झारखंड स्टेट बार काउंसिल: अभय कुमार चतुर्वेदी अध्यक्ष निर्वाचित, रिंकू भगत उपाध्यक्ष
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष पद पर वरिष्ठ अधिवक्ता अभय कुमार चतुर्वेदी निर्वाचित हुए हैं। 4 नवंबर 2026 को रांची के डोरंडा स्थित काउंसिल कार्यालय में संपन्न हुए चुनाव में 26 सदस्यों ने मतदान किया। उपाध्यक्ष पद पर रिंकू भगत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के प्रतिनिधि के रूप में प्रशांत कुमार सिंह चुने गए।
मुख्य चुनाव परिणाम
अध्यक्ष पद पर अभय कुमार चतुर्वेदी और निलेश कुमार के बीच सीधा मुकाबला हुआ। चतुर्वेदी ने 15 मत प्राप्त कर विजय हासिल की, जबकि निलेश कुमार को 10 मत मिले। 1 मत अवैध घोषित किया गया।
उपाध्यक्ष पद के लिए चार उम्मीदवारों के बीच चुनाव हुआ। रिंकू भगत ने 10 मत पाकर जीत दर्ज की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी मृत्युंजय कुमार श्रीवास्तव को 9 मत, मधुलता रानी को 4 मत और अनिल कुमार महतो को 2 मत प्राप्त हुए। इस चुनाव में भी 1 मत अवैध पाया गया।
BCI प्रतिनिधि पद पर प्रशांत कुमार सिंह ने 18 मत हासिल किए। मनोज कुमार द्वितीय को 7 मत और संजय कुमार विद्रोही को 1 मत मिला।
चुनाव प्रक्रिया की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि काउंसिल के सदस्यों के चुनाव के लिए 12 मार्च 2026 को मतदान हुआ था, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों और झारखंड उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं ने भाग लिया था। वरीयता आधारित मतदान और मतगणना के बाद सदस्यों का चयन किया गया।
जून 2026 में विधि विभाग की ओर से जारी गजट अधिसूचना में 22 निर्वाचित सदस्यों के नाम प्रकाशित किए गए थे, जबकि एक सदस्य पद का परिणाम उस समय लंबित था। इसके अतिरिक्त दो महिला सदस्यों को काउंसिल में नामित किया गया। पदाधिकारियों का यह चुनाव काउंसिल के निर्वाचित और नामित सदस्यों के बीच ही होता है।
झारखंड स्टेट बार काउंसिल की भूमिका
झारखंड स्टेट बार काउंसिल राज्य में अधिवक्ताओं के पंजीकरण, उनके पेशेवर हितों और कल्याण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। काउंसिल का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है। इसके सदस्य अपने बीच से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करते हैं तथा BCI के प्रतिनिधि का चयन भी करते हैं।
आगे की राह
नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के सामने राज्य के अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा, कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ समन्वय की ज़िम्मेदारी होगी। नई नेतृत्व टीम के कार्यकाल में झारखंड की विधिक बिरादरी की अपेक्षाएँ उनसे जुड़ी हैं।