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तमिलनाडु में 26 नए पॉक्सो कोर्ट और 4 नारकोटिक्स अदालतें: ₹46.59 करोड़ की मंजूरी

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तमिलनाडु में 26 नए पॉक्सो कोर्ट और 4 नारकोटिक्स अदालतें: ₹46.59 करोड़ की मंजूरी

सारांश

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देश पर राज्य सरकार ने ₹46.59 करोड़ की लागत से 26 नए पॉक्सो न्यायालय और 4 एनडीपीएस अदालतें स्थापित करने की मंजूरी दी है। इससे राज्य में नियोजित पॉक्सो अदालतों की संख्या 52 हो जाएगी, जो 47 पुलिस जिलों को कवर करेंगी।

मुख्य बातें

तमिलनाडु सरकार ने ₹46.59 करोड़ की लागत से 26 नए पॉक्सो विशेष न्यायालयों की स्थापना को मंजूरी दी।
नई मंजूरी में 12 नए विशेष न्यायालय और 14 अतिरिक्त विशेष न्यायालय शामिल हैं; राज्य में नियोजित पॉक्सो अदालतों की कुल संख्या 52 होगी।
ये अदालतें राज्य के 47 पुलिस जिलों में सेवाएं देंगी और केवल पॉक्सो मामलों की सुनवाई करेंगी।
'नशा मुक्त तमिलनाडु' अभियान के तहत 4 नए एनडीपीएस न्यायालय — कांचीपुरम , तिरुवल्लूर , वेल्लोर और चेन्नई में — स्वीकृत किए गए।
यह निर्णय मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय की अध्यक्षता में राज्यभर के लंबित मामलों की समीक्षा के बाद लिया गया।

तमिलनाडु सरकार ने 1 नवंबर 2026 को बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 के तहत लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए 26 अतिरिक्त विशेष न्यायालयों की स्थापना को मंजूरी दी। ₹46.59 करोड़ की लागत से स्थापित होने वाले ये न्यायालय राज्य के न्यायिक ढाँचे को मजबूत करेंगे और पीड़ितों को समयबद्ध न्याय दिलाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देशों के बाद यह निर्णय लिया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में राज्यभर में पॉक्सो मामलों की लंबित स्थिति का जायजा लिया गया। बैठक के बाद अधिकारियों को सभी जिलों में पॉक्सो अदालतों की स्थापना हेतु तत्काल कदम उठाने, जाँच में तेजी लाने और दोषियों को कानूनी दंड सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

नई मंजूरी में 12 नए विशेष न्यायालय और 14 अतिरिक्त विशेष न्यायालय शामिल हैं। इससे तमिलनाडु में नियोजित पॉक्सो न्यायालयों की कुल संख्या 52 हो जाएगी। ये अदालतें राज्य के 47 पुलिस जिलों में कार्य करेंगी और केवल पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की ही सुनवाई करेंगी।

वर्तमान न्यायिक स्थिति

आधिकारिक बयान के अनुसार, तमिलनाडु में अभी 22 विशेष पॉक्सो अदालतें कार्यरत हैं, जबकि 4 अन्य शीघ्र चालू होने वाली हैं। नई मंजूरी इसी आधार पर विस्तार का अगला चरण है। गौरतलब है कि बाल यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में विशेष न्यायालयों की माँग लंबे समय से न्यायविदों और बाल अधिकार संगठनों द्वारा उठाई जा रही थी।

नारकोटिक्स अदालतों का विस्तार

सरकार ने मादक पदार्थ एवं मनोरोगी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) के तहत मामलों की सुनवाई के लिए 4 नए विशेष न्यायालयों को भी मंजूरी दी है। यह निर्णय राज्य सरकार के 'नशा मुक्त तमिलनाडु' अभियान का हिस्सा है। कांचीपुरम, तिरुवल्लूर और वेल्लोर में एक-एक विशेष न्यायालय स्थापित होगा, जबकि चेन्नई में एक अतिरिक्त विशेष न्यायालय खोला जाएगा।

राज्य में फिलहाल एनडीपीएस मामलों के लिए 11 विशेष अदालतें कार्यरत हैं। नई अदालतों के जुड़ने से लंबित मादक पदार्थ मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।

सरकार की प्राथमिकता

आधिकारिक बयान में कहा गया है कि प्रशासन महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों से निपटने, अपराधियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने और पीड़ितों को उचित समय-सीमा के भीतर न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार के अनुसार, दोनों निर्णय मिलकर न्याय प्रणाली की बाल यौन शोषण और मादक पदार्थों के मामलों से निपटने की क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएंगे।

आगे की राह

नई अदालतों की स्थापना के बाद तमिलनाडु में पॉक्सो न्यायालयों का नेटवर्क देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालयों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ उनमें प्रशिक्षित न्यायिक अधिकारियों और पीड़ित सहायता सेवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित करना उतना ही आवश्यक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती न्यायालयों की संख्या बढ़ाने से आगे की है। पॉक्सो मामलों में देरी अक्सर न्यायालयों की कमी से नहीं, बल्कि अपर्याप्त फोरेंसिक संसाधनों, पीड़ित सहायता सेवाओं की अनुपस्थिति और जाँच की गुणवत्ता से जुड़ी होती है। महज ढाँचागत विस्तार पर्याप्त नहीं होगा जब तक कि इन न्यायालयों में प्रशिक्षित विशेष लोक अभियोजक और बाल-अनुकूल गवाही प्रक्रियाएँ भी सुनिश्चित न हों। सरकार ने 'नशा मुक्त तमिलनाडु' का नारा दिया है, पर एनडीपीएस अदालतों की प्रभावशीलता तभी सिद्ध होगी जब पुनर्वास और रोकथाम की नीतियाँ न्यायिक कार्यवाही के साथ-साथ चलें।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में नए पॉक्सो कोर्ट की स्थापना का खर्च कितना है?
तमिलनाडु सरकार ने 26 नए पॉक्सो विशेष न्यायालयों की स्थापना के लिए ₹46.59 करोड़ की राशि स्वीकृत की है। यह निर्णय मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देश पर लंबित मामलों की समीक्षा के बाद लिया गया।
तमिलनाडु में अब कुल कितने पॉक्सो कोर्ट होंगे?
नई मंजूरी के बाद राज्य में नियोजित पॉक्सो अदालतों की कुल संख्या 52 हो जाएगी। इनमें वर्तमान में कार्यरत 22, शीघ्र चालू होने वाली 4, और नव-स्वीकृत 26 अदालतें शामिल हैं।
नए एनडीपीएस न्यायालय कहाँ स्थापित किए जाएंगे?
4 नए एनडीपीएस विशेष न्यायालय कांचीपुरम, तिरुवल्लूर और वेल्लोर में एक-एक तथा चेन्नई में एक अतिरिक्त विशेष न्यायालय के रूप में स्थापित किए जाएंगे। यह 'नशा मुक्त तमिलनाडु' अभियान का हिस्सा है।
नए पॉक्सो कोर्ट किन जिलों में काम करेंगे?
ये 52 नियोजित पॉक्सो न्यायालय तमिलनाडु के 47 पुलिस जिलों को कवर करेंगे और केवल पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करेंगे।
तमिलनाडु सरकार ने इस विस्तार का निर्णय क्यों लिया?
मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में राज्यभर में बड़ी संख्या में पॉक्सो मामले लंबित पाए गए, जिसके बाद समर्पित अतिरिक्त न्यायालयों की आवश्यकता महसूस की गई। सरकार का लक्ष्य त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करना और पीड़ितों को समयबद्ध न्याय दिलाना है।
राष्ट्र प्रेस
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