चीन ने अमेरिका और इजरायल को लगाया होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट का दोष
सारांश
Key Takeaways
- चीन ने अमेरिका और इजरायल को होर्मुज संकट का दोषी ठहराया।
- ट्रंप ने सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने से मना किया।
- संघर्ष विराम की अपील की गई है।
- ब्रिटिश पीएम ने 35 देशों की बैठक बुलाई।
- ब्रिटेन युद्ध में शामिल नहीं होगा।
बीजिंग, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। चीन ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के वर्तमान हालात के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है। बीजिंग का कहना है कि ईरान पर इन दोनों देशों की सैन्य कार्रवाई के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद है। चीन का मानना है कि ये हमले इस समस्या की “जड़” हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार की रात (स्थानीय समयानुसार) यूएस वासियों के लिए एक संबोधन में होर्मुज की जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया, जबकि पहले वे इस पर अधिकार जताने की बात करते थे। ट्रंप ने कहा कि जो लोग इस महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग से तेल प्राप्त करते हैं, उन्हें “इस मार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी” खुद उठानी चाहिए।
जब पत्रकारों ने चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग से ट्रंप की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने कहा: “होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट की मूल वजह, अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे अवैध सैन्य अभियान हैं।” उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव की जड़ अवैध सैन्य कार्रवाई है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।
चीन ने सभी पक्षों से तुरंत संघर्ष विराम की अपील की। माओ निंग ने कहा कि सैन्य कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि संघर्ष बढ़ाना किसी के हित में नहीं है और सभी पक्षों को तुरंत सैन्य अभियान रोक देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सभी देशों को संयम बरतते हुए बातचीत से समाधान निकालना चाहिए।
इस बीच, मौजूदा हालात का सही हल निकालने के लिए ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने 35 देशों की बैठक बुलाई है, जिसमें विभिन्न देशों के प्रतिनिधि स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए कूटनीतिक विकल्पों पर चर्चा करेंगे। बैठक में अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों के साझेदार शामिल हैं।
स्टार्मर के अनुसार इसका मुख्य उद्देश्य समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना और बाधित तेल आपूर्ति को फिर से शुरू करना है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ब्रिटेन युद्ध का हिस्सा नहीं बनेगा, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा के लिए कूटनीतिक कदम उठाएगा।