होर्मुज जलडमरूमध्य से 11 भारतीय जहाज सुरक्षित निकले, 13 अभी भी फारस की खाड़ी में : विदेश मंत्रालय
सारांश
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम
होर्मुज जलडमरूमध्य वह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है। ईरान ने यह रास्ता 28 फरवरी को उस समय बंद कर दिया था जब इजरायल और अमेरिका ने उसके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। इस बंदी का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और भारतीय व्यापारिक जहाजों पर पड़ा।
अमेरिका-ईरान तनाव और ताज़ा घटनाक्रम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार की शाम कहा था कि वह कुछ समय के लिए रोक हटाकर देखना चाहते हैं कि ईरान के साथ कोई समझौता संभव है या नहीं। इसके बाद ईरान के सैन्य संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को घोषणा की कि वह अब जहाजों को इस मार्ग से गुजरने देगा। आईआरजीसी ने दावा किया कि अमेरिका की धमकियों को 'बेअसर' कर दिया गया है।
गौरतलब है कि ट्रंप ने बुधवार की सुबह चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने जलडमरूमध्य पर रोक नहीं हटाई तो वह पुनः और अधिक तीव्रता के साथ बमबारी शुरू कर सकते हैं। यह कूटनीतिक दबाव और सैन्य चेतावनी का मिला-जुला रुख था।
अमेरिकी प्रतिबंध और बातचीत का टूटना
अमेरिका ने 13 अप्रैल को ईरानी बंदरगाहों पर अपनी ओर से भी रोक लगा दी थी, जब दोनों देशों के बीच बातचीत अचानक टूट गई थी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। खबरों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य अब फिर से खुलने की ओर बढ़ रहा है और बुधवार को अमेरिका व ईरान दोनों की ओर से इस दिशा में सकारात्मक संकेत मिले।
भारत की कूटनीतिक सक्रियता
भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि फारस की खाड़ी क्षेत्र भारत के ऊर्जा आयात और व्यापारिक हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, शेष 13 जहाजों को भी सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कराकर भारत लाने के प्रयास जारी हैं। आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत की दिशा और गति यह तय करेगी कि ये जहाज कब तक अपने गंतव्य तक पहुँच पाते हैं।
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने 7 मई 2026 को नई दिल्ली में साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पुष्टि की कि ईरान के साथ जारी कूटनीतिक संवाद के परिणामस्वरूप 11 भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं, जबकि 13 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में मौजूद हैं। एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि मंत्रालय शेष जहाजों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए ईरानी अधिकारियों के निरंतर संपर्क में है।
प्रवक्ता का बयान
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा,