राहुल गांधी सोरोस फंड से भारतीय लोकतंत्र कमज़ोर कर रहे हैं: बोम्मई का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने 4 नवंबर 2026 को हुबली में मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस से कथित तौर पर फंडिंग मिल रही है और वे इसका उपयोग भारतीय लोकतंत्र को कमज़ोर करने में कर रहे हैं। बोम्मई के ये आरोप पूरी तरह राजनीतिक प्रकृति के हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
बोम्मई ने क्या कहा
बसवराज बोम्मई ने राहुल गांधी को एक 'कुंठित' राजनेता बताते हुए कहा कि उन्हें अपनी गलतियों का दोष दूसरों पर मढ़ने की आदत हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता के विदेशी संगठनों से संबंध हैं और वे ऐसे समूहों से जुड़े हैं जो भारत के हितों के विरुद्ध काम करते हैं।
बोम्मई ने दावा किया कि सोरोस के माध्यम से कथित तौर पर करोड़ों रुपये की फंडिंग आई है और इन विरोध प्रदर्शनों तथा अभियानों के ज़रिए राहुल गांधी उन लोगों को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं जिन्होंने उन्हें यह धन दिया है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिनका मकसद भारत की एकता और अखंडता को नुकसान पहुँचाना है।
प्रधानमंत्री मोदी का बचाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए बोम्मई ने उन्हें एक समर्पित देशभक्त बताया, जिन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा में अर्पित कर दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रधानमंत्री पर बेबुनियाद आरोप लगाना, जिन्होंने सब कुछ न्योछावर कर दिया, 'पूरे भारत के देशभक्त लोगों का अपमान' करने के समान है।
बोम्मई ने अपने वक्तव्य में तर्क दिया कि मोदी के विरुद्ध लगाए गए आरोप 'पूरी तरह अर्थहीन' हैं और इन्हें कोई महत्व देने की ज़रूरत नहीं है।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि BJP और कांग्रेस के बीच सोरोस-फंडिंग का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक विमर्श में बार-बार उठता रहा है। भारतीय जनता पार्टी के कई नेता पहले भी इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठा चुके हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने ऐसे सभी आरोपों को लगातार 'राजनीति से प्रेरित और निराधार' बताकर खारिज किया है।
यह ऐसे समय में आया है जब दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच वाक्-युद्ध तेज़ हो रहा है और आगामी राज्य चुनावों को लेकर सियासी माहौल गर्म है।
आगे क्या
बोम्मई के इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के आरोप बिना ठोस साक्ष्य के महज़ राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हैं। भविष्य में इस मुद्दे पर संसद में भी चर्चा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।