होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप का बड़ा फैसला: 'छोटी-बड़ी हर नाव को गोली मारो', नौसेना को सख्त आदेश

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होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप का बड़ा फैसला: 'छोटी-बड़ी हर नाव को गोली मारो', नौसेना को सख्त आदेश

सारांश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंगें बिछाने वाली हर नाव को नष्ट करने का नौसेना को आदेश दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि यह जलडमरूमध्य पूरी तरह अमेरिकी नियंत्रण में है और ईरान के समझौता करने तक सील रहेगा।

Key Takeaways

  • डोनाल्ड ट्रंप ने 23 अप्रैल 2025 को अमेरिकी नौसेना को होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंगें बिछाने वाली हर नाव को नष्ट करने का आदेश दिया।
  • ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट कर माइन-स्वीपिंग अभियान तीन गुना तेज करने का निर्देश दिया।
  • ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह अमेरिकी नियंत्रण में है और ईरान के समझौता करने तक सील रहेगा।
  • व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लीविट ने बताया कि अमेरिका दोहरी रणनीति अपना रहा है — सैन्य हमले रोके गए हैं लेकिन वित्तीय और समुद्री प्रतिबंध कड़े किए जा रहे हैं।
  • होर्मुज स्ट्रेट से विश्व के समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।
  • ट्रंप ने ईरान में हार्डलाइनर और मॉडरेट गुटों के बीच अंदरूनी खींचतान का जिक्र कर तेहरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ते सुरक्षा संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 23 अप्रैल 2025 को अमेरिकी नौसेना (US Navy) को एक कड़ा और स्पष्ट आदेश जारी किया है — होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें (Mines) बिछाने वाली किसी भी नाव को, चाहे वह छोटी हो या बड़ी, बिना किसी हिचकिचाहट के तत्काल नष्ट कर दिया जाए। साथ ही उन्होंने माइन-स्वीपिंग अभियानों को तीन गुना तेज करने का आदेश भी दिया है।

ट्रंप का 'ट्रुथ सोशल' पर सीधा आदेश

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए कहा, "मैंने यूनाइटेड स्टेट्स नेवी को आदेश दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट के पानी में बारूदी सुरंगें बिछाने वाली किसी भी नाव को — चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो — गोली मारकर नष्ट कर दिया जाए। इसमें जरा भी हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।"

ट्रंप ने आगे कहा, "हमारे माइन स्वीपर जहाज इस समय जलडमरूमध्य को साफ कर रहे हैं और मैं आदेश देता हूं कि यह काम अब तीन गुना ज्यादा तेजी से जारी रहे।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी है।

होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा

ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का पूरी तरह नियंत्रण है। उन्होंने कहा, "कोई भी जहाज तब तक अंदर या बाहर नहीं जा सकता जब तक उसे अमेरिकी नौसेना की मंजूरी न मिले। इसे पूरी तरह 'सील' कर दिया गया है, जब तक कि ईरान कोई समझौता नहीं कर लेता।"

गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है। इस जलडमरूमध्य से विश्व के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है तो वैश्विक तेल कीमतों पर तत्काल और गंभीर असर पड़ सकता है।

ईरान की आंतरिक राजनीति पर ट्रंप की टिप्पणी

ट्रंप ने ईरान की आंतरिक राजनीतिक उठापटक पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "ईरान को यह समझने में बहुत मुश्किल हो रही है कि उसका असली नेता कौन है। वहां 'हार्डलाइनर' और 'मॉडरेट' गुटों के बीच भारी अंदरूनी खींचतान चल रही है। हार्डलाइनर युद्ध के मैदान में बुरी तरह हार रहे हैं, जबकि मॉडरेट अब ज्यादा सम्मान पा रहे हैं।"

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की यह टिप्पणी ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है, ताकि तेहरान वार्ता की मेज पर अनुकूल शर्तें स्वीकार करे।

अमेरिका की दोहरी रणनीति — सैन्य और आर्थिक दबाव

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लीविट ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका एक दोहरी रणनीति अपना रहा है — एक तरफ सैन्य हमलों को फिलहाल रोका गया है, और दूसरी तरफ ईरान पर वित्तीय और समुद्री प्रतिबंधों को और कड़ा किया जा रहा है।

ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ युद्धविराम को बढ़ाया है, लेकिन व्यापक नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी है। व्हाइट हाउस ने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है और तेहरान पर आर्थिक दबाव जारी रहेगा।

वैश्विक तेल बाजार और भारत पर संभावित असर

होर्मुज स्ट्रेट के जरिए सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और ईरान का तेल निर्यात होता है। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। यदि यह जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहता है, तो भारतीय ईंधन बाजार पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।

यह भी उल्लेखनीय है कि 2019 में इसी क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमले हुए थे, जिनके लिए अमेरिका ने ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। उस घटना के बाद से इस जलमार्ग की सुरक्षा एक स्थायी भू-राजनीतिक चिंता बन गई है।

आने वाले दिनों में ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता की दिशा और होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव का स्तर वैश्विक ऊर्जा बाजार और मध्य-पूर्व की भू-राजनीति को निर्णायक रूप से प्रभावित करेगा।

Point of View

बल्कि ईरान पर कूटनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव की एक सुनियोजित रणनीति है। विडंबना यह है कि एक तरफ परमाणु वार्ता जारी है और दूसरी तरफ नौसैनिक नाकेबंदी को और कड़ा किया जा रहा है — यह दोहरापन दर्शाता है कि अमेरिका वार्ता की मेज पर ताकत की स्थिति से बात करना चाहता है। होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण का दावा वैश्विक तेल आपूर्ति को एक भू-राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश है, जिसका सबसे ज्यादा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ सकता है। मुख्यधारा की कवरेज ट्रंप के बयानों तक सिमटी है, लेकिन असली सवाल यह है कि यदि यह तनाव बढ़ता है तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विदेश नीति पर क्या दबाव आएगा।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर क्या आदेश दिया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना को आदेश दिया कि होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंगें बिछाने वाली किसी भी नाव को — चाहे वह छोटी हो या बड़ी — बिना हिचकिचाहट गोली मारकर नष्ट कर दिया जाए। साथ ही माइन-स्वीपिंग अभियान तीन गुना तेज करने का निर्देश दिया गया।
होर्मुज स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है, जिससे वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। भारत सहित कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं।
ट्रंप ने ईरान की आंतरिक राजनीति पर क्या कहा?
ट्रंप ने कहा कि ईरान में 'हार्डलाइनर' और 'मॉडरेट' गुटों के बीच भारी अंदरूनी खींचतान है और हार्डलाइनर युद्ध के मैदान में हार रहे हैं। उन्होंने इसे 'अराजक और हैरान करने वाला' बताया।
अमेरिका और ईरान के बीच अभी क्या स्थिति है?
ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाया है लेकिन नौसैनिक नाकेबंदी जारी है। व्हाइट हाउस के अनुसार बातचीत के लिए कोई समय-सीमा नहीं है और तेहरान पर आर्थिक दबाव जारी रहेगा।
होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव का भारत पर क्या असर हो सकता है?
भारत अपनी कुल तेल जरूरत का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आयात करता है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा तो भारतीय ईंधन बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
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