भारत के टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की मिली अनुमति, जयशंकर-अराघची वार्ता के बाद

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भारत के टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की मिली अनुमति, जयशंकर-अराघची वार्ता के बाद

सारांश

भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों की बातचीत के बाद, ईरान ने भारत के झंडे वाले टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी है। यह कदम कच्चे तेल और गैस के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है।

Key Takeaways

  • भारत के झंडे वाले टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मिली।
  • यह निर्णय कच्चे तेल और गैस के परिवहन को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • अमेरिका और इजरायल के जहाजों को पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है।

नई दिल्ली/तेहरान, १२ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के बीच हुई बातचीत के परिणामस्वरूप, ईरान ने भारत के झंडे वाले टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति प्रदान की है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के परिवहन के लिए आवश्यक इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखना है।

सूत्रों के अनुसार, भारतीय टैंकर 'पुष्पक' और 'परिमल' ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार किया है। इसके विपरीत, अमेरिका, यूरोप और इजरायल के जहाजों को इस रणनीतिक जलमार्ग पर पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है।

दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में चल रहे परिवर्तनों पर चर्चा की, और होर्मुज जलडमरूमध्य पर समुद्री आवाजाही एक प्रमुख मुद्दा रहा। यह उनकी तीसरी वार्ता थी जब से ईरान में युद्ध की स्थिति उत्पन्न हुई है।

एक अन्य मामले में, सऊदी अरब का कच्चा तेल ले जाने वाला एक लाइबेरिया के झंडे वाला टैंकर भी होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार करके मुंबई पोर्ट पर पहुंच गया है। इस जहाज का कैप्टन एक भारतीय था।

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद, इस क्षेत्र में समुद्री यातायात में काफी कमी आई है। इस प्रकार, यह जहाज भारत जाने वाला पहला टैंकर बन गया। टैंकर 'शेनलॉन्ग स्वेजमैक्स' ने १ मार्च को सऊदी पोर्ट रास तनुरा से कच्चा तेल लोड किया था और दो दिन बाद रवाना हुआ।

लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस और टैंकरट्रैकर्स के समुद्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, भारतीय जल क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले जहाज की आखिरी रिकॉर्ड की गई स्थिति ८ मार्च को होर्मुज जलडमरूमध्य के अंदर थी।

टैंकर के सफलतापूर्वक गुजरने से भारत में ऊर्जा आपूर्ति में संभावित रुकावटों को लेकर बढ़ती चिंताओं में कुछ कमी आने की उम्मीद है। भारत एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है और यह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अत्यधिक निर्भर है, जहाँ से इसका आधे से अधिक कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस आयात होता है।

हालांकि कुछ जहाजों के सुरक्षित पारगमन के बावजूद, कई भारतीय जहाज इस संवेदनशील मार्ग में या उसके आस-पास मौजूद हैं। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के अनुसार, जब से इस क्षेत्र में संघर्ष शुरू हुआ है, तब से कम से कम २८ भारतीय झंडे वाले जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में या उसके आसपास काम कर रहे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि आठ भारतीय झंडे वाले जहाज, जो युद्ध की शुरुआत पर होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में थे, अब सुरक्षित जल में चले गए हैं।

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कुछ दिनों में इनमें से सात जहाज, 'देश महिमा', 'देश अभिमान', 'स्वर्ण कमल', 'विश्व प्रेरणा', 'जग विराट', 'जग लोकेश', और 'एलएनजीसी असीम' होर्मुज जलडमरूमध्य से निकलकर अरब सागर में पहुंच गए हैं। एक अन्य जहाज, 'जग लक्ष्य' अंगोला की ओर बढ़ गया है। इस बीच, क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।

Point of View

भारत और ईरान के बीच आर्थिक एवं सामरिक संबंधों में मजबूती आने की संभावना है। यह निर्णय भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
NationPress
18/03/2026

Frequently Asked Questions

भारत के टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति क्यों मिली?
यह अनुमति भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच हुई वार्ता के बाद दी गई, जिसका उद्देश्य कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के परिवहन को सुनिश्चित करना है।
क्या अन्य देशों के जहाजों पर पाबंदियाँ हैं?
हां, अमेरिका, यूरोप और इजरायल के जहाजों को इस जलमार्ग पर पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है।
कितने भारतीय जहाज इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं?
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के अनुसार, कम से कम २८ भारतीय झंडे वाले जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में या उसके पास काम कर रहे हैं।
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