राम मंदिर ट्रस्ट भंग कर सीबीआई जांच की मांग, धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे ने लगाए गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी और कथित अनियमितताओं के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे ने 11 जुलाई 2026 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग करने, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने और आरोपित पदाधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी सुनिश्चित करने की मांग की। दुबे का कहना है कि मौजूदा एसआईटी जांच पर करोड़ों रामभक्तों का भरोसा नहीं है।
मुख्य आरोप और मांगें
संतोष दुबे ने कहा कि वे इस मामले के पहले शिकायतकर्ता हैं, लेकिन उनकी तहरीर पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उनके अनुसार, शिकायत में गोपाल राव, चंपत राय, अनिल मिश्रा और टीन्नू यादव के नाम शामिल थे, परंतु बाद में दर्ज मुकदमे से ये नाम हटाकर अन्य लोगों के नाम जोड़ दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल छोटे आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा दिखाया जा रहा है, जबकि कथित मुख्य किरदार खुलेआम घूम रहे हैं।
एसआईटी और पुलिस पर सवाल
दुबे ने कहा कि एसआईटी स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रही और अयोध्या पुलिस भी अपनी इच्छा से जांच नहीं कर पा रही। उनके दावे के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने स्वयं उनसे कहा कि कथित रूप से प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने पर नौकरी खतरे में पड़ सकती है। यही कारण है कि वे लगातार सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।
ट्रस्ट के कथित इस्तीफे पर पारदर्शिता की मांग
ट्रस्ट सदस्यों के कथित इस्तीफों पर सवाल उठाते हुए दुबे ने कहा कि यदि इस्तीफे वास्तव में दिए गए हैं तो उनकी प्रति सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। उनका आरोप है कि जिन लोगों के इस्तीफे की चर्चा हो रही है, वे अब भी ट्रस्ट परिसर में सक्रिय दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि यह सब केवल लोगों को भ्रमित करने की कोशिश है।
मुख्यमंत्री योगी और ट्रस्ट पुनर्गठन की अपील
दुबे ने कहा कि उन्हें लगता है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार्रवाई करना चाहते हैं, लेकिन परिस्थितियाँ ऐसी हैं कि वे भी प्रभावी कदम नहीं उठा पा रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप की अपील की। साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर उसकी जगह चारों शंकराचार्यों और राम जन्मभूमि आंदोलन में शहीद कारसेवकों के परिजनों को जिम्मेदारी सौंपी जाए।
श्रद्धालुओं से अपील और बृजभूषण के बयान पर प्रतिक्रिया
दुबे ने देशभर के श्रद्धालुओं से रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या आने की अपील की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि जब तक विवाद का समाधान न हो, तब तक मंदिर में दान या चढ़ावा न चढ़ाएं। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के राम मंदिर न जाने के बयान पर वे भावुक हो गए और कहा कि यह वर्षों तक आंदोलन से जुड़े रहे लोगों की पीड़ा है। उन्होंने विनय कटियार, परमहंस रामचंद्र दास, अशोक सिंघल, रामकुमार कोठारी और शरद कोठारी जैसे आंदोलनकारियों के नाम पर अयोध्या में सड़कें और स्मारक बनाने की माँग भी उठाई। उन्होंने सवाल किया कि लता मंगेशकर चौक बन सकता है, तो राम जन्मभूमि आंदोलन के शहीदों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई। दुबे ने स्पष्ट किया कि वे इस लड़ाई को जारी रखेंगे।