27 जुलाई 2026
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी में फोरेंसिक व ऑडिट विशेषज्ञ जोड़ने का आदेश दिया

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी में फोरेंसिक व ऑडिट विशेषज्ञ जोड़ने का आदेश दिया

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यूपी सरकार की एसआईटी को महज पुलिसिया जांच तक सीमित नहीं रहने दिया — फोरेंसिक और ऑडिट विशेषज्ञों को शामिल करने का आदेश देकर अदालत ने संकेत दिया कि वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना इस जांच की केंद्रीय शर्त है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 27 जुलाई 2026 को अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी में फोरेंसिक व ऑडिट विशेषज्ञ शामिल करने का आदेश दिया।
एसआईटी को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
वर्तमान एसआईटी में आईजी, डीआईजी, एसएसपी और अतिरिक्त एसएसपी स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह समेत याचिकाकर्ताओं ने राम मंदिर दान कोष की स्वतंत्र जांच की माँग की है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि नई एसआईटी गठित होकर जांच की जिम्मेदारी संभाल चुकी है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 27 जुलाई 2026 को अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के कथित मामले में जांच को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए निर्णायक हस्तक्षेप किया। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) में फोरेंसिक विशेषज्ञ तथा फोरेंसिक ऑडिट एवं लेखा क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल करने का स्पष्ट निर्देश दिया और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

मुख्य घटनाक्रम

सुनवाई के दौरान भारत के सॉलिसिटर जनरल ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से नवगठित एसआईटी के सदस्यों की सूची अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। इस दल में इंस्पेक्टर जनरल (आईजी), डीआईजी, एसएसपी और अतिरिक्त एसएसपी स्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल किए गए हैं। अदालत ने सूची की समीक्षा करने के बाद यह स्पष्ट किया कि केवल पुलिस अधिकारियों से जांच पर्याप्त नहीं होगी — वित्तीय अनियमितताओं की गहन पड़ताल के लिए विशेष तकनीकी दक्षता आवश्यक है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता वरुण सिन्हा ने बताया कि वे नरेंद्र कुमार गोस्वामी से जुड़े मामले में हस्तक्षेपकर्ता सतीश कुमार अग्रवाल की ओर से उपस्थित हुए। उन्होंने कहा, 'अदालत ने एसआईटी की संरचना पर विचार किया और जांच को और मज़बूत बनाने के लिए विशेषज्ञों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।'

याचिका में क्या माँगा गया है

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद सुधाकर सिंह समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अजय राय, वरुण सिन्हा और सत्यम सिंह राजपूत ने न्यायालय को बताया कि याचिका में राम मंदिर के दान कोष के उपयोग और कथित वित्तीय गड़बड़ियों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने कहा, 'याचिकाकर्ताओं की ओर से कई अन्य मांगें भी अदालत के समक्ष रखी गई थीं, जिन पर आगे की सुनवाई में विचार किया जा सकता है।' याचिकाकर्ता अजय कुमार राय ने कहा कि अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि दान से जुड़े वित्तीय लेनदेन और रिकॉर्ड की जांच वैज्ञानिक और पेशेवर तरीके से हो।

सरकार की स्थिति

उत्तर प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि वरिष्ठ अधिकारियों की नई एसआईटी गठित कर दी गई है और उसने जांच की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है। गौरतलब है कि यह मामला तब सुर्खियों में आया जब अयोध्या के राम मंदिर परिसर में चढ़ावे से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए, जिसके बाद न्यायालय में याचिकाएँ दाखिल की गईं।

आगे क्या होगा

अदालत के निर्देशानुसार एसआईटी को अब अपनी संरचना में फोरेंसिक और ऑडिट विशेषज्ञों को जोड़ना होगा और दो सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यह मामला न केवल एक धार्मिक स्थल की वित्तीय पारदर्शिता का प्रश्न है, बल्कि यह भी तय करेगा कि देश के सबसे चर्चित मंदिरों में से एक के प्रशासनिक ढाँचे की जवाबदेही किस स्तर पर सुनिश्चित होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली सवाल यह है कि क्या एसआईटी को जांच में पूर्ण स्वायत्तता मिलेगी, या राज्य सरकार के नियंत्रण में रहने से निष्पक्षता पर सवाल उठते रहेंगे। मंदिर जैसी संवेदनशील धार्मिक संस्था के वित्तीय प्रबंधन की जाँच में पारदर्शिता न केवल कानूनी अनिवार्यता है, बल्कि सार्वजनिक विश्वास की भी शर्त है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 27 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी में फोरेंसिक विशेषज्ञ और फोरेंसिक ऑडिट व लेखा क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल करने का आदेश दिया। साथ ही दो सप्ताह के भीतर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया।
एसआईटी में अभी कौन-कौन से अधिकारी हैं?
उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि एसआईटी में आईजी, डीआईजी, एसएसपी और अतिरिक्त एसएसपी स्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल किए गए हैं। अदालत ने इस संरचना को अपर्याप्त मानते हुए तकनीकी विशेषज्ञों को जोड़ने का निर्देश दिया।
इस मामले में याचिकाकर्ता कौन हैं और उनकी मांग क्या है?
आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने राम मंदिर के दान कोष के उपयोग और कथित वित्तीय गड़बड़ियों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका प्रतिनिधित्व अधिवक्ता अजय राय, वरुण सिन्हा और सत्यम सिंह राजपूत कर रहे हैं।
फोरेंसिक ऑडिट विशेषज्ञ को एसआईटी में शामिल करना क्यों ज़रूरी माना गया?
अदालत ने माना कि राम मंदिर के दान से जुड़े वित्तीय लेनदेन और रिकॉर्ड की जांच के लिए वैज्ञानिक और पेशेवर दृष्टिकोण आवश्यक है, जो केवल पुलिस अधिकारियों के पास नहीं होता। फोरेंसिक ऑडिट विशेषज्ञ वित्तीय दस्तावेजों की गहन पड़ताल करने में सक्षम होते हैं।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
एसआईटी को दो सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी है, जिसके बाद अगली सुनवाई निर्धारित होगी। याचिकाकर्ताओं की शेष मांगों पर भी आगे की सुनवाई में विचार किए जाने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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