राम मंदिर दान विवाद: धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे ने SIT पर उठाए सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या में राम मंदिर दान विवाद को लेकर विरोध की आवाज़ें तेज़ होती जा रही हैं। पूर्व कारसेवक और धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे ने 26 जून 2026 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, पुलिस प्रशासन और विशेष जांच दल (SIT) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मामले में मुख्य आरोपियों को बचाने और छोटे लोगों को फंसाने की कोशिश की जा रही है।
शिकायत पर कार्रवाई न होने का आरोप
संतोष दुबे ने कहा कि उन्होंने 16 जून को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी, परंतु उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनके अनुसार, बाद में किसी अन्य शिकायत के आधार पर तेज़ी से एफआईआर दर्ज कर ली गई। उन्होंने कहा, 'ट्रस्ट की ओर से जो शिकायत दी गई है, वह वास्तविक घटनाक्रम के बाद सोच-समझकर तैयार की गई कार्रवाई प्रतीत होती है — यह तय करने के लिए कि किन्हें बचाना है और किन्हें आरोपी बनाना है।'
दुबे ने यह भी कहा कि उनकी शिकायत में जिन लोगों के नाम शामिल थे, उनके विरुद्ध कोई कदम नहीं उठाया गया। उनके अनुसार यदि जांच निष्पक्ष होती, तो सभी नामों की समान रूप से जांच की जाती।
SIT की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न
धर्म सेना प्रमुख ने आरोप लगाया कि जांच से जुड़ी कई जानकारियाँ पहले ही सार्वजनिक हो चुकी हैं, जिससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित हुई है। उनके अनुसार, SIT में शामिल कुछ अधिकारियों ने पहले भी मंदिर और ट्रस्ट से जुड़े विवादित मामलों की जांच की थी, लेकिन उन मामलों में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। यह स्थिति जनता के बीच संदेह उत्पन्न कर रही है।
पुराने विवादों का संदर्भ
संतोष दुबे ने राम फकीरे मंदिर से जुड़े पुराने विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मंदिर से संबंधित कुछ पुराने फैसलों और कार्रवाइयों को लेकर आज भी अनेक प्रश्न अनुत्तरित हैं। उन्होंने माँग की कि उन मामलों की भी पारदर्शी समीक्षा होनी चाहिए। उनके अनुसार, अतीत में मंदिर से जुड़े भूमि और वित्तीय मामलों पर सवाल उठे थे, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई — जिससे वर्तमान जांच की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।
स्वतंत्र जांच की माँग
दुबे ने स्पष्ट शब्दों में माँग की कि इस पूरे मामले की जांच किसी पूर्णतः स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने का प्रयास नहीं होना चाहिए और दोषी पाए जाने पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
गौरतलब है कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है, इसलिए जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग और भी प्रासंगिक हो जाती है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है।