राम मंदिर ट्रस्ट ने SBI पर जताई नाराज़गी, प्रवक्ता नियुक्ति का फैसला; CEO चयन को मिला एक माह का अतिरिक्त समय
सारांश
मुख्य बातें
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी मंडल ने 22 जुलाई 2026 को अयोध्या में आयोजित बैठक में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया और वित्त समिति को बैंक के साथ भविष्य के संबंधों की समीक्षा करने के निर्देश दिए। बैठक में चढ़ावा राशि की गणना में कथित अनियमितताओं, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन, आधिकारिक प्रवक्ता की नियुक्ति और धार्मिक समिति के पुनर्गठन सहित कई अहम निर्णय लिए गए।
SBI पर ट्रस्ट की नाराज़गी और वित्तीय समीक्षा
ट्रस्ट के महामंत्री कृष्ण मोहन द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, चढ़ावा राशि की गणना के लिए SBI के साथ हुए एमओयू (MOU) की समीक्षा बैठक में की गई। न्यासी मंडल ने कहा कि बैंक की जिम्मेदारियों के निर्वहन में त्रुटियाँ और अनियमितताएँ सामने आने के बाद बैंक की प्रतिक्रिया अपेक्षित गंभीरता वाली नहीं रही। इस पर न्यासी मंडल ने निराशा व्यक्त करते हुए ट्रस्ट की वित्त समिति को SBI के साथ भविष्य के संबंधों और पूरी कार्यप्रणाली की समीक्षा कर आवश्यक निर्णय लेने के निर्देश दिए।
गौरतलब है कि चढ़ावा राशि की गणना में कथित अनियमितताओं की जाँच कर रहे विशेष जाँच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट अभी तक ट्रस्ट को प्राप्त नहीं हुई है, इसीलिए इस मुद्दे पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका। बैठक में उच्चतम न्यायालय में इस मामले से संबंधित लंबित याचिकाओं और न्यायालय के आदेशों का भी संज्ञान लिया गया।
सुरक्षा और पारदर्शिता के उपाय
न्यासियों ने मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि चढ़ावा राशि की गणना कक्ष सहित सभी कैमरों की निगरानी तक सुरक्षा अधिकारियों की पहुँच पहले से सुनिश्चित है, जिस पर न्यासी मंडल ने संतोष व्यक्त किया। इसके अतिरिक्त, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के सहायक संस्थान की टकसाल (Mint) के साथ स्वर्ण एवं रजत चढ़ावे की मात्रा और शुद्धता की जाँच की व्यवस्था निरंतर जारी रखने का निर्णय लिया गया, ताकि पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।
CEO चयन में देरी, सचिव की नियुक्ति को मंजूरी
मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन के लिए गठित समिति ने बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होने का हवाला देते हुए चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक माह के अतिरिक्त समय का अनुरोध किया, जिसे न्यासी मंडल ने स्वीकार कर लिया। श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए और CEO की नियुक्ति में हो रही देरी के मद्देनज़र प्रशासनिक कार्य सुचारु रखने के लिए एक सचिव की नियुक्ति को भी मंजूरी दी गई।
यह ऐसे समय में आया है जब श्रावण मास के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। न्यासी मंडल ने इसी को ध्यान में रखते हुए संभावित भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की।
प्रवक्ता नियुक्ति और धार्मिक समिति का पुनर्गठन
बैठक में निर्णय लिया गया कि मंदिर और ट्रस्ट से जुड़ी आधिकारिक जानकारी जनता तक पहुँचाने और मीडिया के माध्यम से समाज के साथ नियमित संवाद बनाए रखने के लिए ट्रस्ट एक आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त करेगा। इसके साथ ही मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना की परंपरागत प्रामाणिकता, धार्मिक मर्यादा और शुचिता बनाए रखने के उद्देश्य से धार्मिक समिति का पुनर्गठन किया गया।
स्वामी गोविंद देव गिरि की अध्यक्षता वाली पुनर्गठित समिति में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ, स्वामी युगपुरुष परमानंद, स्वामी दिनेंद्रदास, स्वामी कमलनयनदास, महंत राजकुमार दास, स्वामी रामानंद दास और स्वामी मिथिलेश्नंदिनी शरण को सदस्य बनाया गया है।
श्रद्धालुओं की संख्या और न्यासी पदों की रिक्तियाँ
ट्रस्ट ने कहा कि हाल के दिनों में लगाए गए विभिन्न आरोपों और कथित दुष्प्रचार के बावजूद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। न्यासी मंडल ने संत समाज, देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और अवध क्षेत्र के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। न्यासी मंडल ने ट्रस्ट में रिक्त पड़े न्यासी पदों की नियुक्ति प्रक्रिया की भी समीक्षा की और कहा कि इस प्रक्रिया को पूरा होने में अभी कुछ और सप्ताह लग सकते हैं। आने वाले हफ्तों में CEO नियुक्ति, SIT रिपोर्ट और रिक्त न्यासी पदों की भर्ती — तीनों मोर्चों पर ट्रस्ट के फैसले निर्णायक साबित होंगे।