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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गंगोत्री मार्ग की दयनीय स्थिति पर उठाए सवाल, कहा- यह चिंता का विषय है

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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गंगोत्री मार्ग की दयनीय स्थिति पर उठाए सवाल, कहा- यह चिंता का विषय है

सारांश

उत्तरकाशी में पूर्व सीएम हरीश रावत ने गंगोत्री धाम तक की यात्रा के दौरान सड़क की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने बीआरओ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया।

मुख्य बातें

गंगोत्री मार्ग की स्थिति चिंताजनक है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने बीआरओ पर सवाल उठाए।
स्थानीय लोगों की सुरक्षा पर खतरा।
सरकार की कार्यप्रणाली पर आलोचना।
यात्रा से पहले सुधार की जरूरत।

उत्तरकाशी, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पर्वतीय जनपद उत्तरकाशी में चारधाम यात्रा की तैयारियों के बीच कांग्रेस नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बुधवार को मुख्यालय से गंगोत्री धाम तक विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान उन्होंने यात्रा मार्ग पर सड़कों की खराब स्थिति को लेकर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और सरकार की आलोचना की।

दौरे के दौरान रावत ने उत्तरकाशी से गंगोत्री तक विभिन्न स्थानों पर रुककर स्थानीय लोगों, व्यापारियों और यात्रियों से चर्चा की। उन्होंने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि चारधाम यात्रा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन से पहले सड़क व्यवस्था का यह हाल न केवल चिंताजनक है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को भी खतरे में डालता है।

उन्होंने कहा कि गड्ढों, धंसान और अधूरे निर्माण कार्यों के कारण यात्रा का मार्ग जोखिम भरा हो गया है, जो न केवल यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठाता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि बीआरओ की लापरवाही और धीमी कार्यशैली के कारण हर साल यात्रा से पहले सड़कों की स्थिति संतोषजनक नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता दिखानी चाहिए थी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है।

उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों की उपेक्षा लंबे समय से जारी है और विकास के दावों के बावजूद बुनियादी सुविधाएं बदहाल हैं।

प्रधानमंत्री के हालिया उत्तराखंड दौरे पर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह चुनावी दौरा करार दिया। उन्होंने कहा कि घोषणाओं और भाषणों के जरिए जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।

दौरे के दौरान रावत ने प्रशासन से अपील की कि यात्रा शुरू होने से पहले सड़क मार्गों की तत्काल मरम्मत कराई जाए और जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा प्रबंध किए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि समय पर व्यवस्थाएं नहीं की गईं, तो श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को दुष्प्रभाव झेलना पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों ने भी अपनी समस्याएं पूर्व मुख्यमंत्री के सामने रखते हुए बताया कि हर साल यात्रा से पहले सड़क सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी रहती है। व्यापारियों ने कहा कि खराब सड़कों के कारण यात्रियों की आवाजाही प्रभावित होती है, जिससे उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ता है।

इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी रावत के साथ विभिन्न स्थानों पर निरीक्षण किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए यात्रा व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की। कुल मिलाकर, चारधाम यात्रा से पहले उत्तरकाशी-गंगोत्री मार्ग की स्थिति एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है, जहां सरकार व्यवस्थाओं को दुरुस्त बताने का दावा कर रही है, जबकि विपक्ष जमीनी हकीकत को उजागर कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां एक ओर सरकार व्यवस्थाओं को ठीक बताने का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष जमीनी हकीकत को उजागर कर रहा है। ऐसे में स्थानीय लोगों और यात्रियों की सुरक्षा एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरीश रावत ने गंगोत्री मार्ग की स्थिति पर क्या कहा?
उन्होंने सड़क की खराब स्थिति को चिंताजनक बताते हुए बीआरओ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
क्या सरकार ने इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई की है?
पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार ने अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
स्थानीय लोगों की क्या प्रतिक्रिया है?
स्थानीय लोगों ने बताया कि हर साल यात्रा से पहले सड़क सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन हालात जस के तस बने रहते हैं।
क्या यात्रा के दौरान सुरक्षा प्रबंध किए जा रहे हैं?
रावत ने यात्रा शुरू होने से पहले सुरक्षा प्रबंधों की मांग की है।
क्या यह मामला राजनीतिक चर्चा का कारण बना?
जी हां, यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है, जहां सरकार और विपक्ष दोनों के दावे सामने आ रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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