राम मंदिर दान विवाद: खरगे ने राज्यसभा में PM मोदी से माँगा जवाब, संसद में चर्चा की माँग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 4 अगस्त को राज्यसभा में अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त दान और चढ़ावे के कथित दुरुपयोग के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा जवाब माँगा। उन्होंने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा संवेदनशील मामला बताते हुए संसद में विस्तृत चर्चा कराने की माँग की।
मुख्य आरोप और खरगे का तर्क
खरगे ने सदन में कहा कि राम मंदिर से जुड़े कीमती चढ़ावे, नकद दान और भूमि लेनदेन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया था और इसकी घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में की थी। इसके अलावा ट्रस्ट को 70 एकड़ से अधिक भूमि भी हस्तांतरित की गई थी। उनका तर्क था कि प्रधानमंत्री ने भूमि पूजन से लेकर प्राण प्रतिष्ठा तक के प्रमुख कार्यक्रमों में भाग लिया, इसलिए वे जवाबदेही से नहीं बच सकते।
केंद्रीय जाँच एजेंसियों पर सवाल
खरगे ने यह भी पूछा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों ने इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि 'भगवान श्रीराम के नाम पर लूट' करने वालों को देश से माफी माँगनी चाहिए और जनता को गुमराह करना बंद करना चाहिए। इस बयान पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने तीखा विरोध जताया, जिससे सदन में कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई।
सभापति और लोकसभा अध्यक्ष को पत्र
संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में खरगे ने बताया कि विपक्ष ने राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर राम मंदिर दान विवाद तथा छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई पर संबंधित नियमों के तहत चर्चा कराने की माँग की है। उन्होंने कहा कि संसद में चर्चा होने से सच्चाई देश के सामने आएगी, परंतु केंद्र सरकार इस पर बहस से बचना चाहती है।
अमित शाह पर भी निशाना
खरगे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी आरोप लगाया कि उनका बार-बार सदन से अनुपस्थित रहना या तो सवालों का सामना करने के डर को दर्शाता है या संसदीय परंपराओं के प्रति उदासीनता को। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद को सुचारु रूप से चलाने का एकमात्र तरीका यह है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में आकर अपना पक्ष रखें।
आगे क्या होगा
खरगे के इस हमले के बाद मानसून सत्र के दौरान राम मंदिर दान विवाद को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के आसार हैं। सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सहमत होगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है — लेकिन विपक्ष का दबाव मानसून सत्र के शेष दिनों में बना रहने की संभावना है।