सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल में सीबीआई जांच का दिया आदेश, खांडू के परिवार पर आरोप
सारांश
Key Takeaways
- सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया है।
- मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़े ठेकों की जांच होगी।
- राज्य सरकार को जांच में सहयोग करने का आदेश मिला है।
- सीबीआई को 16 हफ्तों में स्थिति रिपोर्ट पेश करनी होगी।
- दस्तावेजों को नष्ट या संशोधित नहीं किया जा सकेगा।
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को अरुणाचल प्रदेश में सरकारी ठेकों में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए प्रारंभिक जांच शुरू करने का आदेश दिया है। यह मामला विशेष रूप से उन आरोपों से संबंधित है, जिनमें मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़े व्यक्तियों को ठेके दिए जाने का उल्लेख किया गया है।
यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया शामिल हैं, द्वारा दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि सीबीआई को दो सप्ताह के भीतर प्रारंभिक जांच दर्ज करनी होगी और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करनी चाहिए।
कोर्ट ने यह भी बताया कि जांच का दायरा 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 के बीच दिए गए सरकारी ठेकों, वर्क ऑर्डर और उनके क्रियान्वयन तक सीमित रहेगा। हालांकि, अगर आवश्यक हो, तो सीबीआई इस समय सीमा के बाहर के लेन-देन की भी जांच कर सकती है, खासकर यह जानने के लिए कि असली लाभार्थी कौन हैं और पैसे का प्रवाह किस प्रकार हुआ।
यह मामला दो गैर-सरकारी संगठनों, सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) के माध्यम से सामने आया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि लगभग 1270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके ऐसे व्यक्तियों को दिए गए हैं जो मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि कई ठेके नियमों की अनदेखी करके दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई मामलों में खुले टेंडर की प्रक्रिया को अपनाया नहीं गया, जो कि पारदर्शिता के खिलाफ है।
कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह टेंडर प्रक्रिया, मंजूरी देने के तरीके, ओपन टेंडर से छूट के कारणों और कानूनी नियमों के पालन की पूरी जांच करे। साथ ही भुगतान, वर्क ऑर्डर और प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन से संबंधित सभी दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सीबीआई को 16 हफ्तों के भीतर एक स्थिति रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिसमें यह बताया जाएगा कि क्या इस मामले में पूरी तरह से स्वतंत्र और विस्तृत जांच की आवश्यकता है या नहीं।
राज्य सरकार को भी इस जांच में पूर्ण सहयोग देने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो सीबीआई के साथ समन्वय करेगा। साथ ही सभी आवश्यक दस्तावेज जैसे टेंडर पेपर, मंजूरी से संबंधित रिकॉर्ड, एग्रीमेंट, बिल और ई-प्रोक्योरमेंट डेटा चार सप्ताह के भीतर सीबीआई को सौंपे जाने होंगे।
सबसे महत्वपूर्ण यह है कि कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस मामले से संबंधित किसी भी दस्तावेज को, चाहे वे कागज़ पर हों या डिजिटल रूप में, न तो नष्ट किया जाए और न ही उनमें कोई संशोधन किया जाए।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि उसके ये निर्देश केवल यह तय करने के लिए हैं कि स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है या नहीं। इसका अर्थ यह नहीं है कि कोर्ट ने किसी भी आरोप को सही या गलत ठहराया है और न ही यह भविष्य की कार्रवाई में किसी भी व्यक्ति को प्रभावित करेगा।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश सरकार को सभी ठेकों पर विस्तृत हलफनामा देने और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से रिपोर्ट भी मांगी थी। बाद में दिसंबर 2025 में जांच का दायरा बढ़ाकर पूरे राज्य तक कर दिया गया क्योंकि मामला केवल तवांग तक सीमित नहीं था।