महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण योजना को कैबिनेट की मंजूरी, ₹2,814 करोड़ से घटेगी आयात निर्भरता: PM मोदी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कैबिनेट ने 4 नवंबर 2026 को 'महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत व्यय सहायता योजना' को मंजूरी दी, जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह फैसला भारत की अन्य देशों पर खनिज आयात निर्भरता को उल्लेखनीय रूप से घटाएगा। ₹2,814 करोड़ के वित्तीय परिव्यय वाली यह योजना पाँच वर्षों की अवधि के लिए लागू की जाएगी और घरेलू प्रसंस्करण क्षमता निर्माण पर केंद्रित है।
योजना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिज ईवी, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए अनिवार्य हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत अभी भी रिफाइन की गई सामग्रियों के आयात पर काफी हद तक निर्भर है और यह योजना इसी स्थिति को बदलने के लिए लाई गई है।
मोदी ने अपनी पोस्ट के अंत में कहा, 'हमारा सिद्धांत स्पष्ट है... भारत के पास भविष्य की तकनीकें विकसित करने की क्षमता होनी चाहिए!'
योजना की प्रमुख विशेषताएँ
कैबिनेट के अनुसार, इस योजना के तहत नए महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना के लिए लक्षित पूंजीगत व्यय सहायता दी जाएगी। इसके अंतर्गत लिथियम और निकेल के अयस्कों तथा मध्यवर्ती उत्पादों को उच्च शुद्धता वाले यौगिकों में प्रसंस्कृत करने का लक्ष्य रखा गया है।
निकेल उत्पादन के दौरान उप-उत्पाद के रूप में कोबाल्ट प्राप्त होने की भी उम्मीद है। इससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS), इलेक्ट्रॉनिकी, रक्षा और विशेष इस्पात जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा।
आर्थिक और सामरिक महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को लेकर भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। गौरतलब है कि चीन वैश्विक लिथियम और कोबाल्ट रिफाइनिंग क्षमता पर वर्चस्व रखता है, जिससे भारत समेत कई देश सप्लाई जोखिम में हैं।
इस योजना का मूल उद्देश्य घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता घटाना और एक मजबूत सप्लाई चेन विकसित करना है — जो भारत के ईवी और नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों के लिए अनिवार्य माना जा रहा है।
कौन से क्षेत्र होंगे लाभान्वित
योजना के तहत स्थापित प्रसंस्करण संयंत्र सीधे इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग, बैटरी ऊर्जा भंडारण, रक्षा विनिर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को कच्चा माल उपलब्ध कराएँगे। इससे न केवल आयात बिल घटेगा, बल्कि घरेलू विनिर्माण को भी स्थिर और किफायती इनपुट मिलेगा।
आगे की राह
₹2,814 करोड़ की इस योजना के क्रियान्वयन की रूपरेखा और पात्रता मानदंड अब संबंधित मंत्रालयों द्वारा तय किए जाएँगे। विशेषज्ञों के अनुसार, योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेशकों को दी जाने वाली पूंजीगत सहायता वास्तविक प्रसंस्करण क्षमता से कितनी प्रभावी रूप से जोड़ी जाती है।