होर्मुज जलडमरूमध्य से 14 भारतीय जहाज सुरक्षित निकले, 14 अभी भी फंसे: विदेश मंत्रालय
सारांश
Key Takeaways
- 14 भारतीय जहाज पिछले कुछ हफ्तों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित निकल चुके हैं — विदेश मंत्रालय ने 23 अप्रैल को यह जानकारी दी।
- अभी भी 14 भारतीय जहाज पर्शियन गल्फ में मौजूद हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
- ईरान की आईआरजीसी-एन ने बुधवार, 22 अप्रैल को एपामिनोंडास जहाज पर हमला किया, जो मुंद्रा पोर्ट जा रहा था।
- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही ईरान ने यह हमला किया।
- भारत ने ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली को तलब कर कड़ा विरोध जताया और नाविकों की सुरक्षित आवाजाही की मांग की।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वैश्विक तेल व्यापार का एक-पांचवां हिस्सा गुजरता है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल: विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार को खुलासा किया कि पिछले कुछ हफ्तों में 14 भारतीय जहाज सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर चुके हैं, जबकि 14 अन्य भारतीय जहाज अभी भी पर्शियन गल्फ में मौजूद हैं। यह जानकारी ऐसे समय में आई है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है और इस रणनीतिक जलमार्ग पर हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान
एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, "पिछले कुछ हफ्तों में हमारे 14 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बाहर निकल चुके हैं, जबकि 14 भारतीय जहाज अभी भी पर्शियन गल्फ में हैं।"
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। इस रास्ते से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग एक-पांचवां हिस्सा गुजरता है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते यह क्षेत्र और अधिक संवेदनशील हो गया है।
ईरान का हमला और मुंद्रा पोर्ट से जुड़ा जहाज
बुधवार, 22 अप्रैल को ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक जहाज पर हमला किया, जो गुजरात के मुंद्रा पोर्ट की ओर जा रहा था। यह घटना उस वक्त हुई जब महज कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अनिश्चितकालीन युद्धविराम की घोषणा की थी — जो इस हमले को और भी विरोधाभासी बनाता है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी (आईआरजीसी-एन) ने दो जहाजों पर हमला कर उन्हें अपने कब्जे में लेने का दावा किया। ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी के अनुसार, इन जहाजों के नाम एमएससी फ्रांसेस्का और एपामिनोंडास हैं।
शिप ट्रैकिंग वेबसाइट्स के मुताबिक, लाइबेरिया के झंडे वाला एपामिनोंडास जहाज दुबई के जेबेल अली पोर्ट से मुंद्रा की ओर जा रहा था और गुरुवार को वहां पहुंचने वाला था। यह जहाज ग्रीस की कंपनी कालमार मैरीटाइम एलएलसी का बताया जा रहा है।
पहले भी हो चुके हैं हमले
गौरतलब है कि इससे पहले शनिवार को भी ईरान ने दो भारतीय जहाजों पर हमला किया था, जिन्हें इस रास्ते से गुजरने की अनुमति मिली हुई थी। यह कुछ ही दिनों में दूसरी बार था जब भारतीय जहाजों को इस जलमार्ग पर निशाना बनाया गया।
यह पैटर्न चिंताजनक है — ईरान एक ओर भारत के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर भारतीय व्यापारिक जहाजों पर हमले जारी हैं। यह विरोधाभास भारत की विदेश नीति के लिए एक कड़ी परीक्षा है।
भारत का कड़ा विरोध और राजनयिक कदम
इन हमलों के बाद भारत ने ईरान के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली को विदेश मंत्रालय ने तलब किया और इस मुद्दे पर स्पष्ट बातचीत की।
एमईए के आधिकारिक बयान में कहा गया, "विदेश सचिव ने साफ शब्दों में कहा कि भारत के लिए अपने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।" उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले ईरान ने कई भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया था।
भारत ने ईरान से आग्रह किया कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और भारत जाने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही जल्द से जल्द बहाल करे।
वैश्विक व्यापार और भारत पर संभावित असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत की ऊर्जा सुरक्षा सीधे जुड़ी हुई है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा पर्शियन गल्फ के देशों — सऊदी अरब, इराक, ईरान और यूएई — से आयात करता है। यदि यह जलमार्ग लंबे समय तक अवरुद्ध रहा तो भारत में तेल की कीमतें और महंगाई पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, पर्शियन गल्फ में लाखों भारतीय प्रवासी कामगार रहते हैं। इस तनाव का असर उनकी सुरक्षा और रेमिटेंस पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस क्षेत्र में अपनी राजनयिक सक्रियता और बढ़ानी होगी।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भारत-ईरान के बीच राजनयिक वार्ता का क्या नतीजा निकलता है और क्या पर्शियन गल्फ में फंसे 14 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से स्वदेश लौट पाते हैं।