चारधाम यात्रा: सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो के खिलाफ 3 FIR, सरकार ने कसी नकेल
सारांश
Key Takeaways
- उत्तराखंड पुलिस ने चारधाम यात्रा पर भ्रामक सोशल मीडिया सामग्री के मामले में तीन FIR दर्ज की हैं।
- रुद्रप्रयाग जिले में हाल ही में दो नए मामले दर्ज किए गए हैं।
- भ्रामक वीडियो में केदारनाथ धाम पर १५ घंटे कतार, बिना दर्शन वापसी और धक्का-मुक्की के झूठे दावे किए गए।
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने २४ घंटे सोशल मीडिया निगरानी और तत्काल कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए।
- प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी धामों में यात्रा व्यवस्था पूरी तरह सुचारु और नियंत्रित है।
- अन्य संदिग्ध डिजिटल कंटेंट की जांच जारी है और आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
देहरादून, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। चारधाम यात्रा 2025 को लेकर उत्तराखंड में सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही भ्रामक और तथ्यहीन सामग्री के विरुद्ध राज्य सरकार ने कठोर रुख अपना लिया है। उत्तराखंड पुलिस ने अब तक इस मामले में तीन एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें रुद्रप्रयाग जिले में हाल ही में दर्ज किए गए दो नए मामले भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
क्या थे भ्रामक वीडियो में दावे?
सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान प्रशासन को ऐसे कई वीडियो और रील्स मिले, जिनमें केदारनाथ धाम की व्यवस्थाओं को लेकर निराधार आरोप लगाए गए थे। इन वीडियो में दावा किया गया कि श्रद्धालुओं को बिना दर्शन कराए वापस भेजा जा रहा है और १५-१५ घंटे कतार में खड़े रहने के बाद भी दर्शन नहीं हो पा रहे।
इसके अलावा इन वीडियो में पुलिस व्यवस्था की अनुपस्थिति और श्रद्धालुओं के बीच धक्का-मुक्की जैसी स्थितियों का भी उल्लेख किया गया। प्रशासन ने इन सभी दावों को सिरे से नकारते हुए कहा कि ये वीडियो जानबूझकर यात्रा की छवि धूमिल करने के इरादे से बनाए और प्रसारित किए गए।
प्रशासन का पक्ष और वास्तविक स्थिति
अधिकारियों के अनुसार, केदारनाथ सहित सभी चारों धामों में श्रद्धालुओं को सुव्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से दर्शन कराए जा रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और यात्रा सुचारु रूप से संचालित हो रही है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि भ्रामक सामग्री फैलाकर श्रद्धालुओं में अनावश्यक भय पैदा करने और यात्रा को बाधित करने की सुनियोजित कोशिश की गई। संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मुख्यमंत्री धामी के सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि चारधाम यात्रा से जुड़ी किसी भी अफवाह या गलत सूचना के प्रसार को रोकने के लिए २४ घंटे सोशल मीडिया निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि दोषियों को तत्काल कानून के दायरे में लाया जाए।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड की पर्यटन छवि, श्रद्धालुओं की आस्था और चारधाम यात्रा की गरिमा के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अन्य संदिग्ध डिजिटल कंटेंट की जांच भी जारी है।
व्यापक संदर्भ: डिजिटल अफवाहों का बढ़ता खतरा
गौरतलब है कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है — प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु इस यात्रा पर आते हैं और राज्य को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में सोशल मीडिया पर फैलाई गई एक भी भ्रामक पोस्ट हजारों श्रद्धालुओं के यात्रा निर्णय को प्रभावित कर सकती है।
यह पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक यात्रा को लेकर फेक न्यूज़ का सहारा लिया गया हो। २०२३ की चारधाम यात्रा के दौरान भी कुछ वीडियो वायरल हुए थे जो बाद में भ्रामक साबित हुए। इस बार सरकार ने पहले से ही सोशल मीडिया मॉनिटरिंग तंत्र मजबूत कर रखा है।
आने वाले दिनों में बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में प्रशासन की सतर्कता और डिजिटल निगरानी तंत्र की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। श्रद्धालुओं से अपील है कि वे केवल सरकारी और प्रामाणिक स्रोतों से यात्रा संबंधी जानकारी प्राप्त करें।