उत्तराखंड 2027: खड़गे-राहुल की दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं संग रणनीतिक बैठक, हरीश रावत अनुपस्थित
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में उत्तराखंड के वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ एक अहम रणनीतिक बैठक की। इस बैठक का केंद्र-बिंदु 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ और राज्य में पार्टी की स्थिति को सुदृढ़ करना था। हालाँकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की इस बैठक में अनुपस्थिति चर्चा का विषय बन गई।
बैठक में कौन-कौन शामिल रहे
बैठक में कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, उत्तराखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता यशपाल आर्य और पार्टी की चुनाव प्रबंधन समिति के प्रमुख हरक सिंह रावत मौजूद रहे। गौरतलब है कि यह बैठक उन नेताओं तक सीमित रही जो संगठनात्मक और चुनावी प्रबंधन की सीधी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
शैलजा ने हरीश रावत की अनुपस्थिति पर कहा, 'बैठक के लिए कुछ तय मानदंड होते हैं। चूंकि यह मामला चुनावों से जुड़ा है, इसलिए पूरा ध्यान उसी पर था। सभी नेताओं के साथ पहले भी चर्चा होती रही है और आगे भी होती रहेगी।'
खड़गे का भाजपा सरकार पर निशाना
खड़गे ने उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों में इसने 'राज्य के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को धोखा दिया है।' उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'चरमराई कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल, सत्ता का अहंकार और जवाबदेही से बचने की लगातार प्रवृत्ति ने राज्य की जनता को निराश कर दिया है।'
उन्होंने यह भी कहा, 'उत्तराखंड की जनता अब हिसाब मांग रही है और बदलाव चाहती है। कांग्रेस पार्टी सड़कों से लेकर विधानसभा तक लोगों के अधिकारों और हक के लिए पूरी ताकत से लड़ रही है।' यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के चुनाव में करीब एक साल से थोड़ा अधिक का समय बचा है।
भूमि घोटाले पर 4 नवंबर को प्रदर्शन का ऐलान
बैठक में तय किया गया कि कांग्रेस 4 नवंबर 2026 को उत्तराखंड के कथित भूमि घोटालों और ज़मीन की कथित 'अवैध' बिक्री या नीलामी के खिलाफ जिला और राज्य मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेगी। शैलजा ने कहा, 'वहां एक बहुत बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार और जमीन के घोटालों से जुड़ा है। जमीनों को बहुत ही सस्ते दामों पर बेचा जा रहा है, जो एक बड़ा घोटाला है।'
हरक सिंह रावत ने इस संदर्भ में कहा, 'चाहे हरिद्वार, ऋषिकेश या विकास नगर में जमीन के घोटाले हों, या फिर अरबों रुपए की जल विद्युत निगम की जमीन का मामला हो, इन सबके खिलाफ हम 4 नवंबर को विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उत्तराखंड में अगले तीन महीनों के लिए हमने भ्रष्टाचार और इन सभी मुद्दों को लेकर एक पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली है।'
रणनीति और आगे की दिशा
शैलजा ने पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट किया कि चुनावी अभियान के एजेंडे पर विस्तृत चर्चा हुई है। उन्होंने कहा, 'पूरी तैयारी हो चुकी है; हमारे कार्यक्रम पहले से ही चल रहे हैं।' उन्होंने भूमि घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की भी घोषणा की।
यह ध्यान देने योग्य है कि 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 47 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस केवल 19 सीटों तक सिमट गई थी। इस पृष्ठभूमि में, 2027 की तैयारी के लिए यह बैठक पार्टी के पुनर्गठन प्रयासों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कांग्रेस के लिए असली चुनौती यह होगी कि वह आंतरिक एकता बनाए रखते हुए जनता के बीच एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में खुद को स्थापित कर सके।