सुप्रीम कोर्ट का आदेश: अरुणाचल में ठेके जांच के लिए सीबीआई को निर्देश
सारांश
Key Takeaways
- सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया है।
- मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़े ठेकों की जांच होगी।
- सीबीआई को दो हफ्तों में प्रारंभिक जांच शुरू करनी है।
- राज्य सरकार को सहयोग देने का आदेश दिया गया है।
- दस्तावेजों को नष्ट या बदला नहीं जा सकता।
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को अरुणाचल प्रदेश में सरकारी ठेकों में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए प्रारंभिक जांच आरंभ करने का आदेश दिया है। इस मामले में खासतौर पर मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार के सदस्यों से जुड़े ठेकों पर आरोप लगाए गए हैं।
यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया शामिल थे, द्वारा जारी किया गया। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सीबीआई दो हफ्तों के भीतर प्रारंभिक जांच शुरू करे और आगे की कानूनी कार्रवाई करे।
कोर्ट ने यह भी बताया कि जांच का दायरा 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 के बीच दिए गए सरकारी ठेकों, वर्क ऑर्डर और उनके क्रियान्वयन तक सीमित रहेगा। यदि आवश्यक हो, तो सीबीआई इस समय सीमा के बाहर के लेन-देन की भी जांच कर सकती है ताकि वास्तविक लाभार्थियों, उनके संबंधों और वित्तीय प्रवाह को समझा जा सके।
यह मामला दो गैर-सरकारी संगठनों सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) के माध्यम से सामने आया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि लगभग 1270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके उन लोगों को दिए गए हैं जो मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े हैं।
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि कई ठेके नियमों की अवहेलना करते हुए दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में पारदर्शिता के खिलाफ खुले टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह टेंडर प्रक्रिया, मंजूरी के तरीके, ओपन टेंडर से छूट देने के कारणों और कानूनी नियमों के पालन की पूरी जांच करे। इसके साथ ही, सभी संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि सीबीआई को 16 हफ्तों के भीतर एक स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें यह बताया जाएगा कि क्या इस मामले में स्वतंत्र और विस्तृत जांच की आवश्यकता है या नहीं।
राज्य सरकार को भी इस जांच में पूर्ण सहयोग देने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि एक हफ्ते के भीतर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो सीबीआई के साथ समन्वय करेगा। सभी आवश्यक दस्तावेज जैसे टेंडर पेपर, मंजूरी से जुड़े रिकॉर्ड, एग्रीमेंट, बिल और ई-प्रोक्योरमेंट डेटा चार हफ्तों के भीतर सीबीआई को सौंपने होंगे।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस मामले से जुड़े किसी भी दस्तावेज, चाहे वे कागजी हों या डिजिटल, को न तो नष्ट किया जाए और न ही उनमें कोई परिवर्तन किया जाए।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसके ये निर्देश केवल यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है या नहीं। इसका मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने किसी भी आरोप को सही या गलत ठहराया है और न ही यह भविष्य की कार्यवाही में किसी भी व्यक्ति को प्रभावित करेगा।
गौरतलब है कि पिछले साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश सरकार को सभी ठेकों पर विस्तृत हलफनामा पेश करने और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से रिपोर्ट भी मांगी थी। बाद में दिसंबर 2025 में जांच का दायरा बढ़ाकर पूरे राज्य तक कर दिया गया, यह मानते हुए कि मामला केवल तवांग तक सीमित नहीं है।