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उत्तराखंड चुनाव: वेणुगोपाल का साफ संदेश — सिर्फ कांग्रेस बैनर तले होगा प्रचार, गुटबाजी बर्दाश्त नहीं

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उत्तराखंड चुनाव: वेणुगोपाल का साफ संदेश — सिर्फ कांग्रेस बैनर तले होगा प्रचार, गुटबाजी बर्दाश्त नहीं

सारांश

उत्तराखंड में कांग्रेस की आंतरिक दरारों की चर्चा के बीच राष्ट्रीय महासचिव वेणुगोपाल ने हरीश रावत से मुलाकात कर एक ही संदेश दिया — एकजुटता या बाहर। पार्टी का सारा दारोमदार अब खड़गे-राहुल नेतृत्व में केंद्रीय अनुशासन पर है।

मुख्य बातें

केसी वेणुगोपाल ने 5 अक्टूबर 2026 को हरीश रावत से मुलाकात कर उत्तराखंड चुनाव प्रचार की एकीकृत रणनीति तय की।
सभी अभियान केवल कांग्रेस बैनर तले, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के नेतृत्व में चलेंगे।
वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया — अलग-अलग गुटीय कैंपेन बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
उत्तराखंड में पिछले कुछ हफ्तों से अलग-अलग धड़ों द्वारा अपने स्तर पर प्रचार की खबरें सामने आ रही थीं।
हरीश रावत राज्य के सबसे वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं में से एक हैं और उनका व्यापक जनाधार है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से मुलाकात के बाद स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान कोई भी अलग-अलग गुटीय अभियान नहीं चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी चुनावी प्रचार केवल कांग्रेस के बैनर तले, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में होंगे।

मुख्य घटनाक्रम

वेणुगोपाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए इस बैठक की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, 'चुनाव वाले राज्य उत्तराखंड में चल रहे कैंपेन पर चर्चा करने के लिए उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से मुलाकात की।' इस बैठक का मकसद पार्टी में बढ़ रही आंतरिक दरारों को पाटना और एकजुट मोर्चा पेश करना था।

वेणुगोपाल ने सख्त लहजे में कहा, 'पार्टी अलग-अलग कैंपेन बर्दाश्त नहीं करेगी। केवल वही सामूहिक कार्यक्रम होंगे, जिनकी योजना पार्टी संगठन ने बनाई है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में विभिन्न गुटों द्वारा अपने स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने की खबरें आ रही थीं।

गुटबाजी की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि पिछले कुछ हफ्तों से उत्तराखंड कांग्रेस में अलग-अलग धड़ों के अपने स्तर पर प्रचार अभियान चलाने की सूचनाएँ पार्टी हाईकमान तक पहुँच रही थीं। इससे केंद्रीय नेतृत्व में बेचैनी थी। यह कोई नई समस्या नहीं है — उत्तराखंड कांग्रेस में गुटबाजी का इतिहास रहा है, और पार्टी ने पिछले चुनावों में भी इसी कारण संगठनात्मक कमज़ोरी का सामना किया था।

हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं। राज्य की राजनीति में उनका व्यापक जनाधार है, इसलिए हाईकमान उनके साथ सबसे पहले संवाद स्थापित करना ज़रूरी समझा।

पार्टी नेतृत्व की रणनीति

वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि राज्य के सभी नेताओं को मिलकर, एकजुट होकर और केवल पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व — खड़गे और राहुल गांधी — के दिशानिर्देश पर काम करना होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि 'पूरी राज्य इकाई की ऊर्जा और कड़ी मेहनत से हम उत्तराखंड में जीत हासिल करेंगे।'

यह रणनीतिक एकीकरण की कोशिश ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य में सत्ता में है और कांग्रेस को पुनः सत्ता में आने के लिए संगठनात्मक मज़बूती की ज़रूरत है।

आम जनता और राज्य की राजनीति पर असर

उत्तराखंड एक छोटा किंतु राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य है। यहाँ चुनावी मुकाबले में अक्सर छोटे अंतर से परिणाम तय होते हैं। ऐसे में पार्टी की एकजुटता या बिखराव — दोनों ही मतदाताओं पर सीधा असर डालते हैं। आलोचकों का कहना है कि महज़ एक बैठक और एक एक्स पोस्ट से गुटबाजी का समाधान नहीं होगा; उसके लिए ज़मीनी स्तर पर समन्वय आवश्यक है।

आगे क्या होगा

कांग्रेस के केंद्रीय संगठन के निर्देश के बाद अब नज़रें इस बात पर हैं कि राज्य के अलग-अलग गुट किस हद तक केंद्रीय लाइन का अनुसरण करते हैं। चुनाव से पहले पार्टी की एकता का असली परीक्षण उम्मीदवारों की सूची के ऐलान और प्रचार की ज़मीनी तस्वीर से होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बातचीत से संभव होगा। असली परीक्षा उम्मीदवारों की सूची के वक्त होगी — जब गुटों के बीच टिकट बँटवारे पर तनाव उभरेगा। एक एक्स पोस्ट से राज्य इकाई की संगठनात्मक कमज़ोरी नहीं मिटती; मिटती है ज़मीन पर साझा काम से।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केसी वेणुगोपाल ने उत्तराखंड को लेकर क्या घोषणा की?
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने 5 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में चुनाव प्रचार केवल कांग्रेस के बैनर तले होगा और अलग-अलग गुटीय अभियान बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। सभी कार्यक्रम पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के नेतृत्व में चलाए जाएंगे।
वेणुगोपाल ने हरीश रावत से मुलाकात क्यों की?
उत्तराखंड कांग्रेस में अलग-अलग धड़ों द्वारा अपने स्तर पर प्रचार चलाने की खबरों के बाद पार्टी हाईकमान चिंतित था। हरीश रावत राज्य के सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली कांग्रेस नेता हैं, इसलिए वेणुगोपाल ने उनसे मिलकर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की।
उत्तराखंड कांग्रेस में गुटबाजी की खबरें क्यों आई थीं?
पिछले कुछ हफ्तों से यह सूचनाएँ आ रही थीं कि राज्य के अलग-अलग नेता और गुट अपने स्तर पर कार्यक्रम और प्रचार अभियान चला रहे हैं। इससे केंद्रीय संगठन की एकीकृत रणनीति प्रभावित होने का खतरा था, जिसे लेकर हाईकमान ने सीधा हस्तक्षेप किया।
उत्तराखंड चुनाव में कांग्रेस का नेतृत्व कौन करेगा?
वेणुगोपाल के अनुसार, उत्तराखंड में चुनावी अभियान पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में चलाया जाएगा। राज्य के सभी नेताओं को इसी केंद्रीय ढाँचे के अंतर्गत काम करना होगा।
क्या इस बैठक से उत्तराखंड कांग्रेस की गुटबाजी खत्म होगी?
वेणुगोपाल ने भरोसा जताया है कि राज्य इकाई एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी। हालाँकि, राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि असली परीक्षा उम्मीदवारों की सूची और ज़मीनी प्रचार के दौरान होगी, जब गुटों के बीच तनाव और भी स्पष्ट हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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