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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने PIL पर तत्काल सुनवाई से किया इनकार, रजिस्ट्री करेगी सूचीबद्ध

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने PIL पर तत्काल सुनवाई से किया इनकार, रजिस्ट्री करेगी सूचीबद्ध

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की CBI-SIT जांच और साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग वाली PIL पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया। जस्टिस नागरत्ना और बागची की बेंच ने रजिस्ट्री के माध्यम से सूचीबद्ध करने का भरोसा दिया; राज्य एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा चुकी है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर दायर PIL पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया।
याचिका वकीलों अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने दाखिल की है।
याचिका में CBI नेतृत्व में SIT गठन, एफआईआर दर्ज करने और सभी साक्ष्य सुरक्षित रखने की माँग।
नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने सोमवार को अवकाशकालीन पीठ के सामने पुनः उल्लेख करने को कहा।
लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली राज्य एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी।

सर्वोच्च न्यायालय ने 26 जून 2025 को अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और गबन की जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। हालांकि, न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को आश्वस्त किया कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री इस मामले को उचित समय पर सूचीबद्ध करेगी।

याचिका में क्या है मांग

वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने यह जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के फंड में कथित हेराफेरी की एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई है। साथ ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की अगुवाई में एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का अनुरोध किया गया है, ताकि दान की राशि में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार, गबन या अनियमितता की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो सके।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी माँग की है कि बैंक खाते, दान रजिस्टर, ऑडिट रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज सहित सभी संबंधित अभिलेखों को सुरक्षित रखा जाए और किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ या उसे नष्ट करने पर तत्काल रोक लगाई जाए।

न्यायालय का रुख

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी तत्काल माँग केवल यह है कि मामले को शीघ्र सूचीबद्ध किया जाए, जिससे महत्वपूर्ण साक्ष्य सुरक्षित रह सकें। बेंच ने जल्द सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को सोमवार को अवकाशकालीन पीठ के समक्ष पुनः याचिका उल्लेख (mention) करने का निर्देश दिया। बेंच ने कहा, 'रजिस्ट्री इसे सूचीबद्ध करेगी। आपको तारीख मिल जाएगी।'

राज्य स्तर पर जांच की स्थिति

इसी बीच, लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने हाल ही में राज्य सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है। कथित तौर पर मंदिर के फंड में हेराफेरी की विस्तृत जांच अभी भी जारी है।

गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अयोध्या राम मंदिर देश के सर्वाधिक चर्चित धार्मिक और राजनीतिक विषयों में से एक बना हुआ है। मंदिर के चढ़ावे और दान-प्रबंधन में पारदर्शिता की माँग को लेकर यह पहली बार नहीं है कि न्यायिक हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई हो।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री द्वारा मामले को सूचीबद्ध किए जाने के बाद इस PIL पर नियमित सुनवाई शुरू होने की संभावना है। याचिकाकर्ता सोमवार को अवकाशकालीन पीठ के समक्ष पुनः मामला उल्लेख करेंगे। राज्य स्तरीय एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद न्यायालय की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मामला उससे कहीं बड़े सवाल उठाता है — देश के सर्वाधिक दान प्राप्त करने वाले धार्मिक स्थलों में से एक के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही का। राज्य एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट आ चुकी है, फिर भी विस्तृत जांच अधूरी है — यह अंतराल ही सबसे बड़ा सवाल है। PIL में CBI-SIT की माँग इस बात का संकेत है कि याचिकाकर्ताओं को राज्य-स्तरीय जांच की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं। न्यायालय जब भी इस मामले की सुनवाई करे, उसे साक्ष्य संरक्षण के प्रश्न को प्राथमिकता देनी होगी — क्योंकि देरी में ही सबसे बड़ा जोखिम छुपा है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद में सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सर्वोच्च न्यायालय ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। बेंच ने याचिकाकर्ताओं को रजिस्ट्री के माध्यम से मामला सूचीबद्ध कराने और सोमवार को अवकाशकालीन पीठ के समक्ष पुनः उल्लेख करने का निर्देश दिया।
राम मंदिर फंड विवाद में PIL में क्या माँगें की गई हैं?
याचिका में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के फंड में कथित हेराफेरी की एफआईआर दर्ज कराने, CBI नेतृत्व में SIT गठन और बैंक खाते, दान रजिस्टर, ऑडिट रिपोर्ट व सीसीटीवी फुटेज सहित सभी साक्ष्य सुरक्षित रखने की माँग की गई है।
राम मंदिर चढ़ावा मामले में राज्य एसआईटी की क्या स्थिति है?
लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय राज्य एसआईटी ने हाल ही में राज्य सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है। हालांकि, मंदिर के फंड में कथित हेराफेरी की विस्तृत जांच अभी भी जारी बताई जा रही है।
इस PIL की अगली सुनवाई कब होगी?
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने याचिकाकर्ताओं को सोमवार को अवकाशकालीन पीठ के समक्ष पुनः मामला उल्लेख करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री इसे नियमित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगी।
यह PIL किसने दाखिल की है और क्यों?
वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने यह PIL दाखिल की है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि अयोध्या राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और दान की राशि में कथित गड़बड़ी और गबन की निष्पक्ष जांच के लिए न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक है, और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित किया जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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