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राम जन्मभूमि ट्रस्ट में वित्तीय गड़बड़ी की CBI-SIT जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

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राम जन्मभूमि ट्रस्ट में वित्तीय गड़बड़ी की CBI-SIT जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

सारांश

राम जन्मभूमि ट्रस्ट के धन में कथित गड़बड़ी का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय पहुँच गया है। अधिवक्ताओं ने CBI-SIT जांच और FIR की माँग की है। SIT रिपोर्ट सार्वजनिक हो चुकी है, चंपत राय व अनिल मिश्रा के इस्तीफे और अयोध्या में गिरफ्तारियों के बीच यह विवाद गहराता जा रहा है।

मुख्य बातें

अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने 8 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की।
याचिका में CBI की अगुवाई में SIT गठन और FIR दर्ज करने का निर्देश माँगा गया है।
SIT रिपोर्ट पहले ही सार्वजनिक हो चुकी है; चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की जानकारी सामने आई है।
अयोध्या पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है।
अयोध्या के वकीलों ने FIR न दर्ज होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
याचिका में बैंक खाते, दान रजिस्टर, ऑडिट रिपोर्ट, CCTV फुटेज सहित सभी अभिलेख सुरक्षित रखने की माँग भी की गई है।

सर्वोच्च न्यायालय में 8 जुलाई 2026 को एक याचिका दाखिल कर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के धन के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। यह याचिका अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की ओर से दायर की गई है, जिसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की अगुवाई में एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का अनुरोध किया गया है।

याचिका में क्या मांगा गया है

याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि ट्रस्ट के धन में कथित गड़बड़ी के आरोपों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। इसके साथ ही मांग की गई है कि CBI की अगुवाई में SIT का गठन कर मामले की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दान में प्राप्त धनराशि में किसी प्रकार का गबन, गड़बड़ी या भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं।

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश सरकार को ट्रस्ट की धनराशि एवं संपत्तियों की निगरानी के लिए सशक्त ऑडिट और जांच व्यवस्था स्थापित करने का निर्देश दिया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की शिकायतें दोबारा न उठें।

अभिलेखों की सुरक्षा की मांग

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि जांच पूरी होने तक सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। इनमें बैंक खातों का विवरण, दान रजिस्टर, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, कंप्यूटर डेटा और अन्य संबंधित अभिलेख शामिल हैं। साथ ही यह भी माँगा गया है कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को इन साक्ष्यों को नष्ट करने, हटाने या उनमें छेड़छाड़ करने से रोका जाए।

मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि इस मामले में SIT की रिपोर्ट पहले ही सार्वजनिक की जा चुकी है। राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की जानकारी सामने आई। अयोध्या पुलिस ने इस सिलसिले में कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है और जांच जारी है।

यह ऐसे समय में आया है जब अयोध्या के वकील इस बात पर नाराज हैं कि उनकी शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की जा रही। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।

आम जनता और दानदाताओं पर असर

यह मामला उन लाखों श्रद्धालुओं और दानदाताओं के लिए महत्वपूर्ण है जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए स्वेच्छा से धनराशि दान की थी। आलोचकों का कहना है कि धार्मिक ट्रस्टों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना न केवल कानूनी बल्कि नैतिक दायित्व भी है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा याचिका पर सुनवाई की तारीख अभी तय होनी है। यदि न्यायालय याचिका स्वीकार करता है, तो CBI-SIT जांच का आदेश इस पूरे विवाद को एक नई दिशा दे सकता है। अयोध्या के वकीलों की FIR की माँग और ट्रस्ट के भीतर हुए इस्तीफों के मद्देनज़र यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इस्तीफे हो चुके हैं और गिरफ्तारियाँ भी — फिर भी स्थानीय FIR की राह अटकी हुई है। यह विरोधाभास बताता है कि जांच की इच्छाशक्ति और उसका क्रियान्वयन अलग-अलग दिशाओं में चल रहे हैं। राम मंदिर निर्माण के लिए करोड़ों श्रद्धालुओं ने दान दिया था — उनकी आस्था और धनराशि दोनों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच ही एकमात्र रास्ता है जो इस विवाद को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठाकर तथ्यात्मक निष्कर्ष तक पहुँचा सकती है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम जन्मभूमि ट्रस्ट में कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला क्या है?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर आरोप है कि दान में प्राप्त धनराशि का दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताएँ हुई हैं। इस मामले में SIT रिपोर्ट सार्वजनिक हो चुकी है, ट्रस्ट के दो पदाधिकारियों के इस्तीफे सामने आए हैं और अयोध्या पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में क्या माँगा गया है?
याचिका में CBI की अगुवाई में SIT गठन, FIR दर्ज करने का निर्देश, सभी संबंधित अभिलेखों की सुरक्षा और ट्रस्ट की धनराशि की निगरानी के लिए मजबूत ऑडिट व्यवस्था बनाने का अनुरोध किया गया है। यह याचिका अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने दाखिल की है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे का इस मामले से क्या संबंध है?
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की जानकारी सामने आई, जो इस विवाद के बीच ट्रस्ट के भीतर बड़े बदलाव का संकेत है। हालाँकि इस्तीफों और कथित वित्तीय अनियमितताओं के बीच सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
अयोध्या के वकील इस मामले में नाराज क्यों हैं?
अयोध्या के वकीलों का कहना है कि उनकी शिकायत के बावजूद FIR दर्ज नहीं की जा रही। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा याचिका पर सुनवाई की तारीख तय होनी बाकी है। यदि न्यायालय याचिका स्वीकार करता है और CBI-SIT जांच का आदेश देता है, तो यह मामला एक निर्णायक मोड़ ले सकता है। अयोध्या पुलिस की जांच भी समानांतर जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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