राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने PIL पर तत्काल सुनवाई से किया इनकार, रजिस्ट्री करेगी सूचीबद्ध
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 26 जून 2025 को अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और गबन की जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। हालांकि, न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को आश्वस्त किया कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री इस मामले को उचित समय पर सूचीबद्ध करेगी।
याचिका में क्या है मांग
वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने यह जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के फंड में कथित हेराफेरी की एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई है। साथ ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की अगुवाई में एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का अनुरोध किया गया है, ताकि दान की राशि में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार, गबन या अनियमितता की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो सके।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी माँग की है कि बैंक खाते, दान रजिस्टर, ऑडिट रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज सहित सभी संबंधित अभिलेखों को सुरक्षित रखा जाए और किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ या उसे नष्ट करने पर तत्काल रोक लगाई जाए।
न्यायालय का रुख
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी तत्काल माँग केवल यह है कि मामले को शीघ्र सूचीबद्ध किया जाए, जिससे महत्वपूर्ण साक्ष्य सुरक्षित रह सकें। बेंच ने जल्द सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को सोमवार को अवकाशकालीन पीठ के समक्ष पुनः याचिका उल्लेख (mention) करने का निर्देश दिया। बेंच ने कहा, 'रजिस्ट्री इसे सूचीबद्ध करेगी। आपको तारीख मिल जाएगी।'
राज्य स्तर पर जांच की स्थिति
इसी बीच, लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने हाल ही में राज्य सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है। कथित तौर पर मंदिर के फंड में हेराफेरी की विस्तृत जांच अभी भी जारी है।
गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अयोध्या राम मंदिर देश के सर्वाधिक चर्चित धार्मिक और राजनीतिक विषयों में से एक बना हुआ है। मंदिर के चढ़ावे और दान-प्रबंधन में पारदर्शिता की माँग को लेकर यह पहली बार नहीं है कि न्यायिक हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई हो।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री द्वारा मामले को सूचीबद्ध किए जाने के बाद इस PIL पर नियमित सुनवाई शुरू होने की संभावना है। याचिकाकर्ता सोमवार को अवकाशकालीन पीठ के समक्ष पुनः मामला उल्लेख करेंगे। राज्य स्तरीय एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद न्यायालय की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।