आईआरजीसी का ऐलान: होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग देंगे, अमेरिकी धमकियाँ बेअसर
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने 6 मई को घोषणा की कि अमेरिका की "आक्रामक धमकियाँ" निष्प्रभावी हो जाने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सुरक्षित और स्थिर बनाए रखी जाएगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तथाकथित "प्रोजेक्ट फ्रीडम" को कुछ समय के लिए स्थगित करने की घोषणा की है।
आईआरजीसी का आधिकारिक बयान
आईआरजीसी की नौसेना ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में खाड़ी और ओमान की खाड़ी में जहाजों के कप्तानों और मालिकों का आभार जताया, जिन्होंने नए ईरानी नियमों का पालन करते हुए इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने में सहयोग किया। बयान के अनुसार, नए प्रोटोकॉल लागू होने के बाद "दोषमुक्त" जहाजों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया जाएगा।
किन जहाजों पर लग सकती है रोक
आईआरजीसी ने इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। इनके अनुसार, अमेरिकी सैन्य बलों के लिए हथियार या गोला-बारूद ले जाने वाले जहाजों को रोका जा सकता है। यह शर्त व्यापारिक जहाजरानी के लिए एक नई जटिलता पैदा करती है, विशेष रूप से उन देशों के लिए जो इस मार्ग पर निर्भर हैं।
ट्रंप का 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' और कूटनीतिक पृष्ठभूमि
यह घोषणा राष्ट्रपति ट्रंप की उस सोशल मीडिया पोस्ट के बाद आई है, जिसमें उन्होंने मंगलवार शाम "प्रोजेक्ट फ्रीडम" को फिलहाल रोकने की बात कही थी। ट्रंप के अनुसार यह फैसला पाकिस्तान और अन्य देशों के अनुरोध पर, तथा ईरान के साथ संभावित शांति समझौते की दिशा में हो रही प्रगति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हालाँकि, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाया गया दबाव और नाकाबंदी फिलहाल जारी रहेगी।
होर्मुज का वैश्विक महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार और समुद्री सुरक्षा पर पड़ता है। गौरतलब है कि यह जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित है और इसकी चौड़ाई अपने संकरे बिंदु पर मात्र लगभग 33 किलोमीटर है।
आगे क्या होगा
ईरान-अमेरिका के बीच परमाणु और कूटनीतिक वार्ता की पृष्ठभूमि में यह घटनाक्रम अहम है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि दोनों पक्षों के बीच कोई ठोस समझौता नहीं हुआ तो होर्मुज में तनाव फिर से बढ़ सकता है और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।