4 नवंबर 2026
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फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना को 5 साल का विस्तार, कैबिनेट ने 31 मार्च 2031 तक मंजूरी दी

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फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना को 5 साल का विस्तार, कैबिनेट ने 31 मार्च 2031 तक मंजूरी दी

सारांश

केंद्रीय कैबिनेट ने फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना को 2031 तक बढ़ाया — यह तीसरा विस्तार है। 2.45 लाख लंबित मामलों के बीच 850 अदालतें काम करेंगी। 2019 से अब तक ₹1,259.51 करोड़ जारी हो चुके हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय कैबिनेट ने 4 नवंबर 2026 को FTSC योजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक विस्तारित करने की मंजूरी दी।
देशभर में 850 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट संचालित किए जाएंगे, जिनमें विशेष पॉक्सो अदालतें शामिल हैं।
फिलहाल 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 779 FTSC कार्यरत हैं, जिनमें 399 पॉक्सो अदालतें हैं।
2025 में लगभग 66,500 मामले निपटाए गए, लेकिन वर्ष अंत तक करीब 2.45 लाख मामले लंबित रहे।
योजना शुरू होने से अब तक राज्यों को ₹1,259.51 करोड़ की वित्तीय सहायता जारी की जा चुकी है।

केंद्रीय कैबिनेट ने 4 नवंबर 2026 को फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक पाँच वर्षों के लिए विस्तारित करने की मंजूरी दे दी। यह योजना महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए संचालित है। यह इस योजना का तीसरा विस्तार है, जो मूल रूप से 2019 में शुरू की गई थी।

योजना का विस्तार और दायरा

नए विस्तार के तहत देशभर में 850 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट संचालित किए जाएंगे, जिनमें विशेष पॉक्सो अदालतें भी शामिल होंगी। फिलहाल 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 779 FTSC कार्यरत हैं, जिनमें से 399 विशेष पॉक्सो अदालतें हैं। सरकार ने संकेत दिया है कि लंबित दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों की संख्या को देखते हुए अतिरिक्त जिलों को भी इस योजना के दायरे में लाया जाएगा।

प्रदर्शन के आँकड़े

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में 775 FTSC (जिनमें 398 पॉक्सो अदालतें शामिल थीं) ने लगभग 66,500 मामलों का निस्तारण किया। इससे पहले वर्ष 2024 में 85,595 मामले और वर्ष 2023 में 76,319 मामले निपटाए गए थे। हालाँकि, 2025 के अंत तक करीब 2.45 लाख मामले अभी भी लंबित हैं, जो इस योजना की निरंतर आवश्यकता को रेखांकित करता है।

वित्तीय सहायता और केंद्र की भूमिका

FTSC योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को न्यायिक अधिकारियों एवं सहायक कर्मचारियों के वेतन के साथ-साथ अदालतों के दैनिक संचालन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। योजना की शुरुआत से अब तक राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को ₹1,259.51 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है। यह राशि देशभर में त्वरित न्याय तंत्र को बनाए रखने के लिए केंद्र की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

योजना की पृष्ठभूमि

FTSC योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 और दुष्कर्म से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के उद्देश्य से की गई थी। गौरतलब है कि यह इस योजना का तीसरा विस्तार है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में न्याय में देरी एक गंभीर सामाजिक चिंता बनी हुई है।

आगे की राह

सरकार का मानना है कि योजना के इस विस्तार से पीड़ितों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराने और लंबित मामलों के बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। 2.45 लाख से अधिक लंबित मामलों को देखते हुए, अतिरिक्त जिलों को शामिल करना और अदालतों की संख्या 850 तक बढ़ाना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 2.45 लाख लंबित मामले यह भी बताते हैं कि सात साल में भी निपटारे की रफ्तार माँग से पीछे है। 2024 में 85,595 मामले निपटे, जबकि 2025 में यह संख्या घटकर 66,500 रह गई — यह गिरावट चिंताजनक है और इसकी वजह स्पष्ट नहीं की गई है। असली सवाल यह है कि केवल अदालतों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त है, या न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, अभियोजन क्षमता और पीड़ित सहायता तंत्र को भी समानांतर रूप से मज़बूत किया जाएगा। बिना इन संरचनात्मक सुधारों के, 850 अदालतों का लक्ष्य भी उसी लंबित बोझ के नीचे दब सकता है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना क्या है?
FTSC योजना 2019 में शुरू की गई एक केंद्रीय योजना है, जिसका उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों — विशेष रूप से दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों — का त्वरित निपटारा करना है। केंद्र सरकार इसके लिए राज्यों को न्यायिक अधिकारियों के वेतन और संचालन खर्च हेतु वित्तीय सहायता देती है।
केंद्रीय कैबिनेट ने FTSC योजना को कब तक बढ़ाया है?
केंद्रीय कैबिनेट ने 4 नवंबर 2026 को FTSC योजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक पाँच वर्षों के लिए विस्तारित करने की मंजूरी दी है। यह इस योजना का तीसरा विस्तार है।
देश में अभी कितनी FTSC अदालतें काम कर रही हैं?
वर्तमान में 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 779 FTSC कार्यरत हैं, जिनमें 399 विशेष पॉक्सो अदालतें शामिल हैं। नए विस्तार के तहत यह संख्या बढ़ाकर 850 तक ले जाने का लक्ष्य है।
FTSC योजना के तहत अब तक कितने मामले निपटाए गए हैं?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार 2023 में 76,319, 2024 में 85,595 और 2025 में लगभग 66,500 मामलों का निस्तारण हुआ। हालाँकि 2025 के अंत तक करीब 2.45 लाख मामले अभी भी लंबित हैं।
FTSC योजना के लिए केंद्र सरकार ने कितना खर्च किया है?
योजना की शुरुआत 2019 से अब तक केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ₹1,259.51 करोड़ की वित्तीय सहायता जारी कर चुकी है। यह राशि न्यायिक अधिकारियों के वेतन और अदालतों के संचालन पर खर्च की जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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