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राम मंदिर दान चोरी विवाद: राहुल-खड़गे के पत्र पर एनडीए का पलटवार, कांग्रेस बोली- जवाबदेही माँगना संवैधानिक कर्तव्य

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राम मंदिर दान चोरी विवाद: राहुल-खड़गे के पत्र पर एनडीए का पलटवार, कांग्रेस बोली- जवाबदेही माँगना संवैधानिक कर्तव्य

सारांश

अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले पर राहुल गांधी और खड़गे के पत्र ने नई सियासी जंग छेड़ दी है। एनडीए ने इसे राजनीतिक ड्रामा बताया, तो विपक्ष ने जवाबदेही माँगने को संवैधानिक कर्तव्य कहा। एसआईटी जाँच जारी है, 7-8 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।

मुख्य बातें

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने 19 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में स्वतंत्र जाँच की माँग की।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दान खातों का सार्वजनिक लेखा-जोखा सामने लाने की माँग की गई।
एसआईटी जाँच पहले से जारी है; अब तक 7 से 8 आरोपी गिरफ्तार , प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है।
भाजपा और शिवसेना ने कांग्रेस पर राजनीतिक ड्रामे का आरोप लगाया।
शिवसेना (यूबीटी) ने सीबीआई जाँच की माँग दोहराई; राजद ने विपक्ष की जवाबदेही माँग को संवैधानिक जिम्मेदारी बताया।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में स्वतंत्र जाँच की माँग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखे जाने के बाद 19 जुलाई को राजनीतिक टकराव तेज हो गया। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी इंडिया गठबंधन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि इस मामले में गठित विशेष जाँच दल (एसआईटी) अपनी कार्रवाई में जुटा हुआ है।

विपक्ष की माँग: क्या कहा राहुल-खड़गे ने

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने संयुक्त पत्र में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने माँग की कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद, सोना, चाँदी और अन्य दान का पूरा सार्वजनिक लेखा-जोखा सामने लाया जाए। दोनों नेताओं ने राजनीतिक प्रभाव से परे निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने की अपील की।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने विपक्ष के रुख का बचाव करते हुए कहा कि अयोध्या राम मंदिर में कथित दान चोरी पूरे देश के लिए दुखद और शर्मनाक मामला है। उनके अनुसार सरकार को इस विषय पर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

एनडीए का पलटवार: राजनीतिक ड्रामा का आरोप

भाजपा विधायक राम कदम ने कांग्रेस पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी और उनकी पार्टी पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाती रही है और अब अचानक राम की चिंता जताना महज राजनीतिक ड्रामा है। उन्होंने यह भी कहा कि दान चोरी के मामले की जाँच पहले से चल रही है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने भी कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एसआईटी सक्रिय रूप से कार्रवाई कर रही है, सात से आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और प्रारंभिक रिपोर्ट भी सौंप दी गई है। निरुपम के अनुसार अंतिम रिपोर्ट जल्द आएगी और सभी दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। उन्होंने जोड़ा कि जो लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे, वे अब इस मुद्दे पर खुद को राम भक्त दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

शिवसेना नेता शाइना एनसी ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि मामले की स्वतंत्र जाँच ज़रूर होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए, लेकिन इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक सबसे महत्वपूर्ण यह पता लगाना है कि श्रद्धालुओं का दान कहाँ गया।

इंडिया गठबंधन के सहयोगियों का समर्थन

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं और मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष हैं, इसलिए इस मामले पर चिंता जताना और प्रधानमंत्री को पत्र लिखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। दुबे ने याद दिलाया कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों हुई थी, इसलिए उन्हें भी इस मामले पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी पहले ही सीबीआई जाँच की माँग कर चुकी है।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पूर्व नेता मृत्युंजय तिवारी ने भी विपक्ष का समर्थन करते हुए कहा कि जनता से जुड़े मुद्दे उठाना विपक्ष की संवैधानिक जिम्मेदारी है और यही किया जा रहा है।

एसआईटी जाँच: अब तक क्या हुआ

गौरतलब है कि अयोध्या राम मंदिर में कथित दान गबन और वित्तीय अनियमितताओं की जाँच के लिए एसआईटी पहले से गठित है। अब तक सात से आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और प्रारंभिक रिपोर्ट जाँच एजेंसी को सौंप दी गई है। अंतिम रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में श्रद्धालुओं के बीच मंदिर की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच असली सवाल यह है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दान खातों का सार्वजनिक ऑडिट कब होगा और जाँच की निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता पर कोई ठोस सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है। शिवसेना (यूबीटी) की सीबीआई जाँच की माँग और शाइना एनसी का राजनीतिकरण न करने का आग्रह — दोनों एनडीए के भीतर की असहजता को भी दर्शाते हैं। जब तक ट्रस्ट का स्वतंत्र ऑडिट नहीं होता और जाँच की निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं होती, करोड़ों श्रद्धालुओं का भरोसा दाँव पर रहेगा।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामला क्या है?
यह मामला श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद, सोना, चाँदी और अन्य दान में कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। इस मामले की जाँच के लिए एसआईटी गठित की गई है और अब तक 7 से 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
राहुल गांधी और खड़गे ने PM मोदी को पत्र में क्या माँगा?
दोनों नेताओं ने 19 जुलाई को लिखे पत्र में ट्रस्ट के दान खातों का पूरा सार्वजनिक लेखा-जोखा सामने लाने और राजनीतिक प्रभाव से परे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने की माँग की। उन्होंने इसे विपक्ष की संवैधानिक जिम्मेदारी बताया।
एनडीए ने विपक्ष की माँग को राजनीतिक क्यों बताया?
भाजपा विधायक राम कदम और शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि जो पार्टी पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाती रही, उसका अब राम मंदिर की चिंता जताना राजनीतिक ड्रामा है। उनका तर्क है कि एसआईटी पहले से जाँच कर रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
एसआईटी जाँच में अब तक क्या हुआ है?
एसआईटी ने कथित दान गबन और वित्तीय अनियमितताओं की जाँच में 7 से 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। अंतिम रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद है।
शिवसेना (यूबीटी) और राजद का इस मामले पर क्या रुख है?
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने एसआईटी जाँच के साथ-साथ सीबीआई जाँच की माँग दोहराई और कहा कि प्रधानमंत्री को स्वयं इस मामले पर ध्यान देना चाहिए। राजद के पूर्व नेता मृत्युंजय तिवारी ने विपक्ष का समर्थन करते हुए इसे संवैधानिक जिम्मेदारी बताया।
राष्ट्र प्रेस
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