भारत की ओर बढ़ रहे हैं 92,600 टन एलपीजी लेकर दो जहाज: होर्मुज पार करने की जानकारी
सारांश
Key Takeaways
- पाइन गैस और जग वसंत जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर रहे हैं।
- इन जहाजों में 92,600 टन एलपीजी है।
- प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।
- भारत का 90%25 व्यापार विदेशी जहाजों पर निर्भर है।
- सरकार भारतीय जहाजों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है।
नई दिल्ली, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मंगलवार को सरकार ने बताया कि एलपीजी से भरे दो जहाज - पाइन गैस और जग वसंत - सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करके भारत की दिशा में बढ़ रहे हैं।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि पाइन गैस जहाज २७ मार्च को न्यू मैंगलोर पोर्ट पर पहुंचेगा, जिसमें ४५,००० मीट्रिक टन एलपीजी है।
वहीं, जग वसंत जहाज २६ मार्च को कांडला पोर्ट पर पहुंचेगा, जिसमें ४७,६०० मीट्रिक टन एलपीजी लोड है। इसके अतिरिक्त, २० भारतीय जहाज अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में उपस्थित हैं।
पहले, जहाजों के ट्रैकिंग डेटा ने दिखाया कि उन्हें सुरक्षित मार्ग की मंजूरी मिल गई है, जिसके चलते वे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने में औसतन करीब १४ घंटे का समय लगता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, जिससे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर प्रभाव पड़ा है।
जग वसंत ने कुवैत से एलपीजी लोड की थी, जबकि पाइन गैस ने यूएई के रुवैस से अपना कार्गो लिया था। तनाव के कारण ये जहाज पहले फंसे हुए थे, लेकिन अब इन्हें आगे बढ़ने की अनुमति मिल गई है।
इस महीने की शुरुआत में भी दो अन्य भारतीय जहाज इसी रास्ते से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि सरकार वैश्विक तेल संकट से देशवासियों को बचाने के लिए कई उपाय कर रही है और ऊर्जा सप्लाई के अंतरराष्ट्रीय मार्गों को सुचारू रखने का प्रयास कर रही है।
राज्यसभा में पश्चिम एशिया संकट पर बोलते हुए उन्होंने हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया, खासकर ईंधन परिवहन और समुद्री मार्गों में।
उन्होंने कहा कि देश और देशवासियों को वैश्विक झटकों से बचाने का एकमात्र उपाय आत्मनिर्भरता है। वर्तमान में भारत का करीब ९० प्रतिशत व्यापार विदेशी जहाजों के जरिए होता है, जिससे हम दूसरों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में किसी भी वैश्विक संकट या युद्ध की स्थिति में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार 'मेक इन इंडिया' के तहत करीब ७०,००० करोड़ रुपए की लागत से भारतीय जहाजों को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही है।