क्या कांग्रेस ने मनरेगा के स्थान पर नए कानून के खिलाफ रांची में मार्च किया?
सारांश
Key Takeaways
- मनरेगा का महत्व ग्रामीण विकास में है।
- नए कानून से मजदूरों के अधिकारों पर असर पड़ेगा।
- कांग्रेस का मार्च राजनीतिक जागरूकता का प्रतीक है।
- गांधी जी की विचारधारा का सम्मान किया गया।
- राज्य और केंद्र के बीच अंशदान का अनुपात बदलना चिंता का विषय है।
रांची, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मनरेगा के विकल्प के रूप में नया कानून लाने के खिलाफ झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सोमवार को रांची में एक पैदल मार्च निकाला। यह मार्च प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से लोक भवन तक गया। मार्च से पहले कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की और मनरेगा कानून में बदलाव के खिलाफ निरंतर संघर्ष का संकल्प लिया।
इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजू ने कहा कि यूपीए सरकार ने मनरेगा के माध्यम से ग्रामीण गरीबों को 100 दिनों का रोजगार कानूनी अधिकार प्रदान किया था और योजना का निर्धारण ग्राम पंचायतों के हाथ में था। इससे पंचायत स्तर पर विकास को मजबूती मिली और करोड़ों परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिली।
उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान जब बड़ी संख्या में मजदूर शहरों से गांव लौटे, तब मनरेगा उनके लिए एक जीवन रेखा साबित हुआ। राजू ने आरोप लगाया कि नए कानून में योजनाओं का चयन केंद्र सरकार करेगी, जिससे मजदूरों के अधिकार सीमित हो जाएंगे और ठेकेदारी व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, जो मनरेगा की मूल भावना के खिलाफ है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि यूपीए शासनकाल में मनरेगा का बजट लगातार बढ़ाया गया, जबकि वर्तमान भाजपा सरकार ने इसमें कटौती की है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र-राज्य अंशदान अनुपात को 90:10 से 60:40 कर दिया गया है, जिससे राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि साल के दो महीनों तक काम पर प्रतिबंध से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ भेदभाव होगा। विधायक दल नेता प्रदीप यादव ने केंद्र सरकार पर जनहित कानूनों को कमजोर करने का आरोप लगाया, जबकि विधायक दल के उप नेता राजेश कच्छप ने कहा कि कांग्रेस ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मनरेगा कानून दिया था, जिसे अब बदला जा रहा है।
सांसद सुखदेव भगत ने मनरेगा के नाम और स्वरूप में बदलाव को गांधीवादी विचारधारा पर हमला बताया। वित्त मंत्री डॉ. राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि देश में 12 करोड़ से अधिक पंजीकृत मनरेगा मजदूर हैं, जिन्हें 125 दिन रोजगार देने के लिए भारी बजट की आवश्यकता होगी, जबकि वर्तमान आवंटन अपर्याप्त है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह और कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने भी मनरेगा को ग्रामीण विकास और पलायन रोकने की महत्वपूर्ण योजना बताते हुए बदलाव का विरोध किया। सभा का संचालन कार्यकारी अध्यक्ष शहजादा अनवर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन महिला कांग्रेस अध्यक्ष रमा खलखो ने किया। मार्च में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और मनरेगा मजदूर शामिल हुए।