ और राज्य में पार्टी की स्थिति को सुदृढ़ करना था। हालाँकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की इस बैठक में अनुपस्थिति चर्चा का विषय बन गई।

बैठक में कौन-कौन शामिल रहे

बैठक में कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, उत्तराखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता यशपाल आर्य और पार्टी की चुनाव प्रबंधन समिति के प्रमुख हरक सिंह रावत मौजूद रहे। गौरतलब है कि यह बैठक उन नेताओं तक सीमित रही जो संगठनात्मक और चुनावी प्रबंधन की सीधी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

शैलजा ने हरीश रावत की अनुपस्थिति पर कहा, 'बैठक के लिए कुछ तय मानदंड होते हैं। चूंकि यह मामला चुनावों से जुड़ा है, इसलिए पूरा ध्यान उसी पर था। सभी नेताओं के साथ पहले भी चर्चा होती रही है और आगे भी होती रहेगी।'

खड़गे का भाजपा सरकार पर निशाना

खड़गे ने उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों में इसने 'राज्य के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को धोखा दिया है।' उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'चरमराई कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल, सत्ता का अहंकार और जवाबदेही से बचने की लगातार प्रवृत्ति ने राज्य की जनता को निराश कर दिया है।'

उन्होंने यह भी कहा, 'उत्तराखंड की जनता अब हिसाब मांग रही है और बदलाव चाहती है। कांग्रेस पार्टी सड़कों से लेकर विधानसभा तक लोगों के अधिकारों और हक के लिए पूरी ताकत से लड़ रही है।' यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के चुनाव में करीब एक साल से थोड़ा अधिक का समय बचा है।

भूमि घोटाले पर 4 नवंबर को प्रदर्शन का ऐलान

बैठक में तय किया गया कि कांग्रेस 4 नवंबर 2026 को उत्तराखंड के कथित भूमि घोटालों और ज़मीन की कथित 'अवैध' बिक्री या नीलामी के खिलाफ जिला और राज्य मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेगी। शैलजा ने कहा, 'वहां एक बहुत बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार और जमीन के घोटालों से जुड़ा है। जमीनों को बहुत ही सस्ते दामों पर बेचा जा रहा है, जो एक बड़ा घोटाला है।'

हरक सिंह रावत ने इस संदर्भ में कहा, 'चाहे हरिद्वार, ऋषिकेश या विकास नगर में जमीन के घोटाले हों, या फिर अरबों रुपए की जल विद्युत निगम की जमीन का मामला हो, इन सबके खिलाफ हम 4 नवंबर को विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उत्तराखंड में अगले तीन महीनों के लिए हमने भ्रष्टाचार और इन सभी मुद्दों को लेकर एक पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली है।'

रणनीति और आगे की दिशा

शैलजा ने पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट किया कि चुनावी अभियान के एजेंडे पर विस्तृत चर्चा हुई है। उन्होंने कहा, 'पूरी तैयारी हो चुकी है; हमारे कार्यक्रम पहले से ही चल रहे हैं।' उन्होंने भूमि घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की भी घोषणा की।

यह ध्यान देने योग्य है कि 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 47 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस केवल 19 सीटों तक सिमट गई थी। इस पृष्ठभूमि में, 2027 की तैयारी के लिए यह बैठक पार्टी के पुनर्गठन प्रयासों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कांग्रेस के लिए असली चुनौती यह होगी कि वह आंतरिक एकता बनाए रखते हुए जनता के बीच एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में खुद को स्थापित कर सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उत्तराखंड कांग्रेस की उस पुरानी बीमारी की ओर इशारा करती है जहाँ वरिष्ठ नेता और केंद्रीय नेतृत्व एक ही पृष्ठ पर नहीं दिखते। 2022 में 19 सीटों पर सिमटी पार्टी के लिए 2027 में वापसी तभी संभव है जब संगठनात्मक एकजुटता असली हो, प्रदर्शन के लिए नहीं। भूमि घोटाले को चुनावी मुद्दा बनाना सही दिशा हो सकती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इसे ज़मीनी आंदोलन में तब्दील कर पाएगी या यह भी महज प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सिमट जाएगा।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खड़गे और राहुल गांधी की उत्तराखंड नेताओं के साथ बैठक किस उद्देश्य से हुई?
यह बैठक 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में हुई और इसका मुख्य उद्देश्य 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की रणनीति तय करना था। बैठक में चुनावी अभियान के एजेंडे, भूमि घोटाले पर विरोध प्रदर्शन और अगले तीन महीनों की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।
हरीश रावत बैठक में क्यों नहीं थे?
प्रभारी कुमारी शैलजा के अनुसार, बैठक में शामिल होने के लिए कुछ तय संगठनात्मक मानदंड थे और यह मुख्यतः चुनाव प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारियों के लिए थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक निरंतर प्रक्रिया है और सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा आगे भी जारी रहेगी।
कांग्रेस 4 नवंबर को उत्तराखंड में क्या करने वाली है?
कांग्रेस 4 नवंबर 2026 को उत्तराखंड में कथित भूमि घोटालों और ज़मीन की कथित अवैध बिक्री या नीलामी के खिलाफ जिला और राज्य मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेगी। हरक सिंह रावत के अनुसार, हरिद्वार, ऋषिकेश और विकास नगर में जमीन घोटालों समेत जल विद्युत निगम की ज़मीन के मामले भी इस विरोध का हिस्सा होंगे।
उत्तराखंड में 2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस की क्या स्थिति है?
2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 70 में से केवल 19 सीटें जीत पाई थी, जबकि भाजपा ने 47 सीटें हासिल की थीं। 2027 की तैयारी में कांग्रेस भ्रष्टाचार, भूमि घोटाले, कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को प्रमुख चुनावी मुद्दे बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
कांग्रेस ने उत्तराखंड में भाजपा पर क्या आरोप लगाए हैं?
खड़गे ने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में भाजपा सरकार ने राज्य के लोगों की उम्मीदों को धोखा दिया है। कांग्रेस ने चरमराई कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल, सत्ता के अहंकार और जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति का आरोप लगाया है। इसके अलावा, ज़मीनों की कथित सस्ते दामों पर बिक्री को बड़ा भ्रष्टाचार मुद्दा बताया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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