केरल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: पलक्कड़ में 23 बच्चों की मौत की जांच सीबीआई को सौंपी
सारांश
मुख्य बातें
केरल उच्च न्यायालय ने 12 जून 2026 को पलक्कड़ जिले में पिछले 13 वर्षों में हुई बच्चों की संदिग्ध मौतों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का आदेश दिया। न्यायालय ने कम से कम एक मामले की जांच में गंभीर खामियों का संज्ञान लेते हुए यह निर्देश जारी किया।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति वी.एम. श्याम कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश जिले में बच्चों की असामान्य मौतों की व्यापक जांच की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। राज्य की क्राइम ब्रांच द्वारा प्रस्तुत स्टेटस रिपोर्ट की समीक्षा के बाद न्यायालय ने विशेष रूप से कोल्लेनगोड पुलिस स्टेशन के क्राइम नंबर 21/2010 को राज्य क्राइम ब्रांच से सीबीआई को हस्तांतरित करने का आदेश दिया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में जांच की कई खामियाँ उजागर हुई हैं, जिनके निराकरण के लिए केंद्रीय एजेंसी का हस्तक्षेप आवश्यक है। क्राइम ब्रांच को निर्देश दिया गया कि वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित मामले से संबंधित समस्त अभिलेख और साक्ष्य बिना किसी विलंब के सीबीआई को सौंपे।
23 मामलों पर रिपोर्ट तलब
खंडपीठ ने सीबीआई से उन 23 बच्चों की मौत के मामलों पर भी रिपोर्ट माँगी है, जिनका उल्लेख राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत तथ्य-विवरण में किया गया था और जिसकी पुष्टि पलक्कड़ जिला पुलिस प्रमुख अजीत कुमार ने की थी। एजेंसी को न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल करने से पूर्व राज्य पुलिस एवं जिला अधिकारियों से अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करने की अनुमति दी गई है।
गौरतलब है कि इस मामले ने एक दशक से अधिक समय में जिले भर में हुई बच्चों की मौतों की परिस्थितियों और जांच की पर्याप्तता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
बाल सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के निर्देश
जांच के आदेश के अतिरिक्त, उच्च न्यायालय ने राज्य में बाल सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने हेतु एहतियाती उपायों पर भी ध्यान दिया। केरल राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के प्रस्तावों पर विचार करते हुए न्यायालय ने केरल भर के जिला कानूनी सेवा प्राधिकरणों और तालुक कानूनी सेवा समितियों को बाल अधिकार जागरूकता, काउंसलिंग, स्कूल आउटरीच, समुदाय-आधारित निगरानी और बाल हेल्पलाइन को प्रोत्साहित करने वाले कार्यक्रम लागू करने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने मासिक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है और राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को इन उपायों का कड़ाई से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा है। इससे पहले न्यायालय ने कार्यवाही में केरल राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को इस आधार पर शामिल किया था कि कुछ सामाजिक कारक भी इन मौतों में भूमिका निभा सकते हैं।
आगे क्या होगा
इस मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को निर्धारित है। सीबीआई को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उससे पहले न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। यह मामला केरल में बाल सुरक्षा और जांच एजेंसियों की जवाबदेही के व्यापक प्रश्नों को केंद्र में ले आया है।