ईरान ने भारतीय एलपीजी टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की दी सुरक्षित अनुमति
सारांश
Key Takeaways
- ईरान ने भारतीय एलपीजी टैंकरों को सुरक्षित मार्ग दिया।
- फारस की खाड़ी में 28 भारतीय जहाज संचालित हैं।
- शिवालिक और नंदा देवी जहाज भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- भारतीय नौसेना द्वारा सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।
- प्रधानमंत्री मोदी और ईरान के राष्ट्रपति के बीच महत्वपूर्ण बातचीत हुई।
नई दिल्ली, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। होर्मुज जलडमरूमध्य से दो एलपीजी जहाजों के सुरक्षित पार होने के बाद, अब और भारतीय एलपीजी टैंकर इस युद्ध प्रभावित क्षेत्र में प्रवेश के लिए कतार में खड़े हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, ईरान ने भारतीय झंडे वाले जहाजों को इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति प्रदान की है।
सूत्रों के अनुसार, फारस की खाड़ी क्षेत्र में वर्तमान में कुल 28 भारतीय झंडे वाले जहाज संचालित हो रहे हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए सभी पर नजर रखी जा रही है।
इनमें से 24 भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में हैं, जिनमें 677 भारतीय नाविक हैं, जबकि चार जहाज जलडमरूमध्य के पूर्व में हैं, जिन पर 101 नाविक सवार हैं।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (डीजीएस) के आंकड़ों के अनुसार, इन जहाजों में लगभग 2.15 लाख टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी), 4.15 लाख टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और करीब 17.5 लाख टन कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) मौजूद है।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा समुद्री स्थिति पर नज़र रखी हुई है, और परिस्थितियों के अनुसार निगरानी और तैयारियों को मज़बूत किया गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहाँ से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का निर्यात होता है।
इस बीच, दो तेल टैंकर 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' भी जल्द ही भारत पहुंचेंगे। ये दोनों जहाज सरकारी कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के अधीन हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, 'शिवालिक' जहाज को भारतीय नौसेना की सुरक्षा में लाया जा रहा है और यह अगले दो दिनों में मुंबई या कांडला बंदरगाह पर पहुंच सकता है। यह जहाज अब खुले समुद्र में पहुंच चुका है और भारतीय नौसेना के मार्गदर्शन में सुरक्षित रूप से आगे बढ़ रहा है।
'नंदा देवी' जहाज में 46,000 मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी भरा हुआ है, जो भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सूत्रों के अनुसार, दोनों जहाजों को संवेदनशील समुद्री क्षेत्र से सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय नौसेना लगातार मार्गदर्शन कर रही है।
यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच की उच्च स्तरीय बातचीत के बाद लिया गया है, जिसमें ऊर्जा और अन्य सामान की आपूर्ति पर चर्चा हुई थी।
इससे पहले, भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने संकेत दिया था कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों को जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग मिल जाएगा, क्योंकि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवागमन काफी प्रभावित हुआ है।