राम मंदिर दान घोटाले पर आचार्य प्रमोद कृष्णम की माँग: CBI जांच हो, पूरा ट्रस्ट इस्तीफा दे
सारांश
मुख्य बातें
कल्कि धाम के पीठाधीश्वर और धार्मिक नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 27 जून 2026 को गाजियाबाद में राम मंदिर दान में कथित अनियमितता के मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से निष्पक्ष जांच की माँग की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल इस्तीफा देना पर्याप्त नहीं — यह विवाद करोड़ों राम भक्तों की आस्था और विश्वास पर सीधा आघात है।
मामले की गंभीरता
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि राम मंदिर से जुड़ा यह विवाद महज आर्थिक अनियमितता का प्रश्न नहीं है। उनके अनुसार, भगवान श्रीराम से जुड़ी करोड़ों लोगों की भावना और श्रद्धा को इस कथित घोटाले ने आहत किया है। उन्होंने कहा, 'यदि दान राशि में किसी प्रकार का घोटाला या चोरी हुई है तो यह घोर पाप है।'
जांच को लेकर उठाए सवाल
आचार्य कृष्णम ने पूछा कि कथित घोटाले में शामिल लोगों की मदद किसने की, धनराशि कहाँ गई और इसके पीछे कौन-कौन लोग हैं — ये सवाल आज भी राम भक्तों के मन में हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इन प्रश्नों का उत्तर तभी मिलेगा जब जांच किसी ऐसी एजेंसी को सौंपी जाए जिस पर सभी पक्षों को भरोसा हो।
ट्रस्ट के सदस्यों से नैतिक जिम्मेदारी की अपील
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संदर्भ में उन्होंने कहा कि जब तक जांच पूरी न हो, ट्रस्ट के सभी सदस्यों को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से हट जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि केवल कुछ लोगों को दोषी ठहराकर बाकी को क्लीन चिट दी गई, तो जांच की विश्वसनीयता पर संदेह बना रहेगा।
प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप का आग्रह
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा आग्रह किया कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर जांच CBI को सौंपने के निर्देश दें। उन्होंने कहा कि देश की जनता को विश्वास है कि मोदी के रहते राम मंदिर से जुड़े किसी कथित घोटाले में दोषी व्यक्ति बच नहीं सकता।
विपक्ष पर भी साधा निशाना
विपक्षी दलों पर टिप्पणी करते हुए आचार्य कृष्णम ने कहा कि समाजवादी पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और अन्य विपक्षी दलों का राम मंदिर की आस्था से कभी कोई संबंध नहीं रहा। उन्होंने कहा कि विपक्ष को इस मसले पर राजनीतिक अवसर न मिले, इसीलिए भी ट्रस्ट को पारदर्शी जांच का रास्ता खोलना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर निर्माण के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पहली बार इस स्तर पर सार्वजनिक जाँच के दायरे में आई है।