21 सितंबर 2026
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हरीश रावत की माँग: पूरे मुख्यमंत्री कार्यकाल की जांच हो, जांच आयोग गठित करे सरकार

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हरीश रावत की माँग: पूरे मुख्यमंत्री कार्यकाल की जांच हो, जांच आयोग गठित करे सरकार

सारांश

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा — 'जांच से नहीं घबराता।' उनकी माँग है कि चुनावी मौसम में टुकड़ों में जांच कराने के बजाय उनके पूरे कार्यकाल की एक साथ निष्पक्ष जांच हो और एक जांच आयोग गठित किया जाए — जो भविष्य में जवाबदेही की नई परंपरा भी बन सके।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 21 सितंबर 2026 को देहरादून में अपने पूरे मुख्यमंत्री कार्यकाल की जांच के लिए न्यायिक या जांच आयोग गठित करने की माँग दोहराई।
रावत ने कहा — 'मैं जांच से पीछे नहीं हट रहा'; अनियमितता, अधिकारों के दुरुपयोग या आर्थिक लाभ के आरोपों की पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने चुनावों के समय केंद्रीय एजेंसियों के ज़रिये टुकड़ों में जांच कराने की प्रक्रिया को अनुचित बताया।
रावत ने सुझाया कि इस व्यवस्था से उत्तराखंड में प्रशासनिक जवाबदेही की नई परंपरा स्थापित हो सकती है।
उन्होंने उत्तराखंड के प्रमुख सिद्धपीठों की यात्रा की भी घोषणा की, जहाँ वह पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण करेंगे।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 21 सितंबर 2026 को देहरादून में एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह किसी भी जांच से नहीं घबराते — बल्कि उन्होंने उत्तराखंड की भाजपा सरकार से माँग की कि उनके संपूर्ण मुख्यमंत्री कार्यकाल की पड़ताल के लिए एक न्यायिक या जांच आयोग गठित किया जाए। रावत का तर्क है कि चुनावों के समय बार-बार अलग-अलग केंद्रीय एजेंसियों के ज़रिये टुकड़ों में जांच कराने के बजाय एक व्यापक और समयबद्ध आयोग अधिक पारदर्शी परिणाम दे सकता है।

सिद्धपीठ दौरे का ऐलान

हरीश रावत ने बताया कि वह उत्तराखंड के प्रमुख सिद्धपीठों की यात्रा पर निकलने वाले हैं, जहाँ वह पूजा-अर्चना करेंगे और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित करेंगे। उन्होंने इस यात्रा को व्यक्तिगत आस्था और उत्तराखंड की धरती के प्रति अपनी कृतज्ञता से जोड़ा। रावत ने कहा कि वह स्वस्थ होकर लौटे हैं और इस धरती के चारू सिद्धों — जिन्हें प्रदेश के दिग्पाल माना जाता है — को प्रणाम करना उनका कर्तव्य है।

जांच आयोग की माँग: मुख्य तर्क

पूर्व मुख्यमंत्री ने दो-टूक कहा, 'मैं जांच से पीछे नहीं हट रहा हूँ।' उनका कहना था कि यदि उनके कार्यकाल में किसी प्रकार की अनियमितता, अधिकारों का दुरुपयोग या आर्थिक लाभ अर्जित करने के मामले हुए हैं, तो एक आयोग के माध्यम से सब कुछ सामने आ जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इससे यह भी स्पष्ट होगा कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए अपने अधिकारों का किस प्रकार उपयोग किया।

रावत ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी मौसम में केंद्रीय एजेंसियों को भेजकर चुनिंदा दबाव बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस द्वारा सरकार को दिए गए विभिन्न सुझावों का भी उल्लेख किया और कहा कि उनमें से अधिकांश को सरकार ने अनदेखा किया है।

प्रशासनिक जवाबदेही की नई परंपरा का सुझाव

रावत ने इस माँग को एक बड़े संदर्भ से जोड़ा। उनका कहना था कि यदि प्रत्येक मुख्यमंत्री के कार्यकाल की इसी प्रकार समीक्षा या जांच की व्यवस्था बनाई जाए, तो उत्तराखंड में एक नई राजनीतिक और प्रशासनिक परंपरा स्थापित हो सकती है। उनके अनुसार, इससे भविष्य के मुख्यमंत्री अपने निर्णयों और अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर अधिक सावधान और जवाबदेह रहेंगे।

राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज़ हो रही हैं। हरीश रावत कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ और पहचाने जाने वाले नेताओं में से एक हैं और उनकी जांच आयोग की यह माँग पहली बार नहीं है — वे इसे पहले भी उठा चुके हैं। आलोचकों का कहना है कि यह माँग सत्ता पक्ष पर आक्रामकता का जवाब देने की रणनीति है, जबकि रावत का तर्क है कि यह पारदर्शिता की माँग है।

आगे की राह

रावत की यह माँग भाजपा सरकार ने अभी तक स्वीकार नहीं की है। यदि सरकार आयोग गठित करती है, तो यह उत्तराखंड की राजनीति में एक नज़ीर बन सकती है। फ़िलहाल, रावत अपने सिद्धपीठ दौरे के कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं और राजनीतिक मोर्चे पर भी सक्रिय बने हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि ऐसा करने से विपक्षी नेता को एक साफ़ चुनावी कथा मिल जाती है। दूसरी ओर, यदि सरकार इनकार करती है, तो रावत का यही तर्क बनता है कि एजेंसियाँ राजनीतिक हथियार हैं, न कि जवाबदेही के उपकरण। यह माँग 2027 के उत्तराखंड चुनाव की पृष्ठभूमि में और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है — जहाँ कांग्रेस को अपनी विश्वसनीयता पुनर्स्थापित करनी है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरीश रावत ने जांच आयोग की माँग क्यों की है?
हरीश रावत का कहना है कि चुनावों के समय अलग-अलग केंद्रीय एजेंसियों के ज़रिये टुकड़ों में जांच कराने के बजाय उनके पूरे मुख्यमंत्री कार्यकाल की एक साथ निष्पक्ष जांच हो। उनका तर्क है कि इससे यदि कोई अनियमितता हुई है तो सामने आएगी, और उनकी पारदर्शिता भी साबित होगी।
हरीश रावत के सिद्धपीठ दौरे का उद्देश्य क्या है?
रावत ने बताया कि वह उत्तराखंड के प्रमुख सिद्धपीठों में जाकर पूजा-अर्चना करेंगे और प्रसाद वितरित करेंगे। उन्होंने इसे व्यक्तिगत आस्था और उत्तराखंड की धरती के प्रति कृतज्ञता से जोड़ा है, क्योंकि वह स्वस्थ होकर लौटे हैं।
क्या भाजपा सरकार ने रावत की जांच आयोग की माँग स्वीकार की है?
अभी तक भाजपा सरकार ने इस माँग को स्वीकार नहीं किया है। रावत ने कहा कि कांग्रेस की ओर से कई सुझाव दिए गए हैं, लेकिन सरकार ने उनमें से अधिकांश को नज़रअंदाज़ किया है।
हरीश रावत के अनुसार जांच आयोग से क्या फ़ायदा होगा?
रावत का मानना है कि एक व्यापक जांच आयोग से उत्तराखंड में प्रशासनिक जवाबदेही की नई परंपरा स्थापित होगी। भविष्य के मुख्यमंत्री भी अधिक सावधानी और जवाबदेही के साथ कार्य करेंगे।
हरीश रावत कौन हैं और उत्तराखंड की राजनीति में उनकी भूमिका क्या है?
हरीश रावत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। वह प्रदेश कांग्रेस के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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