पलक्कड़ में पॉक्सो मामलों की बढ़त पर केरल सरकार सख्त, आईजी पूनकुझली की अध्यक्षता में विशेष कार्य बल गठित
सारांश
मुख्य बातें
केरल सरकार ने पलक्कड़ जिले के चुनिंदा पुलिस थानों में पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में अपेक्षाकृत वृद्धि को गंभीरता से लेते हुए 7 जुलाई को एक उच्च स्तरीय विशेष कार्य बल के गठन का आदेश दिया। इस बल की अध्यक्षता पुलिस महानिरीक्षक पूनकुझली करेंगी और इसे तीन महीनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी।
किन थानों पर होगी जांच केंद्रित
कार्य बल की जांच मुख्य रूप से वालयार, कोल्लेनगोडे, मीनाक्षीपुरम और कोझिंजमपारा पुलिस थानों पर केंद्रित रहेगी। इन क्षेत्रों में पॉक्सो मामलों की संख्या जिले के अन्य हिस्सों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक दर्ज की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब केरल विधानसभा की दसवीं बैठक की अनुमान समिति ने इन क्षेत्रों में बाल यौन शोषण के मामलों की अधिकता के कारणों का गहन अध्ययन करने और निवारक उपायों की सिफारिश के लिए एक बहुविषयक समिति गठित करने का सुझाव दिया था।
गृह मंत्री का निर्देश
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने गृह विभाग को तीन दिनों के भीतर कार्य बल का गठन पूरा करने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि यह बल तीन महीनों के भीतर अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। गौरतलब है कि यह निर्णय विधानसभा की अनुमान समिति की सिफारिशों के सीधे अनुपालन में लिया गया है।
कार्य बल की संरचना और दायरा
इस बहुविषयक कार्य बल में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ जिला जनजागरण समिति, जिला महिला प्रकोष्ठ, सखी, जिला बाल कल्याण कार्यालय और महिला संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इसे केवल अपराधों के स्वरूप की जांच नहीं करनी है, बल्कि उन व्यापक सामाजिक परिस्थितियों का भी अध्ययन करना है जो बच्चों को अधिक जोखिम में डाल सकती हैं।
डिजिटल उपकरणों की भूमिका की भी होगी पड़ताल
कार्य बल को विशेष रूप से यह जांचने का दायित्व सौंपा गया है कि स्मार्टफोन और अन्य डिजिटल उपकरणों के व्यापक उपयोग ने बच्चों के व्यवहार, भावनात्मक प्रतिक्रियाओं, मनोवैज्ञानिक कल्याण और पारस्परिक संबंधों को किस प्रकार प्रभावित किया है। यह भी देखा जाएगा कि क्या विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के बच्चे इन बदलावों से अलग-अलग तरह से प्रभावित होते हैं और क्या डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग ने उन्हें शोषण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाया है।
आगे क्या होगा
कार्य बल की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार निवारक नीतियों और हस्तक्षेप कार्यक्रमों की दिशा तय करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बहुविषयक जांच से न केवल अपराध के मूल कारणों की पहचान होगी, बल्कि दीर्घकालिक बाल सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।