राम जन्मभूमि ट्रस्ट की CBI जांच की मांग: सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर, वित्तीय अनियमितताओं का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय में 22 जून को एक नई जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के विरुद्ध कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के नेतृत्व वाली विशेष जांच टीम (SIT) से कराने की मांग की गई है। यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत वकीलों अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने दायर की है, जिसमें एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, मीडिया रिपोर्टों और सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह आशंका जताई गई है कि राम मंदिर निर्माण और प्रशासन के लिए देशभर से प्राप्त दान की राशि के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं, हेराफेरी और कथित गबन हो सकता है। याचिका में कहा गया है कि इन कथित गड़बड़ियों से करोड़ों भक्तों के विश्वास पर सीधा असर पड़ता है।
गौरतलब है कि यह याचिका ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी पहले से जांच कर रही है। याचिकाकर्ताओं ने इस राज्य एसआईटी की जांच की पर्याप्तता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उसके अधिकार और दायरा स्पष्ट नहीं हैं।
CBI जांच की मांग क्यों
याचिका में तर्क दिया गया है कि इस प्रकार की जटिल वित्तीय जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञता, तकनीकी क्षमता और एक व्यापक जांच ढांचे की आवश्यकता होती है, जो एक सामान्य प्रशासनिक एसआईटी के पास उपलब्ध नहीं हो सकती। याचिकाकर्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान जांच एफआईआर दर्ज किए बिना शुरू की गई है, जिससे भविष्य में साक्ष्यों की कानूनी वैधता प्रभावित हो सकती है और महत्वपूर्ण प्रमाण नष्ट होने का जोखिम बना रहता है।
याचिका में तिरुपति तिरुमला देवस्थानम लड्डू विवाद का उदाहरण प्रस्तुत किया गया है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने पहले भी CBI के नेतृत्व वाली SIT जांच का आदेश दिया था। इसे एक मिसाल के रूप में उद्धृत करते हुए याचिकाकर्ताओं ने समान न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है।
पारदर्शिता और निगरानी की मांग
याचिका में सर्वोच्च न्यायालय से यह भी अनुरोध किया गया है कि ट्रस्ट, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को दान तथा संपत्तियों के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु मजबूत निगरानी और ऑडिट प्रणाली स्थापित करने का निर्देश दिया जाए।
अंतरिम राहत की मांग
अंतरिम उपाय के रूप में याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि ट्रस्ट के सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड — जिनमें दान रजिस्टर, बैंक खाते, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल डेटा शामिल हैं — को तत्काल सुरक्षित किया जाए और उनमें किसी भी प्रकार का फेरबदल रोका जाए। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय की आगामी सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी होंगी।