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राम मंदिर दान अनियमितता: SIT जांच शुरू, सुप्रीम कोर्ट में CBI जांच की अपील; कालका जी मंदिर सेक्रेटरी ने की निंदा

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राम मंदिर दान अनियमितता: SIT जांच शुरू, सुप्रीम कोर्ट में CBI जांच की अपील; कालका जी मंदिर सेक्रेटरी ने की निंदा

सारांश

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है। SIT जांच शुरू होने के बावजूद FIR न होने पर सवाल उठ रहे हैं। कालका जी मंदिर के सेक्रेटरी सिद्धार्थ भारद्वाज ने अनियमितता की कड़ी निंदा करते हुए कठोर कार्रवाई की माँग की है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर चढ़ावा अनियमितता की जाँच के लिए SIT गठित की, जांच 15 जून 2025 से शुरू।
कालका जी मंदिर के सेक्रेटरी सिद्धार्थ भारद्वाज ने गड़बड़ी की निंदा की और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की माँग की।
एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अनूप प्रकाश अवस्थी ने सर्वोच्च न्यायालय में CBI जाँच की माँग वाली याचिका दायर की।
आलोचकों ने अब तक कोई औपचारिक FIR दर्ज न होने पर संस्थागत पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होने के कारण धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है।

राम मंदिर, अयोध्या में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने 15 जून 2025 को औपचारिक रूप से काम शुरू कर दिया है। इस मामले ने देश-विदेश में करोड़ों श्रद्धालुओं के बीच गहरी चिंता उत्पन्न की है, और अब यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच गया है।

कालका जी मंदिर सेक्रेटरी की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली स्थित कालका जी मंदिर के सेक्रेटरी सिद्धार्थ भारद्वाज ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 'राम मंदिर जैसे पवित्र स्थान, जो दुनिया भर के लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना, वहाँ अगर कोई घोटाला या घपला सामने आता है तो हम उसकी निंदा करते हैं।'

भारद्वाज ने आगे कहा कि SIT का गठन सकारात्मक कदम है और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही सच्चाई सामने आएगी। उनके अनुसार, 'यह हिंदुओं की आस्था का विषय है। रामजन्मभूमि से लोगों की आत्मा जुड़ी हुई है। वहाँ गड़बड़ी करने वालों पर जल्द कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए ताकि देश में ऐसा संदेश जाए कि घपला करने का अंजाम क्या हो सकता है।'

सर्वोच्च न्यायालय में याचिका

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अनूप प्रकाश अवस्थी ने सर्वोच्च न्यायालय में एक अर्जी दायर की है। इस याचिका में माँग की गई है कि सर्वोच्च न्यायालय की सीधी निगरानी में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) जैसी किसी स्वतंत्र एवं प्रमुख जाँच एजेंसी से जाँच कराने का आदेश दिया जाए।

याचिका में यह भी कहा गया है कि राम मंदिर के दान में कथित अनियमितताओं, हेराफेरी या धनराशि के गायब होने की खबरों से देश-विदेश में श्रद्धालुओं की भावनाएँ आहत हुई हैं। आलोचकों का कहना है कि यद्यपि योगी आदित्यनाथ सरकार ने SIT बनाई है, परंतु अब तक कोई औपचारिक FIR दर्ज न होने और आपराधिक जाँच न शुरू होने से संस्थागत प्रतिक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से यह मंदिर देश के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक बन गया है, जहाँ प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन करते हैं और बड़ी मात्रा में दान-चढ़ावा चढ़ाते हैं। ऐसे में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की खबरें न केवल प्रशासनिक बल्कि धार्मिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत संवेदनशील हैं।

सिद्धार्थ भारद्वाज ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय को पत्र भेजा गया है और उन्हें योगी सरकार तथा न्यायपालिका दोनों पर भरोसा है कि न्याय अवश्य होगा।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें सर्वोच्च न्यायालय पर टिकी हैं, जहाँ CBI जाँच की माँग वाली याचिका पर सुनवाई होनी है। साथ ही, SIT की जाँच रिपोर्ट और उत्तर प्रदेश सरकार की अगली कार्रवाई पर भी देश की नज़र रहेगी। यह मामला आस्था, जवाबदेही और संस्थागत पारदर्शिता के व्यापक सवालों को उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास पर प्रहार है। SIT गठन सकारात्मक है, परंतु FIR के बिना जाँच की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न स्वाभाविक है — पारदर्शिता के लिए स्वतंत्र एजेंसी की माँग इसीलिए उठ रही है। यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठे हों; तिरुपति और शिरडी के मामले भी संस्थागत जवाबदेही की कमज़ोरी उजागर कर चुके हैं। बिना सत्यापन-योग्य ऑडिट ढाँचे और FIR के, SIT की रिपोर्ट चाहे जो कहे, संदेह का धुआँ बना रहेगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर दान अनियमितता मामला क्या है?
राम मंदिर, अयोध्या में चढ़ावे की धनराशि में कथित हेराफेरी और अनियमितता की खबरें सामने आई हैं, जिससे देश-विदेश के श्रद्धालुओं में चिंता फैली है। इस मामले की जाँच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT गठित की है।
SIT का गठन क्यों किया गया और इसकी जाँच कहाँ तक पहुँची है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जाँच के लिए SIT बनाई है और 15 जून 2025 से जाँच औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि अब तक कोई FIR दर्ज नहीं हुई है, जिससे जाँच की स्वतंत्रता पर सवाल उठते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में क्या याचिका दायर हुई है?
एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अनूप प्रकाश अवस्थी ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर माँग की है कि CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी से सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में जाँच कराई जाए। याचिका में कहा गया है कि SIT की जाँच पर्याप्त नहीं है और संस्थागत पारदर्शिता के लिए उच्च स्तरीय जाँच ज़रूरी है।
कालका जी मंदिर के सेक्रेटरी ने इस मामले पर क्या कहा?
दिल्ली के कालका जी मंदिर के सेक्रेटरी सिद्धार्थ भारद्वाज ने इस अनियमितता की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि रामजन्मभूमि से करोड़ों लोगों की आत्मा जुड़ी है और दोषियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि देश में उचित संदेश जाए।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
अब सर्वोच्च न्यायालय में CBI जाँच की याचिका पर सुनवाई होनी है, जबकि SIT की जाँच भी जारी है। उत्तर प्रदेश सरकार और न्यायपालिका दोनों की कार्रवाई पर करोड़ों श्रद्धालुओं की नज़र टिकी है।
राष्ट्र प्रेस
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