चारधाम यात्रा व्यवस्था पर हरीश रावत का हमला: 'सरकार के पास कोई नीति नहीं, होटल उद्योग बर्बाद'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने 7 जून को देहरादून में राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि चारधाम यात्रा की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास इस धार्मिक यात्रा के संचालन को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं है और यह असमंजस पर्यटन उद्योग को गहरा नुकसान पहुँचा रही है।
चारधाम यात्रा पर नीतिगत भ्रम
रावत ने कहा, 'चारधाम यात्रा की व्यवस्था पहले ही गड़बड़ा चुकी है। सरकार खुद इस बात को लेकर साफ नहीं है कि कौन सी नीति अपनाई जाए। कभी वह क्षमता (कैरिंग कैपेसिटी) की बात करती है तो कभी और अधिक तीर्थयात्रियों को बुलाती है। कभी ऑनलाइन बुकिंग की बात होती है तो कभी ऑफलाइन बुकिंग की। कुल मिलाकर, कोई साफ नीति नहीं है।' उनके अनुसार, इस नीतिगत अस्थिरता का सीधा असर तीर्थयात्रियों के अनुभव और स्थानीय व्यवसायों पर पड़ रहा है।
होटल उद्योग पर असर
पूर्व मुख्यमंत्री ने पर्यटन क्षेत्र की दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह वह मौसम है जब पर्यटन अपने चरम पर होना चाहिए था, लेकिन पर्यटकों की संख्या अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं पहुँच रही है। इससे होटल उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। रावत ने मुख्यमंत्री से माँग की कि होटल व्यवसायियों के लिए एक राहत पैकेज घोषित किया जाए, जिसमें टैक्स में छूट भी शामिल हो।
बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन
दिल्ली के मालवीय नगर में हाल ही में लगी आग की घटना का उल्लेख करते हुए रावत ने राज्य सरकार से पूरे उत्तराखंड में बहुमंजिला इमारतों का सुरक्षा ऑडिट कराने की माँग की। उन्होंने कहा कि भूकंप और जलभराव जैसी आपदाओं के मद्देनजर व्यापक सुरक्षा उपाय अनिवार्य हैं — चाहे इमारत का मालिक कोई भी हो।
एलपीजी मूल्यवृद्धि और भ्रष्टाचार के आरोप
एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी पर प्रतिक्रिया देते हुए रावत ने BJP पर व्यंग्य किया। उन्होंने कहा, 'यह वही भाजपा है, जिसने उस समय इसका विरोध किया था जब हमने सिलेंडर की कीमत में मात्र पाँच रुपए की बढ़ोतरी की थी।' उन्होंने आगे आरोप लगाया, 'भाजपा के शासन में भ्रष्टाचार संस्थागत हो गया है। व्यापारियों का शोषण हो रहा है। हम इन सभी मुद्दों को जनता के बीच ले जाएंगे, संघर्ष करेंगे, आवाज उठाएंगे और अपना आंदोलन जारी रखेंगे।'
2026-27 चुनावों का संकेत
रावत ने आगामी विधानसभा चुनावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'चुनाव 2026 में हों या 2027 में, हम बदलाव लाएंगे। राज्य की जनता बदलाव का मन बना चुकी है। अल्मोड़ा और पौड़ी में उमड़ी भारी भीड़ इसी बदलाव की चाहत का सबूत है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस उत्तराखंड में अपनी ज़मीन मजबूत करने की कोशिश में है।