रांची को मिली नई नगर सरकार, भाजपा समर्थित उम्मीदवार ने डिप्टी मेयर पद पर हासिल की जीत
सारांश
Key Takeaways
- नई नगर सरकार का गठन रांची में हुआ है।
- रोशनी खलखो ने मेयर पद की शपथ ली है।
- नीरज कुमार ने डिप्टी मेयर का चुनाव जीता है।
- शहर के विकास के लिए नई बोर्ड ने कार्य शुरू कर दिया है।
- नगर निगम की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण है।
रांची, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। लगभग तीन वर्षों के लंबे इंतज़ार के बाद, झारखंड की राजधानी रांची को अब एक नई 'नगर सरकार' प्राप्त हुई है। रांची की नवनिर्वाचित मेयर रोशनी खलखो के साथ-साथ 53 वार्ड पार्षदों ने गुरुवार को पद और गोपनीयता की शपथ ली। रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों को शपथ दिलाई।
पार्षदों के शपथ ग्रहण के साथ ही नगर निगम में डिप्टी मेयर पद के लिए चुनाव भी आयोजित किया गया, जिसमें वार्ड 31 के पार्षद और भाजपा समर्थित उम्मीदवार नीरज कुमार ने विजय प्राप्त की। उन्हें 53 में से 38 पार्षदों का समर्थन मिला, जबकि महागठबंधन के उम्मीदवार और वार्ड 44 के पार्षद परमजीत सिंह को 15 मत प्राप्त हुए। इस परिणाम के साथ ही नगर निगम में राजनीतिक समीकरण भी स्पष्ट हो गए हैं।
शपथ ग्रहण के बाद, मेयर रोशनी खलखो ने शहर के समग्र विकास का संकल्प दोहराते हुए कहा कि साफ-सफाई, बुनियादी सुविधाओं में सुधार और जनहित से जुड़े मुद्दे उनकी प्राथमिकता में रहेंगे।
ज्ञात हो कि रोशनी खलखो भाजपा समर्थित उम्मीदवार थीं और उन्होंने हालिया चुनाव में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी रमा खलखो को लगभग 14 हजार मतों से हराकर जीत हासिल की थी। शपथ ग्रहण के बाद मेयर, डिप्टी मेयर और सभी पार्षदों ने नगर निगम कार्यालय पहुंचकर औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया। इसके साथ ही शहर के विकास, आधारभूत ढांचे के विस्तार और नागरिक समस्याओं के समाधान की दिशा में नई बोर्ड ने कार्य शुरू कर दिया है।
इस बीच, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने डिप्टी मेयर नीरज कुमार को बधाई देते हुए कहा कि जनता और पार्षदों ने जिस विश्वास के साथ उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है, उस पर खरा उतरना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई टीम रांची को देश के अग्रणी शहरों में शामिल करने की दिशा में काम करेगी।
हालांकि, नई नगर सरकार के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। वर्तमान में, रांची नगर निगम की आर्थिक स्थिति दबाव में है। चालू वित्तीय वर्ष के लिए लगभग 2610 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत है, लेकिन अब तक महज करीब 115 करोड़ रुपए की आय ही हो सकी है। ऐसे में विकास योजनाओं का क्रियान्वयन काफी हद तक केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदान पर निर्भर करेगा। शहर में पेयजल, सड़क, जलनिकासी, सफाई और ट्रैफिक प्रबंधन जैसी बुनियादी समस्याएं पहले से ही गंभीर बनी हुई हैं। सीमित संसाधनों के बीच इन समस्याओं का समाधान करना नई बोर्ड के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।