राम मंदिर चढ़ावा चोरी: सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी स्टेटस रिपोर्ट सार्वजनिक करने से इनकार, तीन हफ्ते में नई रिपोर्ट तलब
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 18 अगस्त 2025 को अयोध्या के श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की स्टेटस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि एसआईटी सीधे सुप्रीम कोर्ट के प्रति जवाबदेह है और जांच की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करना न्यायालय की प्राथमिकता है।
मुख्य घटनाक्रम
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि एसआईटी की जांच रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट में जमा कर दी गई है और एसआईटी के चेयरमैन भी सुनवाई के दौरान न्यायालय में उपस्थित थे। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने स्टेटस रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने की माँग की, जिसे पीठ ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि आपराधिक मामलों की जांच का विवरण केवल अभियोजन पक्ष और आरोपी के बीच साझा किया जाता है।
सीजेआई ने यह भी स्पष्ट किया कि एसआईटी पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कोई नियंत्रण नहीं है। उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि इस मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच हो।'
याचिकाओं में क्या माँगें हैं
सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल याचिकाओं में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से स्वतंत्र जांच कराने, भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) तथा फॉरेंसिक ऑडिटर द्वारा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन की जाँच, ट्रस्ट के सभी वित्तीय अभिलेखों को सुरक्षित रखने और जांच पूर्ण होने तक बड़े वित्तीय निर्णयों पर रोक लगाने की माँग की गई है।
याचिकाकर्ता सुधाकर सिंह के वकील सत्यम सिंह राजपूत ने कहा कि मंदिर में अब तक प्राप्त दान की राशि सार्वजनिक रूप से प्रकाशित की जाए। उन्होंने यह भी बताया कि एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा तैयार रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील ने यहाँ तक कहा कि उन्हें इस मामले में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) की विषय-वस्तु तक उपलब्ध नहीं कराई गई है।
एसआईटी की जवाबदेही पर न्यायालय का रुख
सीजेआई सूर्यकांत ने रेखांकित किया कि इस मामले में एसआईटी का गठन स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने किया है, इसलिए वह न्यायालय के प्रति जवाबदेह है, न कि किसी अन्य पक्ष के प्रति। न्यायालय ने सभी पक्षकारों को निर्देश दिया कि वे एसआईटी जांच से संबंधित अपने सुझाव सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को सौंपें और सरकार उन पर गंभीरता से विचार करे।
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पिछले आदेश में एसआईटी में एक फॉरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करने का निर्देश दिया था। इस संदर्भ में सॉलिसिटर जनरल ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि तीन सप्ताह के भीतर एक नई और अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
निर्मोही अखाड़े को निर्देश
पीठ ने निर्मोही अखाड़े को भी स्पष्ट निर्देश दिया कि वह अपनी हस्तक्षेप याचिका में मौजूद कमियाँ दूर करे। न्यायालय ने कहा कि इस मामले में हस्तक्षेप याचिका का औचित्य नहीं है और यदि अखाड़े को कोई आपत्ति है तो वह अलग से याचिका दाखिल कर सकता है।
आगे क्या होगा
अब इस मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी, जब एसआईटी नई स्टेटस रिपोर्ट और फॉरेंसिक ऑडिट की प्रगति से न्यायालय को अवगत कराएगी। यह मामला धार्मिक संस्थाओं के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता की व्यापक बहस के बीच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में है, और अगली सुनवाई में एसआईटी की कार्यप्रणाली पर और अधिक स्पष्टता आने की संभावना है।