राम जन्मभूमि ट्रस्ट चढ़ावा गड़बड़ी: सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को करेगा सुनवाई, CBI जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय 13 जुलाई 2025 (सोमवार) को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावे की धनराशि में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी.एस. मोहना भी शामिल हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
सर्वोच्च न्यायालय में दो अलग-अलग याचिकाएँ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। पहली जनहित याचिका अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने दायर की है, जबकि दूसरी याचिका राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह की ओर से दाखिल है। दोनों याचिकाओं में ट्रस्ट की दान-राशि में कथित गड़बड़ी, गबन और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं की प्रमुख मांगें
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया है कि संबंधित अधिकारियों को प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही, मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की अगुवाई में एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की भी माँग की गई है।
इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ताओं ने यह भी अपील की है कि जांच पूरी होने तक बैंक खातों का विवरण, दान रजिस्टर, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, कंप्यूटर डेटा और अन्य संबंधित अभिलेखों को सुरक्षित रखा जाए। किसी भी दस्तावेज़ या साक्ष्य को नष्ट करने, हटाने अथवा उसमें छेड़छाड़ करने पर तत्काल रोक लगाने की भी माँग की गई है।
ऑडिट और निगरानी व्यवस्था की माँग
याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय से यह भी अनुरोध किया है कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश सरकार को ट्रस्ट की धनराशि और संपत्तियों की निगरानी के लिए एक सुदृढ़ ऑडिट एवं जांच प्रणाली विकसित करने का निर्देश दिया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की शिकायतों की पुनरावृत्ति न हो।
इस्तीफे और गिरफ्तारियाँ
गौरतलब है कि राम मंदिर ट्रस्ट की एक बैठक के बाद ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की जानकारी भी सामने आई थी। वहीं, अयोध्या पुलिस ने इस मामले में कई व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है और जांच अभी जारी बताई जा रही है। यह मामला ऐसे समय में सुर्खियों में है जब देश के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से एक की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
आगे क्या होगा
13 जुलाई की सुनवाई में पीठ यह तय करेगी कि याचिकाओं पर आगे नोटिस जारी किया जाए या नहीं। यदि न्यायालय CBI-SIT जांच का आदेश देता है, तो यह राम जन्मभूमि ट्रस्ट के प्रशासनिक ढाँचे और वित्तीय जवाबदेही पर बड़ा असर डाल सकता है।