स्टिंग ऑपरेशन विवाद: प्रियांक खड़गे का कुमारस्वामी पर तीखा पलटवार, 'गाँव के बेवकूफ' वाली टिप्पणी से सियासत गरम
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी पर तीखा पलटवार किया, जब कुमारस्वामी ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले को लेकर खड़गे की जाँच-प्रक्रिया पर सवाल उठाए। बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए खड़गे ने कुमारस्वामी की प्रशासनिक समझ को ही कठघरे में खड़ा कर दिया।
विवाद की जड़: कथित ईमेल शिकायत और 2015 का कनेक्शन
इस पूरे विवाद की शुरुआत उस कथित ईमेल से हुई है जो 2015 में एक पीड़ित ने स्टिंग ऑपरेशन केस के संबंध में शिकायत के तौर पर भेजा था। कुमारस्वामी ने सवाल उठाया था कि इस ईमेल पर पुलिस विभाग ने समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की। इस पर प्रियांक खड़गे ने पलटवार करते हुए कहा कि कोई निजी ईमेल आने पर पुलिस या बाल अधिकार आयोग को तब तक स्वतः पता नहीं चलता, जब तक मामला उनके संज्ञान में न लाया जाए।
खड़गे ने कहा, 'अगर कोई प्राइवेट ईमेल भेजता है, तो पुलिस या चाइल्ड राइट्स कमीशन को इसके बारे में कैसे पता चलेगा? जब तक चाइल्ड राइट्स कमीशन मामले को पुलिस डिपार्टमेंट के ध्यान में नहीं लाता, डिपार्टमेंट को कैसे पता चलेगा? क्या उनमें यह बेसिक कॉमन सेंस नहीं है?'
खड़गे का कुमारस्वामी की योग्यता पर सवाल
खड़गे ने कुमारस्वामी की उस टिप्पणी का भी जवाब दिया जिसमें उन्होंने खड़गे को गृह मंत्री बनने के 'लायक नहीं' बताया था। खड़गे ने पूछा, 'वह कहते हैं कि प्रियांक खड़गे गृह मंत्री बनने के लायक नहीं हैं और नाकाबिल हैं। वह अपने परिवार और राज्य के लोगों से झूठ बोलते हैं, रोते हैं और बार-बार चुनाव क्षेत्र बदलते हैं। अगर उनके जैसा व्यक्ति मुख्यमंत्री बन सकता है, तो क्या मैं गृह मंत्री नहीं बन सकता?'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी काबिलियत को लेकर कुमारस्वामी से किसी 'सर्टिफिकेट' की कोई ज़रूरत नहीं है।
कुमारस्वामी के मुख्यमंत्री कार्यकाल पर निशाना
गौरतलब है कि खड़गे ने कुमारस्वामी के खिलाफ एक बड़ा सवाल दागा — यदि यह कथित ईमेल शिकायत 2015 में भेजी गई थी, और कुमारस्वामी उसके बाद लगभग डेढ़ साल तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे, तो उन्होंने उस दौरान इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की?
खड़गे ने तंज कसते हुए कहा, 'अगर ईमेल 2015 में भेजा गया था, तो कुमारस्वामी डेढ़ साल तक मुख्यमंत्री थे। क्या वह एक्शन लेने के बजाय उस समय गधों को चराने पर नजर रख रहे थे? क्या वह केस के बारे में जानते हुए भी चुप थे? क्या वह गाँव के बेवकूफ हैं?' यह टिप्पणी राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया का केंद्र बन गई है।
जाँच प्रक्रिया पर खड़गे का बचाव
खड़गे ने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी आपराधिक मामले की जाँच के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होता है और इसे 'बच्चों का खेल' नहीं समझना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुमारस्वामी केस की वास्तविक बारीकियों पर चर्चा करने की बजाय बार-बार व्यक्तिगत हमले करने का सहारा ले रहे हैं।
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी जनता दल (सेक्युलर)-भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है। आने वाले दिनों में इस मामले पर और नए राजनीतिक घटनाक्रम सामने आने की संभावना है।