सीबीआई ने "पीवाईपीएल" से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी के मामले में 15 स्थानों पर छापे मारे

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सीबीआई ने "पीवाईपीएल" से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी के मामले में 15 स्थानों पर छापे मारे

सारांश

सीबीआई ने 15 स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें एक बड़े अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया गया। पीवाईपीएल के जरिए भारतीय नागरिकों से करोड़ों रुपये की ठगी की गई।

Key Takeaways

  • सीबीआई ने 15 स्थानों पर छापेमारी की।
  • धोखाधड़ी का मुख्य सरगना अशोक कुमार शर्मा है।
  • धोखाधड़ी के माध्यम से करोड़ों रुपये की ठगी की गई।
  • धनराशि को फर्जी खातों में स्थानांतरित किया गया।
  • तलाशी में आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए।

नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पंजाब में 15 स्थानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई एक बड़े पैमाने पर संगठित ऑनलाइन निवेश और पार्ट-टाइम नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी के मामले में की गई, जिसमें मुख्य रूप से दुबई स्थित फिनटेक प्लेटफॉर्म "पीवाईपीएल" के माध्यम से विदेशी निकासी और ठगी की गई है।

सीबीआई ने गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) से मिली सूचनाओं के आधार पर यह मामला दर्ज किया था। आरोप है कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी गिरोह ने भ्रामक ऑनलाइन योजनाओं के माध्यम से हजारों भोले-भाले भारतीय नागरिकों से करोड़ों रुपये ठगे हैं।

जांच में यह सामने आया है कि गिरोह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप्लिकेशनों और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवाओं का इस्तेमाल किया। उन्होंने ऑनलाइन निवेश पर जल्दी मुनाफा और पार्ट-टाइम नौकरी का लालच देकर लोगों को फंसाया। पीड़ितों को पहले छोटी राशि जमा करने के लिए प्रेरित किया गया और फिर उन्हें काल्पनिक लाभ दिखाकर बड़ी राशि निवेश करने के लिए राजी किया गया। जैसे ही वे बड़ी राशि निवेश करते, जालसाज उनसे संपर्क तोड़ लेते थे।

धोखाधड़ी से प्राप्त धन को कई फर्जी बैंक खातों के माध्यम से तुरंत स्थानांतरित किया गया ताकि लेन-देन का पता न चल सके। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय लेन-देन के लिए सक्षम डेबिट कार्ड का उपयोग करके विदेशी एटीएम से निकासी की गई और वीजा एवं मास्टरकार्ड भुगतान नेटवर्क का इस्तेमाल करके धनराशि को देश से बाहर निकाल दिया गया। ये सभी लेन-देन बैंकिंग प्रणालियों में प्वाइंट-ऑफ-सेल (पीओएस) लेनदेन के रूप में दर्ज हुए।

सीबीआई ने बताया कि दिल्ली-गुरुग्राम सीमा पर स्थित बिजवासन गांव में रहने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक कुमार शर्मा इस गिरोह का सरगना है, जो कथित तौर पर फर्जी खातों और विदेशी वित्तीय चैनलों के माध्यम से सैकड़ों करोड़ रुपये की हेराफेरी में लिप्त था। ठगी से प्राप्त पैसों का एक हिस्सा क्रिप्टोकरेंसी में भी परिवर्तित किया गया।

जांच में एक और बड़े नेटवर्क का पता चला, जिसके द्वारा अशोक कुमार शर्मा पर पिछले वर्ष के दौरान लगभग 900 करोड़ रुपये की हेराफेरी करने का संदेह है। ठगी से प्राप्त धनराशि को 15 फर्जी कंपनियों से जुड़े खातों में समेकित किया गया और दो संस्थाओं के माध्यम से स्थानांतरित किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि इन संस्थाओं ने भारत स्थित वर्चुअल एसेट एक्सचेंजों के माध्यम से प्राप्त धनराशि को यूएसडीटी में परिवर्तित किया और क्रिप्टोकरेंसी को अपने व्हाइट-लिस्टेड वॉलेट में स्थानांतरित किया।

सीबीआई ने इससे पहले सितंबर 2025 में उपरोक्त संस्थाओं द्वारा उपयोग किए जा रहे बैंक खातों और उनमें जमा धनराशि को फ्रीज कर दिया था। निदेशकों के आवासीय परिसरों और इन संस्थाओं के कार्यालय परिसरों पर भी तलाशी ली गई।

तलाशी के दौरान गिरोह के संचालन से संबंधित आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए। यह भी पता चला कि कई भोले-भाले व्यक्तियों को धोखे से फर्जी कंपनियों के निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था और उनके निगमन के लिए धोखाधड़ी से प्राप्त दस्तावेजों का उपयोग किया गया। अशोक शर्मा को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। सीबीआई विदेशी नागरिक की पहचान करने और उसे गिरफ्तार करने के लिए आगे की कार्रवाई जारी रखे हुए है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणालियों के माध्यम से भेजे गए अपराध की आय का पता लगाने और उसे जब्त करने के लिए भी प्रयासरत है।

Point of View

बल्कि यह भी दर्शाता है कि साइबर अपराध कितना व्यापक और संगठित हो चुका है। सीबीआई की कार्रवाई ने इस मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को उजागर किया है।
NationPress
12/03/2026

Frequently Asked Questions

सीबीआई ने किस फिनटेक प्लेटफॉर्म से जुड़े धोखाधड़ी मामले में छापेमारी की?
सीबीआई ने 'पीवाईपीएल' से जुड़े धोखाधड़ी मामले में छापेमारी की।
इस धोखाधड़ी का मुख्य सरगना कौन है?
इस धोखाधड़ी का मुख्य सरगना अशोक कुमार शर्मा है।
धोखाधड़ी से कितने रुपये की ठगी की गई?
इस धोखाधड़ी में हजारों भारतीय नागरिकों से करोड़ों रुपये ठगे गए।
सीबीआई ने कब छापेमारी की?
सीबीआई ने 12 मार्च को छापेमारी की।
छापेमारी में क्या बरामद हुआ?
तलाशी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए।
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