तमिलनाडु में 26 नए पॉक्सो कोर्ट और 4 नारकोटिक्स अदालतें: ₹46.59 करोड़ की मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने 1 नवंबर 2026 को बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 के तहत लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए 26 अतिरिक्त विशेष न्यायालयों की स्थापना को मंजूरी दी। ₹46.59 करोड़ की लागत से स्थापित होने वाले ये न्यायालय राज्य के न्यायिक ढाँचे को मजबूत करेंगे और पीड़ितों को समयबद्ध न्याय दिलाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देशों के बाद यह निर्णय लिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में राज्यभर में पॉक्सो मामलों की लंबित स्थिति का जायजा लिया गया। बैठक के बाद अधिकारियों को सभी जिलों में पॉक्सो अदालतों की स्थापना हेतु तत्काल कदम उठाने, जाँच में तेजी लाने और दोषियों को कानूनी दंड सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
नई मंजूरी में 12 नए विशेष न्यायालय और 14 अतिरिक्त विशेष न्यायालय शामिल हैं। इससे तमिलनाडु में नियोजित पॉक्सो न्यायालयों की कुल संख्या 52 हो जाएगी। ये अदालतें राज्य के 47 पुलिस जिलों में कार्य करेंगी और केवल पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की ही सुनवाई करेंगी।
वर्तमान न्यायिक स्थिति
आधिकारिक बयान के अनुसार, तमिलनाडु में अभी 22 विशेष पॉक्सो अदालतें कार्यरत हैं, जबकि 4 अन्य शीघ्र चालू होने वाली हैं। नई मंजूरी इसी आधार पर विस्तार का अगला चरण है। गौरतलब है कि बाल यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में विशेष न्यायालयों की माँग लंबे समय से न्यायविदों और बाल अधिकार संगठनों द्वारा उठाई जा रही थी।
नारकोटिक्स अदालतों का विस्तार
सरकार ने मादक पदार्थ एवं मनोरोगी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) के तहत मामलों की सुनवाई के लिए 4 नए विशेष न्यायालयों को भी मंजूरी दी है। यह निर्णय राज्य सरकार के 'नशा मुक्त तमिलनाडु' अभियान का हिस्सा है। कांचीपुरम, तिरुवल्लूर और वेल्लोर में एक-एक विशेष न्यायालय स्थापित होगा, जबकि चेन्नई में एक अतिरिक्त विशेष न्यायालय खोला जाएगा।
राज्य में फिलहाल एनडीपीएस मामलों के लिए 11 विशेष अदालतें कार्यरत हैं। नई अदालतों के जुड़ने से लंबित मादक पदार्थ मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।
सरकार की प्राथमिकता
आधिकारिक बयान में कहा गया है कि प्रशासन महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों से निपटने, अपराधियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने और पीड़ितों को उचित समय-सीमा के भीतर न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार के अनुसार, दोनों निर्णय मिलकर न्याय प्रणाली की बाल यौन शोषण और मादक पदार्थों के मामलों से निपटने की क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएंगे।
आगे की राह
नई अदालतों की स्थापना के बाद तमिलनाडु में पॉक्सो न्यायालयों का नेटवर्क देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालयों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ उनमें प्रशिक्षित न्यायिक अधिकारियों और पीड़ित सहायता सेवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित करना उतना ही आवश्यक होगा।